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भारत की नहीं है जलेबी.. जानिए हमारे यहां ये कैसे आई और आज कोई दही तो कोई मछली के साथ खाता है!

टेडी-मेडी और रस भरी इस मिठाई का इतिहास काफी दिलचस्प है. स्थानीय स्वाद के हिसाब से इसके बनाने के तरीके और आकार में अंतर देखने को मिल जाता है. भारत में जलेबी 500 साल पहले आई थी.

How Did Jalebi Come To India: भारत में जलेबी को लगभग सभी जगह पसंद किया जाता है. दिखने में गोल, खाने में करारी, लाल और नारंगी रंग की जलेबी, बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को खूब पसंद आती है. देश के अलग अलग राज्यों में में आपको कहीं बड़े तो कहीं छोटी आकार की जलेबी देखने को मिल जायेगी. कम लागत और फ्रेश होने की वजह से लोग जलेबी को ज्यादा पसंद किया जाता है. देश में जलेबी के कई व्यंजन खाए जाते हैं. कहीं जलेबी के साथ रबड़ी खाई जाती है तो कहीं जलेबी को दूध और दही के साथ खाना पसंद किया जाता है. 

बनाने का तरीका और नाम अलग-अलग

आज के इस आर्टिकल में हम आपको जलेबी का इतिहास, इसके किस्से-कहानियां, अलग-अलग नाम और खाने के तरीकों के बारे में बताएंगे. वैसे तो जलेबी बनाने का तरीका और इसका स्वाद सभी जगहों पर लगभग एक जैसा ही है. लेकिन इसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है और इसका साइज भी अलग-अलग ही देखने को मिलता है. 

यहां मिलती है 300 ग्राम की जलेबी

मध्य प्रदेश के इंदौर में 300 ग्राम की एक जलेबी मिलती है. इस स्पेशल जलेबी में कद्दूकस किया गया पनीर भी डाला जाता है. यहां इसे जलेबी नहीं, बल्कि जलेबा कहा जाता है. वहीं, बंगाल में जलेबी को 'चनार जिल्पी' कहते हैं. ये स्वाद में बंगाली गुलाब जामुन 'पंटुआ' की तरह लगती है. जिसे दूध और मावा से तैयार किया जाता है. 

कब और कैसे हुई जलेबी की शुरुआत

जलेबी टर्की आक्रमणकारियों के साथ भारत में पहुंची थी. भारत में जलेबी का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है. समय के साथ इसके नाम, बनाने का तरीका और स्वाद में स्थानीय हिसाब से परिवर्तन होते चले गए. हौब्सन-जौब्सन के अनुसार, जलेबी शब्द अरेबिक शब्द 'जलाबिया' या फारसी शब्द 'जलिबिया' से आया है. मध्यकालीन पुस्तक 'किताब-अल-तबीक़' में 'जलाबिया' नाम की मिठाई का उल्लेख मिलता है. जो पश्चिमी एशिया से निकला शब्द है. जलेबी भारत के अलावा ईरान में भी मिलती है. यहां इसे 'जुलाबिया या जुलुबिया' कहा जाता है. अरेबिक पाक कला की पुस्तकों में 'जुलुबिया' बनाने का जिक्र है. वहीं 17 वीं शताब्दी में 'भोजनकुटुहला' नाम की एक किताब और संस्कृत की किताब 'गुण्यगुणबोधिनी' में भी जलेबी के बारे में लिखा मिलता है. 

विदेश में भी खाई जाती है जलेबी 

भारत के अलावा जलेबी कई दूसरे देशों में भी खाई जाती है. लेबनान में 'जेलाबिया' एक लंबे आकार की पेस्ट्री जैसी होती है. ईरान में इसे जुलुबिया, ट्यूनीशिया में ज'लाबिया और अरब में जलाबिया के नाम से जानते हैं. अफगानिस्तान में जलेबी को मछली के साथ सर्व किया जाता है. श्रीलंका में भी जलेबी खाई जाती है, जिसे यहां 'पानी वलालु' मिठाई कहते हैं. नेपाल की "जेरी' मिठाई भी जलेबी का ही रूप है.  

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