रूस से कितना सस्ता है वेनेजुएला में क्रूड ऑयल, यहां से खरीदता है भारत तो कितना फायदा?
Russia vs Venezuela Oil: हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के बाद अमेरिका का ऐसा दावा है कि भारत रूस की बजाए अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. आइए जानें कि भारत को कहां का तेल सस्ता पड़ेगा.

भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है. इस बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने हलचल बढ़ा दी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और वेनेजुएला के साथ व्यापार बढ़ाएगा. हालांकि भारत की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह सवाल जरूर उठ खड़ा हुआ है कि अगर भारत वेनेजुएला की ओर रुख करता है तो उसे कितना फायदा हो सकता है और क्या उसके लिए वेनेजुएला से तेल खरीदना सस्ता पड़ेगा या रूस से महंगा होगा. चलिए इस रिपोर्ट में समझ लेते हैं.
वेनेजुएला के पास कितना बड़ा तेल का खजाना?
वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है. अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक उसके पास करीब 303 अरब बैरल का प्रमाणित कच्चा तेल भंडार है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 20 फीसदी है. इतनी बड़ी क्षमता के बावजूद वेनेजुएला कभी भी तेल बाजार में बड़ी ताकत नहीं बन पाया. इसकी वजह कमजोर बुनियादी ढांचा, पुरानी रिफाइनिंग तकनीक और लंबे समय से चल रही राजनीतिक अस्थिरता मानी जाती है.
भारत और वेनेजुएला का तेल का रिश्ता
भारत की तेल जरूरतें काफी बड़ी हैं, लेकिन उसका वेनेजुएला पर कभी ज्यादा भरोसा नहीं रहा है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में भारत ने वेनेजुएला से करीब 18 हजार मीट्रिक टन तेल आयात किया था. इसके बाद हर साल यह आंकड़ा घटता गया. 2020-21 तक आते-आते यह सिर्फ 4 हजार मीट्रिक टन रह गया. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते 2021-22 और 2022-23 में यह लगभग शून्य पर पहुंच गया. इसी दौर में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में सस्ता तेल खरीदना शुरू किया.
रूस का तेल कितना सस्ता पड़ा?
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से रूस को अपना तेल छूट पर बेचना पड़ा. भारत को इसका सीधा फायदा मिला. बाजार भाव के मुकाबले भारत को रूसी कच्चा तेल करीब 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलता रहा. अगर ब्रेंट क्रूड 63 डॉलर प्रति बैरल रहा, तो भारत को रूसी तेल लगभग 50 से 53 डॉलर में मिल गया. यही वजह रही कि रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया.
वेनेजुएला का तेल रूस से कितना अलग?
अब सवाल आता है कि वेनेजुएला का तेल कितना सस्ता और उपयोगी है. वेनेजुएला का ज्यादातर कच्चा तेल हेवी और हाई सल्फर वाला होता है. इसका मतलब है कि इसे रिफाइन करना आसान नहीं होता है. आम रिफाइनरी में यह तेल ज्यादा खर्च और समय मांगता है. इसी वजह से दुनिया के कई देश इस तेल से दूरी बनाए रखते हैं और इसकी कीमत भी हल्के क्रूड के मुकाबले कम रहती है.
भारत की रिफाइनरी यहां कैसे बनती हैं ताकत?
यहीं पर भारत को बड़ा फायदा मिलता है. भारत की रिफाइनरियां खास तौर पर इस तरह डिजाइन की गई हैं कि वे किसी भी क्वालिटी का कच्चा तेल प्रोसेस कर सकें. रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 21 से ज्यादा है, जो दुनिया में सबसे ऊंचे स्तरों में गिना जाता है. इसका मतलब है कि यहां बेहद भारी और सल्फर वाले तेल को भी आसानी से रिफाइन किया जा सकता है. नायरा एनर्जी जैसी रिफाइनरियां भी इस मामले में मजबूत हैं.
क्या वेनेजुएला से तेल भारत को सस्ता पड़ेगा?
कागजों पर देखें तो वेनेजुएला का हेवी क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूस के तेल से भी सस्ता मिल सकता है. लेकिन इसमें शिपिंग, इंश्योरेंस और प्रोसेसिंग की लागत जोड़नी होगी. वेनेजुएला भारत से काफी दूर है, जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्चा बढ़ जाता है. इसके बावजूद भारत के पास तकनीकी बढ़त है, जिससे वह इस तेल को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकता है.
सप्लाई और प्रतिबंधों की क्या है हकीकत?
एक और बड़ा पहलू यह है कि वेनेजुएला से वैश्विक उत्पादन सिर्फ करीब एक फीसदी आता है. यानी वहां से अचानक बहुत बड़ी सप्लाई मिलना आसान नहीं है. दूसरी ओर रूस से आने वाले तेल पर अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के प्रतिबंधों के चलते सप्लाई में उतार-चढ़ाव देखा गया है. आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर में रूस से भारत को आने वाला तेल तीन साल के निचले स्तर पर करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था.
अमेरिका से तेल आयात क्यों बढ़ा?
इसी बीच भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात भी बढ़ाया है. नवंबर 2025 में अमेरिका से आयात बढ़कर 27 लाख टन तक पहुंच गया, जो कुल आयात का 13 फीसदी से ज्यादा है. अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच अमेरिकी तेल आयात में करीब 92 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह दिखाता है कि भारत एक ही देश पर निर्भर रहने के बजाय विकल्प तैयार कर रहा है.
भारत के लिए रणनीतिक फायदा
कुल मिलाकर देखें तो वेनेजुएला से तेल खरीदना भारत के लिए एक अतिरिक्त विकल्प हो सकता है, न कि रूस पर पूरी तरह से निर्भर रहना. रूस का तेल फिलहाल सस्ता, स्थिर और पास का सौदा है. वहीं वेनेजुएला का तेल सस्ता जरूर है, लेकिन सप्लाई और दूरी इसकी बड़ी चुनौती है. भारत की असली ताकत यही है कि वह दुनिया के किसी भी कोने से तेल लेकर उसे रिफाइन कर सकता है और यही उसे वैश्विक बाजार में मजबूत बनाती है.
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