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मिस्र के पिरामिड बनाने के लिए बड़े-बड़े पत्थर कैसे ढोते थे लोग, जानिए क्या कहती है रिसर्च

दुनिया के सात अजूबों में शामिल मिस्त्र के पिरामिड के बारे में कौन नहीं जानता है.लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिस्त्र के पिरामिड के लिए बड़े-बड़े पत्थरों को उस वक्त लोग कैसे ढोते थे और ये कहां से आता था.

बचपन और बड़े होने पर भी आपने दुनिया के सात अजूबों में शामिल पिरामिड के बारे में जरूर पढ़ा होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेगिस्तानी इलाकों में कैसे अनगिनत बड़े-बड़े पत्थरों से पिरामिड बने थे. आज हम आपको बताएंगे कि आखिर कैसे रेगिस्तान जैसी जगहों पर पिरामिड का निर्माण हुआ था. 

पिरामिड

सात अजूबों में शामिल पिरामिड का गीजा में कई हजार साल पहले निर्माण किया गया था. इनकी विशाल बनावट और मिस्र में मौजूदगी एक प्राचीन सभ्यता की सरलता का सबूत है. लेकिन इन ऐतिहासिक इमारतों को एक रेगिस्तानी इलाके में कैसे बनाया गया, ये आज भी एक रिसर्च का विषय है. बता दें कि एक रिसर्च में पाया गया है कि नील नदी के जरिए बड़े-बड़े पत्थरों को ढोया जाता था.

पिरामिड निर्माण का सच 

बता दें कि नील नदी पिरामिड से कई किलोमीटर दूर है. इसलिए नई रिसर्च में इतनी दूरी से पत्थरों को पिरामिड की साइट तक लाना सवाल खड़े करता है. नए रिसर्च में कुछ नई जानकारी सामने आई है. वैज्ञानिकों ने नील नदी की एक लंबे समय से खोई हुई शाखा जो अब रेत और खेत के नीचे दबी हुई है, उसकी खोज की है. सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल करते हुए  एक्सपर्ट्स ने पिरामिड साइट के पास एक प्राचीन नदी शाखा की लोकेशन की पहचान की है. उन्होंने जियोफिजिकल सर्वे और सेडीमेंट कोर के जरिए अपने नतीजों की पुष्टि की है.

रिसर्चर्स ने अपने शोध के जरिए जमीन के नीचे नदी की तलछट और पुराने चैनलों का पता लगाया है. जो 64 किलोमीटर लंबी नदी की पुरानी शाखा की मौजूदगी का संकेत देता है. रिसर्चर्स ने पाया कि एक समय पर नदी की शाखा पिरामिड क्षेत्रों के पास बहती थी. उन्होंने नील नदी की शाखा का नाम “अहरामत” रखा है, जिसका अरबी में मतलब “पिरामिड” होता है. उनके मुताबिक नील नदी की प्राचीन शाखा ने पिरामिड के बनने और यहां तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई होगी. नदी ने बड़े पैमाने पर पत्थर के ब्लॉक और दूसरे साजो-सामान को पिरामिड की कंस्ट्रक्शन साइट तक पहुंचाना आसान बनाया होगा.

नील नदी की अहमियत

बता दें कि मिस्र के लिए नील नदी हमेशा से पानी के स्रोत से कहीं ज्यादा मायने रखती है. इस नदी ने एक लाइफलाइन के तौर पर काम किया है, यहां की जमीन और उसके लोगों को जीविका प्रदान की है. इतना ही नहीं नील नदी ने ट्रांसपोर्टेशन के तौर पर भी बड़ी सुविधा दी है. इससे लोगों को व्यापार और आवाजाही की सुविधा मिली है. ये मिस्र की सभ्यता की पहचान और विकास का केंद्र है.

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