IAS-IPS या IFS, किस सर्विस में सबसे ज्यादा हैं ओबीसी? एक नजर में देखें डिटेल
ओबीसी वर्ग की बात करें तो तीनों शीर्ष सेवाओं में उनकी भागीदारी मजबूत और संतुलित दिखती है. आईपीएस में हल्की बढ़त के साथ ओबीसी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है.

यूपीएससी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के मन में एक सवाल हमेशा रहता है कि आखिर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस में किस वर्ग की कितनी हिस्सेदारी है? संसद में पेश ताजा आंकड़ों ने इस चर्चा को फिर तेज कर दिया है. खासकर ओबीसी वर्ग की भागीदारी को लेकर नई तस्वीर सामने आई है. क्या सचमुच किसी एक सेवा में ओबीसी सबसे आगे हैं? आंकड़े क्या कहते हैं, और आरक्षण का गणित कैसे काम कर रहा है? यहां पूरी रिपोर्ट पढ़िए.
संसद में पेश हुई रिपोर्ट
हाल ही में Union Public Service Commission की सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई. इसी बीच केंद्र सरकार ने संसद में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के स्वीकृत पदों और वर्तमान तैनाती को लेकर स्थिति रिपोर्ट रखी. रिपोर्ट में बताया गया कि देश में कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत सिविल सेवकों की कमी है. इसके साथ ही 2020 से 2024 तक की परीक्षाओं में आरक्षित वर्गों के चयन का विस्तृत ब्योरा भी साझा किया गया है.
2020-2024 में ओबीसी का चयन आंकड़ा
पिछले पांच वर्षों में ओबीसी वर्ग से कुल 731 अभ्यर्थियों का चयन हुआ. इनमें आईएएस में 245, आईपीएस में 255 और आईएफएस में 231 अधिकारी शामिल हैं. साफ है कि तीनों सेवाओं में ओबीसी की मजबूत उपस्थिति रही. एससी वर्ग से कुल 371 उम्मीदवार चुने गए. इनमें आईएएस के लिए 135, आईपीएस के लिए 141 और आईएफएस के लिए 95 नाम शामिल हैं. एसटी वर्ग का आंकड़ा 186 रहा. इनमें आईएएस के 67, आईपीएस के 71 और आईएफएस के 48 अधिकारी बने.
किस सेवा में ओबीसी सबसे ज्यादा?
आंकड़ों को देखें तो ओबीसी वर्ग के सबसे ज्यादा अधिकारी आईपीएस सेवा में चुने गए हैं. कुल 255 ओबीसी उम्मीदवार आईपीएस में गए, जबकि आईएएस में 245 और आईएफएस में 231 का चयन हुआ. यानी तीनों में अंतर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन संख्या के लिहाज से आईपीएस थोड़ा आगे है.
अगर कुल आरक्षित वर्गों को मिलाकर देखें तो भी आईपीएस सेवा में 467 चयन हुए, जबकि आईएएस में 447 और आईएफएस में 374. इससे यह संकेत मिलता है कि आरक्षित वर्गों के बीच आईपीएस का आकर्षण ज्यादा रहा.
आरक्षण प्रतिशत से मेल खाते आंकड़े
केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार सिविल सेवाओं में ओबीसी को 27 प्रतिशत, एससी को 15 प्रतिशत और एसटी को 7.5 प्रतिशत आरक्षण मिलता है. चयन के ये आंकड़े इसी तय हिस्सेदारी के अनुरूप नजर आते हैं.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि सेवा की प्रकृति और कैडर प्राथमिकता भी चयन पर असर डालती है. आईपीएस में जल्दी फील्ड पोस्टिंग और सीधा प्रशासनिक नियंत्रण होता है, जिससे कई उम्मीदवार इसे प्राथमिकता देते हैं. वहीं आईएएस नीति निर्माण और प्रशासनिक फैसलों के लिए जानी जाती है.
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Source: IOCL
























