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लोकसभा स्पीकर को पद से हटाना कितना बड़ा टास्क, क्या होती है अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया?

लोकसभा स्पीकर को हटाना राजनीतिक रूप से बड़ा कदम जरूर है, लेकिन संवैधानिक रूप से इसके लिए स्पष्ट और सधी हुई प्रक्रिया तय है. आइए जानें कि कैसे स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है.

संसद की कार्यवाही जिस कुर्सी से चलती है, वही कुर्सी अगर सवालों के घेरे में आ जाए तो सियासत का तापमान अपने आप बढ़ जाता है. इन दिनों लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेकर ऐसा ही माहौल बना हुआ है. कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष उनके खिलाफ बड़ा कदम उठाकर पद से हटाने की तैयारी में है, लेकिन सवाल यह है कि क्या लोकसभा स्पीकर को हटाना इतना आसान है? और इसके लिए किस तरह की संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है? आइए पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं. 

लोकसभा स्पीकर को लेकर विपक्ष क्यों नाराज है?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला सदन में विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दे रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्षी नेता को नियमों का हवाला देकर पूरा बोलने ही नहीं दिया गया. इसके अलावा विपक्ष उस बयान से भी नाराज है, जिसमें स्पीकर ने यह कहा था कि कुछ विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते थे, इसलिए पीएम से सदन में न आने का आग्रह किया गया.

सांसदों के निलंबन से और बढ़ा विवाद

विवाद उस समय और गहरा गया जब लोकसभा में हंगामे के बाद कांग्रेस समेत कुल आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया. विपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा थी और सदन में सत्ता पक्ष को ज्यादा छूट दी गई. वहीं दूसरी ओर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा कुछ किताबों के हवाले से इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर टिप्पणी किए जाने को लेकर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई.

क्या स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है?

यहां सबसे अहम बात समझना जरूरी है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ सामान्य सरकार की तरह अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जाता है. संविधान में इसके लिए अलग व्यवस्था की गई है. स्पीकर को हटाने के लिए हटाने का प्रस्ताव यानी मोशन ऑफ रिमूवल ऑफ स्पीकर लाया जाता है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत रखा गया है.

अनुच्छेद 94(सी) क्या कहता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 94 लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से जुड़ा है. इसके तहत तीन स्थितियों में स्पीकर का पद खाली हो सकता है. पहली स्थिति यह है कि अगर स्पीकर लोकसभा का सदस्य नहीं रहता, तो पद अपने आप खाली हो जाता है. दूसरी स्थिति यह है कि स्पीकर स्वयं लिखित रूप में त्यागपत्र दे सकता है. तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण स्थिति यह है कि लोकसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव के जरिए उन्हें हटाया जा सकता है.

हटाने का प्रस्ताव लाने की शर्तें क्या हैं?

स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव अचानक नहीं लाया जा सकता है. इसके लिए कुछ स्पष्ट शर्तें तय होती हैं. सबसे पहले, लोकसभा के कुल सदस्यों में से कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ लिखित नोटिस देना जरूरी होता है. यह नोटिस कम से कम 14 दिन पहले दिया जाना चाहिए. यानी कोई भी सांसद खड़े होकर तुरंत स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव नहीं रख सकता है. 

नोटिस देने के बाद सदन में क्या होता है?

जब स्पीकर के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव नोटिस के रूप में स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस दिन स्पीकर खुद सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करते हैं. उस समय सदन की कार्यवाही डिप्टी स्पीकर या लोकसभा के किसी वरिष्ठ सदस्य द्वारा संचालित की जाती है. यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि निष्पक्षता बनी रहे.

हटाने के लिए कितना बहुमत जरूरी होता है?

स्पीकर को हटाने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत नहीं होती है. यहां साधारण बहुमत ही काफी होता है. इसका मतलब यह है कि जितने सांसद उस समय सदन में मौजूद हों और मतदान कर रहे हों, उनमें से 50 प्रतिशत से एक ज्यादा सांसदों का समर्थन प्रस्ताव के पक्ष में होना चाहिए.

अगर प्रस्ताव पास हो जाए तो क्या होता है?

अगर लोकसभा में स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो वह तुरंत अपने पद से हट जाते हैं. हालांकि, वे लोकसभा के सदस्य बने रहते हैं. इसके बाद सदन नए स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करता है.

यह भी पढ़ें: Japan Throne: जापान की इस कुर्सी पर कभी नहीं बैठ सकती कोई लड़की, क्या है ऐसी परंपरा?

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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