पत्नी झूठे केस में फंसाने की देती है धमकी? आप भी कर सकते हैं शिकायत, जानिए पुरुषों के पास क्या-क्या होते हैं अधिकार
Husband Legal Rights: आज के दौर में कई केस ऐसे भी आते हैं जब पति अपनी पत्नियों के खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत करते हैं. ऐसे में शादीशुदा पुरुषों को यह जानना जरूरी है कि जब पत्नी सताए तो क्या करें.

आमतौर पर यही देखा गया है कि पत्नियां अपने पतियों के सताने की वजह से कानून का सहारा लेती हैं और उनके खिलाफ कंप्लेन दर्ज करती हैं. कोर्ट भी पत्नियों की बात पर ध्यान देते हुए फैसला सुनाता है. महिलाओं को कानूनी अधिकार दिए गए हैं, जिनका वो इस्तेमाल करती हैं और उनको इस पर न्याय भी मिलता है. लेकिन आज के दौर में बहुत सी महिलाएं उनको मिले कानूनी अधिकार का गलत इस्तेमाल करने लगी हैं और पतियों को प्रताड़ित भी करती हैं. ऐसे में पति सोचते होंगे कि सारे अधिकार जब महिलाओं को मिले हैं, तो पतियों के पास क्या अधिकार हैं. चलिए आज पतियों के अधिकारों पर ही बात करते हैं.
पत्नियां पतियों को सताएं तो वो कहां जाएं
करीब दो साल पहले की बात है महेश कुमार तिवारी नाम के एक वकील ने राष्ट्रीय महिला आयोग की तरह राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग की थी. उन्होंने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की थी. इन आंकड़ों में लिखा था कि साल 2021 में देशभर में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की, इनमें से शादीशुदा मर्दों की संख्या 81,063 थी, जबकि 28,680 शादीशुदा महिलाएं थीं. ऐसे में पतियों को उनके अधिकार जानना बहुत जरूरी है. यूके और यूएस जैसे देशों की बात करें तो वहां पर घरेलू हिंसा के लिए जेंडर न्यूट्रल कानून है, लेकिन भारत में यह कानून सिर्फ महिलाओं के लिए है. ऐसे में अगर पत्नियां पतियों को सताएं तो वो कहां जाएं.
क्या हैं पतियों के कानूनी अधिकार
वैसे तो पतियों के पास पत्नियों की तरह सामान्य अधिकार नहीं हैं, लेकिन उनको अपनी सुरक्षा और मान-सम्मान के लिए कुछ कानूनी अधिकार जरूर दिए गए हैं. चलिए इस बारे में आपको प्वाइंट वाइज बताते हैं-
- पत्नी अगर पति पर घरेलू हिंसा कर रही है तो वह पुलिस की मदद ले सकता है. अगर पत्नी पति के ऊपर गलत काम के लिए जोर या दबाव बना रही है, तो वह 100 नंबर या फिर महिला हेल्पलाइन नेबर 1091 पर भी कॉल करके मदद ले सकता है.
- पति ने अगर अपनी कमाई से खुद प्रॉपर्टी बनाई है जिसे स्व-अर्जित प्रॉपर्टी कहा जाता है, उस पर सिर्फ पति का अधिकार होता है. पत्नी या बच्चे उस पर अधिकार नहीं जता सकता हैं, हां अगर पति चाहे तो वह उनको ये संपत्ति दे सकता है. अगर वो चाहे तो किसी ट्रस्ट को भी दान कर सकता है.
- पत्नी अगर पति को मानसिक प्रताड़ना देती है जैसे कि दोस्तों-रिश्तेदारों से न मिलने देना, घर से बाहर न निकलने देना, परिवार से न मिलने देना, बार-बार नामर्द कहना, शारीरिक हिंसा या नुकसान पहुंचाना, हर काम में ज्यादा टोकना, सबके सामने या फिर अकेले में गाली-गलौच करना, भावनात्मक हिंसा करना या फिर बार-बार आत्महत्या की धमकी देने पर वह पत्नी के खिलाफ पुलिस और कोर्ट दोनों की मदद ले सकता है.
- पत्नियों की तरह पतियों को भी हिंदू मैरिज एक्ट के तहत मेंटेनेंस यानि भरण-पोषण का अधिकार दिया गया है. हालांकि मामले में सुनवाई के बाद मेंटेनेंस की रकम कोर्ट तय करती है.
- पतियों को भी यह अधिकार है कि वो तलाक के लिए याचिका दायर कर सकते हैं. इसमें उनको अपनी पत्नी की सहमति की भी जरूरत नहीं है. वो अत्याचार या फिर जान का डर का हवाला देते हुए याचिका दर्ज करा सकते हैं. कोर्ट ने पतियों को यह अधिकार दिया है कि वो एकतरफा तलाक या फिर आपसी सहमति के बिना भी तलाक ले सकता है.
- बच्चे की कस्टडी पर पति का भी बराबर का अधिकार होता है. लेकिन कोर्ट बच्चे के भविष्य को देखते हुए आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावक को ही उसकी कस्टडी देते हैं. अगर बच्चा बहुत छोटा है तब उसकी देखभाल की जिम्मेदारी मां के पास होती है. लेकिन अगर मां सक्षम नहीं है तो कोर्ट फैसले में बदलाव कर सकती है.
यह भी पढ़ें: गधी के दूध से बने पनीर की कीमत में आ जाएगी नई बुलेट, जानकर उड़ जाएंगे आपके होश
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























