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भारत में अवैध घुसपैठ पर अब होगी जेल, लेकिन इस देश में मिलती है कोड़े मारने की सजा; सबसे कठोर है कानून

Immigration And Foreigners Act 2025: भारत ने 1 सितंबर से इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट 2025 लागू कर दिया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जहां पर इसके लिए सख्त नियम हैं.

भारत सरकार ने अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशी नागरिकों और इमीग्रेशन से जुड़े मामलों पर सख्ती दिखाते हुए इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 को 1 सितंबर से लागू कर दिया है. इस संबंध में गृह मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी किया. यह बिल संसद के बजट सत्र के दौरान पारित हुआ था और 4 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दी थी. अब यह कानून पूरे देश में लागू हो चुका है और इसके तहत भारत में प्रवेश करने, रुकने या बाहर जाने के लिए फर्जी पासपोर्ट या वीजा का इस्तेमाल करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी.

कितनी होगी सजा

ऐसे मामलों में अधिकतम 7 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. वहीं, न्यूनतम सजा 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया है. कानून यह भी कहता है कि अगर कोई विदेशी नागरिक बिना वैध पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट, जैसे बिना वीजा के भारत में दाखिल होता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. इस स्थिति में उसे 5 साल तक की जेल, 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों दंड मिल सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक देश ऐसा भी है, जहां पर अवैध घुसपैठ के लिए कोड़े मारने की सजा मिलती है. चलिए जानें.

किस देश में मारे जाते हैं कोड़े

मलेशिया उन देशों में से एक है, जहां पर अवैध रूप से घुसपैठ करने या बिना वैध वीजा के रहने वालों को बेहद सख्त सजा दी जाती है. यहां का इमिग्रेशन एक्ट 1959/63 साफ तौर पर कहता है कि अगर कोई विदेशी व्यक्ति बिना अनुमति देश में प्रवेश करता है, तो उसे जेल के साथ-साथ कोड़े मारने की सजा भी हो सकती है. कानून के अनुसार अवैध प्रवेश करने वालों पर 10,000 रिंगिट तक जुर्माना, पांच साल तक की जेल और अधिकतम छह कोड़े मारे जाने का प्रावधान है. कई मामलों में यह सजा जुर्माने और जेल दोनों के साथ दी जाती है.

मानवाधिकार संगठन ने की थी सजा की आलोचना

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस कानून की कड़ी आलोचना की है. एमनेस्टी का कहना है कि मलेशिया में कोड़े मारने की सजा अब व्यवस्थित रूप से लागू की जाने वाली यातना बन चुकी है. संगठन की रिपोर्ट बताती हैं कि 2002 से 2008 के बीच करीब 35 हजार विदेशी नागरिकों को इमिग्रेशन उल्लंघनों के लिए कोड़े मारे गए, जिनमें सबसे अधिक संख्या इंडोनेशिया के लोगों की थी. इस सजा के लिए मलेशियाई सरकार का तर्क है कि यह सख्ती अवैध घुसपैठ को रोकने और देश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है.

जरूरी हैं कड़े कानून

दरअसल मलेशिया में लाखों विदेशी नागरिक नौकरी की तलाश में आते हैं और उनमें से कई बिना वैध दस्तावेजों के देश में दाखिल हो जाते हैं. सरकार का दावा है कि कड़े कानून के बिना इस समस्या पर काबू पाना मुश्किल है. यही वजह है कि मलेशिया को एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में उन देशों की सूची में रखा जाता है, जहां अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सबसे कठोर कार्रवाई होती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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