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IAS-IPS का ट्रांसफर हो जाए तो कितने दिन में खाली करना होता है सरकारी आवास, यूपी में बड़े लेवल पर तबादले

यूपी में हाल ही में 27 IPS और 9 IAS अधिकारियों के तबादले हुए हैं. इस फेरबदल के साथ ही सरकारी आवास खाली करने के नियमों की चर्चा तेज हो गई है. आइए जानें सरकारी आवास कितने दिन में खाली करना होता है.

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  • यूपी में 27 आईपीएस और 9 आईएएस अधिकारियों के हुए तबादले.
  • तबादले पर सरकारी आवास खाली करने के लिए 30 दिन.
  • एक ही शहर में स्थानांतरण पर 15 दिन का मिलता है समय.
  • नियम उल्लंघन पर भारी जुर्माना या जबरन खाली कराया जा सकता है बंगला.

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर तबादला एक्सप्रेस तेज रफ्तार से दौड़ी है. योगी सरकार ने मार्च 2026 के आखिरी दिनों में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल दी हैं. जब भी इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों के ट्रांसफर होते हैं, तो आम जनता के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर इन रसूखदार अफसरों को अपना पुराना आलीशान सरकारी बंगला कितने दिनों में खाली करना पड़ता है. नियम और कायदे की दुनिया में इन बंगलों को छोड़ने की भी एक तय समय सीमा होती है, जिसे जानना बेहद दिलचस्प है.

यूपी में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है. इस ताजा फेरबदल में कुल 27 आईपीएस (IPS) अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिनमें 13 जिलों के एसपी और एसएसपी स्तर के अफसर शामिल हैं. इससे ठीक दो दिन पहले सरकार ने 9 आईएएस (IAS) अधिकारियों के भी तबादले किए थे. मार्च 2026 के इस बड़े घटनाक्रम ने राज्य की पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी में नई हलचल पैदा कर दी है. अब इन अधिकारियों को अपनी पुरानी तैनाती वाली जगह छोड़कर नई पोस्टिंग पर कार्यभार संभालना होगा.

बंगला खाली करने की तय समय सीमा क्या है?

जब किसी आईएएस या आईपीएस अधिकारी का तबादला होता है, तो उन्हें अपना पुराना सरकारी आवास खाली करने के लिए एक निश्चित समय दिया जाता है. सामान्य नियमों के अनुसार, तबादला आदेश जारी होने या नई जगह पर ड्यूटी जॉइन करने के बाद अधिकारी के पास अपना पुराना बंगला खाली करने के लिए अधिकतम 1 महीने (30 दिन) का समय होता है. इस एक महीने की अवधि को इसलिए रखा गया है ताकि अधिकारी अपना सामान समेट सकें और परिवार के साथ नई जगह पर शिफ्ट होने की तैयारी कर सकें. यह नियम सभी अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों पर समान रूप से लागू होता है. 

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एक ही शहर में तबादले पर अलग नियम

कई बार ऐसा होता है कि अधिकारी का तबादला उसी शहर के भीतर किसी दूसरे विभाग या पद पर हो जाता है. ऐसी स्थिति में आवास खाली करने के नियम थोड़े बदल जाते हैं. अगर अधिकारी उसी शहर में तैनात रहता है और उसे वहां दूसरा आवास आवंटित होना है, तो उसे आमतौर पर 15 दिनों के भीतर अपना पुराना आवास खाली करने का अनुरोध करना होता है. स्थानीय स्तर पर होने वाले बदलावों में समय सीमा कम रखी जाती है क्योंकि अधिकारी को शहर नहीं बदलना पड़ता, केवल दफ्तर और जिम्मेदारी बदलती है. 

नियम न मानने पर क्या कार्रवाई?

सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए रखने की कोशिश करने वाले अधिकारियों के लिए नियम काफी सख्त हैं. यदि कोई अधिकारी तय की गई 30 दिनों की समय सीमा के भीतर अपना सरकारी आवास खाली नहीं करता है, तो सरकार उन पर भारी जुर्माना लगा सकती है. इसे तकनीकी भाषा में डैमेज चार्जेस कहा जाता है, जो बाजार दर से कई गुना अधिक हो सकता है. इतना ही नहीं, अगर अधिकारी फिर भी बंगला खाली नहीं करता है, तो प्रशासन के पास यह अधिकार होता है कि वह पुलिस बल का प्रयोग कर परिसर को जबरन खाली करवाए.

रिटायरमेंट के बाद आवास का नियम

सरकारी आवास खाली करने की शर्त केवल तबादलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिटायरमेंट (सेवानिवृत्ति) पर भी लागू होती है. जब कोई वरिष्ठ अधिकारी अपनी सेवा पूरी कर रिटायर होता है, तो उसे भी नियमों के तहत एक निश्चित अवधि के भीतर अपना सरकारी बंगला सरकार को सौंपना होता है. हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों या मेडिकल इमरजेंसी के आधार पर अधिकारी विभाग से कुछ अतिरिक्त समय की मांग कर सकते हैं, लेकिन इसकी अनुमति मिलना पूरी तरह से सरकार के विवेक पर निर्भर करता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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