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Condom Demand: कोई भी युद्ध होने पर क्यों बढ़ जाती है कंडोम की डिमांड, किस चीज में होते हैं इस्तेमाल?

Condom Demand: जब भी कहीं जंग शुरू होती है तो कंडोम की डिमांड अपने आप बढ़नी शुरू हो जाती है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से कंडोम की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
  • सैनिक युद्धक्षेत्र में हथियारों को धूल-पानी से बचाने में इस्तेमाल करते।
  • कंडोम माचिस, बैटरी जैसी जरूरी चीजों को नमी से बचाते।
  • नौसेना ने विस्फोटक उपकरण को वाटरप्रूफ बनाने में किया था उपयोग।

Condom Demand: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा यह युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है. जब भी कोई संघर्ष छिड़ता है तो सप्लाई चेन बदल जाती है. इसी सप्लाई चेन में हुई बदलाव की वजह से ऐसा कहा जा रहा है कि भविष्य में कंडोम की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. वैसे तो आमतौर पर इसे यौन स्वास्थ्य से जोड़ा जाता है लेकिन कंडोम लंबे समय से सैन्य लॉजिस्टिक्स का एक जरूरी हिस्सा रहा है. आइए जानते हैं युद्ध के समय में इनकी मांग क्यों बढ़ जाती है और आखिर ये किस चीज में इस्तेमाल किए जाते हैं.

युद्ध के मैदान में इस्तेमाल 

युद्ध क्षेत्र में बहुमुखी प्रतिभा का मतलब होता है जीवित रहना. कंडोम हल्के, वाटरप्रूफ, लचीले और काफी ज्यादा टिकाऊ होते हैं. यह उन्हें कठोर और मुश्किल वातावरण में काम करने वाले सैनिकों के लिए एक कीमती औजार बनाते हैं. 

हथियारों की सुरक्षा 

धूल, रेत और पानी आसानी से हथियारों को खराब कर सकते हैं. यह खतरा रेगिस्तान या फिर गीले इलाकों में ज्यादा होता है. सैनिक अक्सर अपनी राइफलों के मुंह पर कंडोम चढ़ा देते हैं. ऐसा इसलिए ताकि गंदगी अंदर ना जा सके. इसका मटेरियल इतना पतला होता है कि इससे गोलियां चलाई जा सकती हैं और उनकी सटीकता पर कोई असर नहीं पड़ता. 

जरूरी सामान को सूखा रखना 

नमी माचिस, नक्शे, बैटरी और कम्युनिकेशन डिवाइस जैसी जरूरी चीजों को खराब कर सकती है. कंडोम कामचलाऊ वॉटरप्रूफ कवर का काम करते हैं. यह इन चीजों को बारिश, नमी या फिर गलती से पानी में डूबने से बचाता है. ऐसे वातावरण में जहां उपकरण की जरा सी भी खराबी खतरनाक साबित हो सकती है, यह तरकीब काफी कीमती साबित होती है. 

नौसेना युद्ध और विस्फोटक अभियान 

कंडोम का सैन्य इस्तेमाल सिर्फ जमीन तक ही सीमित नहीं है. 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना ने कथित तौर पर लिम्पेट माइंस वाटरप्रूफ बनाने के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया था. इससे यह पक्का हुआ की टाइमिंग मेकैनिज्म पाने के नीचे भी सूखा रहे. इससे गोताखोर सुरक्षित रूप से विस्फोटक लगा सकें और विस्फोट से पहले पीछे हट सकें.

प्राथमिक उपचार और चिकित्सा इस्तेमाल 

जब चिकित्सा सामग्री कम पड़ जाती है तो कामचलाऊ उपायों का सहारा लेना जरूरी हो जाता है. इलाज के दौरान कंडोम का इस्तेमाल आपातकालीन दस्तानों के तौर पर या फिर घावों को ढकने के लिए वॉटरप्रूफ कवर के तौर पर किया जा सकता है. इससे संक्रमण का खतरा कम होता है.

यह भी पढ़ें: अकेले पड़े ट्रंप, कौन-कौन से देश साथ देने से कर चुके इनकार; अब ईरान की तरफ कौन?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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