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आज से तीस साल पहले जंगल था गुरुग्राम, जानिए कैसे बन गया भारत की सबसे बड़ी साइबर सिटी?

Gurugram Development: आज का गुरुग्राम तीन दशक पहले के गुरुग्राम से काफी अलग है. आइए जानते हैं कि गुरुग्राम ने इतनी तेजी से विकास कैसे किया.

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  • गुरुग्राम, जो कभी बंजर था, आज भारत का प्रमुख आईटी हब है।
  • मारुति सुजुकी के आगमन से औद्योगिक विकास को मिली गति।
  • दिल्ली से निकटता और सस्ते जमीन ने उद्योगों को आकर्षित किया।
  • आर्थिक उदारीकरण और डीएलएफ के प्रोजेक्ट्स ने शहर को बदला।

Gurugram Development: सिर्फ तीन दशक पहले गुरुग्राम ज्यादातर एक बंजर और कम विकसित इलाका था. यह अरावली पहाड़ियों से घिरा हुआ था. यह इलाका गगनचुंबी इमारतों या फिर मल्टीनेशनल कंपनियों के बजाय अपनी पथरीली जमीन, कम आबादी और खेती की जमीन के लिए ज्यादा जाना जाता था. लेकिन आज गुरुग्राम भारत की सबसे बड़ी साइबर सिटी और देश के सबसे जरूरी कॉर्पोरेट और टेक्नोलॉजी हब में से एक बन चुका है. यहां 250 से ज्यादा फॉर्च्यून 500 कंपनियों के दफ्तर है. शहर का यह बदलाव आज के भारत की सबसे बड़ी शहरी सफलता की कहानियों में से एक माना जाता है. 

मारुति सुजुकी ने रखी थी औद्योगिक नींव

गुरुग्राम के सफर में पहला बड़ा मोड़ 1970 के दशक के आखिर और 1980 के दशक की शुरुआत में आया था. इस दौर में मारुति सुजुकी यहां आई. हरियाणा सरकार ने कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए मानेसर गुरुग्राम इलाके में जमीन दी. यह इस इलाके के लिए एक बड़ा औद्योगिक बदलाव लाने वाला साबित हुआ. 

जैसे-जैसे मारुति सुजुकी का विस्तार हुआ सैकड़ों सहायक उद्योग और ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां भी आसपास अपने काम शुरू करने लगीं. इससे रोजगार के नए मौके पैदा हुए और गुरुग्राम एक आईटी डेस्टिनेशन बनने से काफी पहले ही एक उभरते हुए औद्योगिक क्षेत्र में बदल गया. 

दिल्ली के पास कि इसकी जगह 

गुरुग्राम का सबसे बड़ा फायदा यह था कि यह दिल्ली के भौगोलिक रूप से काफी करीब था. क्योंकि यह शहर सीधे तौर पर देश की राजधानी से सटा हुआ है इस वजह से कंपनियों को दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाना आसान लगा. इसी के साथ उन्हें दिल्ली की जगह की कमी और आसमान छूती प्रॉपर्टी की कीमतों जैसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा. 

ऐसे समय में दिल्ली में काफी भीड़ बढ़ रही थी और वह महंगी होती जा रही थी लेकिन गुरुग्राम ने काफी सस्ती दरों पर जमीन के बड़े-बड़े टुकड़े उपलब्ध करा दिए. इसने उद्योगपतियों और निजी रियल एस्टेट डेवलपर्स को अपनी तरफ खींचा.

दुनिया भर की कंपनियों का आना 

गुरुग्राम की तेजी से हुई तरक्की के पीछे एक और बड़ी वजह थी इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इसकी नजदीकी. असल में गुरुग्राम के कई हिस्से भौगोलिक रूप से एयरपोर्ट के उन इलाकों के मुकाबले ज्यादा करीब है जो खुद दिल्ली के अंदर आते हैं. मल्टीनेशनल कंपनी और विदेशी निवेशकों के लिए यह कनेक्टिविटी काफी बड़ा फायदा साबित हुई. अंतर्राष्ट्रीय सफर करने वाले सीनियर अधिकारी एयरपोर्ट पर उतरने के कुछ ही मिनट के अंदर अपने दफ्तर पहुंच सकते थे. 

आर्थिक उदारीकरण 

1991 में शुरू किए गए आर्थिक सुधारों ने गुरुग्राम के भविष्य को पूरी तरह से बदल दिया. लाइसेंस राज के खत्म होने के साथ ही प्राइवेट कंपनियों को निवेश और रियल एस्टेट डेवलपमेंट में ज्यादा आजादी मिल गई. यहीं पर डीएलएफ ने एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई. डेवलपर केपी सिंह की अगुवाई में डीएलएफ ने स्थानीय किसानों से जमीन के बड़े-बड़े टुकड़े खरीदे और आधुनिक रिहायशी सोसाइटी, कमर्शियल कंपलेक्स और कॉर्पोरेट पार्क बनाने शुरू किए. ये प्रोजेक्ट धीरे-धीरे मशहूर डीएलएफ साइबर सिटी में बदल गए.

विकास की रफ्तार कैसे हुई तेज? 

1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत में भारत के आईटी और बीपीओ उद्योगों के बढ़ने की वजह से गुरुग्राम में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला.  अमेरिकी कंपनी General Electric ने इस इलाके में अपना पहला बड़ा इंटरनेशनल कॉल सेंटर खोला. इससे दूसरी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए भी रास्ते खुल गए. जल्द ही Google, Microsoft, IBM और Accenture जैसी ग्लोबल कंपनी ने पूरे गुरुग्राम में अपने कैंपस और दफ्तर बनाने शुरू कर दिए.

समय के साथ गुरुग्राम एक शांत कस्बे से बदलकर एक ऐसा शहर बन गया जहां का नजारा अब कांच की ऊंची ऊंची इमारत, आलीशान अपार्टमेंट, मॉल, एक्सप्रेसवे और बड़े-बड़े कॉरपोरेट केंपस से भरा रहता है.

यह भी पढ़ेंः भारत में कब खत्म होगा एलपीजी संकट? जानिए इस संकट से निपटने के लिए कितना अहम है पीएम का 5 देशों का दौरा

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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