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Middle East Crisis: अकेले पड़े ट्रंप, कौन-कौन से देश साथ देने से कर चुके इनकार; अब ईरान की तरफ कौन?

Middle East Crisis: हाल ही में इजरायल ने अमेरिका को एक बड़ा झटका दिया है. इजरायल ने ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन के लिए अपनी सेना देने से मना कर दिया है. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.

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  • अमेरिका के सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर रहे हैं।
  • इजरायल ने भी ईरान में थल सेना भेजने से मना कर दिया है।
  • रूस और चीन ईरान के राजनीतिक व आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।
  • पाकिस्तान, सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देशों ने तनाव कम करने की अपील की।

Middle East Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. इसी बीच एक चौंकाने वाला कूटनीतिक बदलाव सामने आ रहा है. दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को वैश्विक मंच पर लगातार अकेला पाते जा रहे हैं. हाल ही में इजरायल ने भी अमेरिका को एक बड़ा झटका दे दिया है. इजरायल ने यह साफ कह दिया है कि ग्राउंड ऑपरेशन के लिए उनकी सेना ईरान नहीं जाएगी. इसी बीच आइए जानते हैं कि मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष में अमेरिका का साथ देने के लिए किन देशों ने मना कर दिया है और साथ ही ईरान का कौन समर्थन कर रहा है.

अमेरिका का समर्थन करने से किसने किया इनकार?

नाटो के प्रमुख सहयोगी जिनमें जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम भी शामिल हैं, युद्ध के प्रयासों में शामिल होने से साफ इनकार कर चुके हैं. उनका ध्यान तनाव बढ़ाने के बजाय क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने पर केंद्रित है. खास तौर से फ्रांस ने अतिरिक्त सैनिक भेजने की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. 

इसी के साथ इजरायल ने भी ईरान में अपनी थल सेना भेजने से इनकार कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायली सेना वर्तमान में चल रहे अभियानों की वजह से पहले से ही काफी व्यस्त है. इन अभियानों में दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रहे अभियान शामिल हैं. इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों ने भी नौसेना भेजने या फिर सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए अमेरिका के दबाव का विरोध किया है.

वहीं इटली ने अमेरिका की खुले तौर पर आलोचना की है और उसके नेतृत्व ने इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है. इसी बीच न्यूजीलैंड ने अमेरिका की लीडरशिप वाली पहलों में भाग लेने से इनकार कर दिया है. 

ईरान के समर्थन का बढ़ता दायरा 

जहां एक तरफ अमेरिका को अपने सहयोगियों से प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान अपने भू राजनीतिक समर्थन को मजबूत कर रहा है. रूस ने एक व्यापक रणनीति साझेदारी के जरिए ईरान के साथ अपने संबंधों को और गहरा किया है. रूस कथित तौर पर ईरान को एडवांस्ड रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति भी कर रहा है. इस बीच चीन ईरान का सबसे बड़ा आर्थिक समर्थक बना हुआ है. वह ईरान के तेल का एक बड़ा हिस्सा खरीदता है.

अगर उत्तर कोरिया की बात करें तो यह भी सैन्य और तकनीकी सहयोग के जरिए ईरान के साथ जुड़ा हुआ है. यह एक ऐसे भू राजनीतिक गुट का हिस्सा है जो पश्चिमी प्रभाव को चुनौती देता है.

मुस्लिम देशों ने तनाव कम करने की अपील की 

दिलचस्प बात यह है कि कई प्रमुख मुस्लिम बहुल देश जिनमें पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की शामिल हैं, ने सैन्य रूप से किसी का भी पक्ष नहीं लिया है. इसके बजाय वे कूटनीतिक समाधानों और तनाव कम करने पर जोर दे रहे हैं.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज किन देशों के जहाजों को पार करने की परमीशन, भारत के अलावा और कौन-कौन से नाम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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