Pakistan Hangor Submarine: कितनी खतरनाक है पाकिस्तान की हंगोर पनडुब्बी, जानें भारत की पनडुब्बी के सामने कहां टिकती है?
Pakistan Hangor Submarine: पाकिस्तान को एक नई पनडुब्बी मिल चुकी है. आइए जानते हैं कि यह कितनी खतरनाक है और क्या यह भारत का मुकाबला कर सकती है.

- पाकिस्तान को चीन निर्मित हंगौर पनडुब्बी मिली, नौसेना मजबूत।
- यह पनडुब्बी ऐआईपी सिस्टम से दो हफ्ते पानी के नीचे रहेगी।
- भारत के पास परमाणु पनडुब्बियां, हंगौर की क्षमता सीमित है।
- चीनी निर्यात तकनीक की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
Pakistan Hangor Submarine: पाकिस्तान की नौसेना को अपनी नई हंगौर क्लास पनडुब्बी मिल गई है. यह चीन में बनी पनडुब्बी है जो टाइप 039A युआन क्लास पनडुब्बी के एक्सपोर्ट वर्जन पर आधारित है. कराची में इस पनडुब्बी का आना पाकिस्तान की नौसेना को एडवांस्ड बनाने और अरब सागर में अपनी रक्षात्मक ताकत को मजबूत करने की कोशिश में एक बड़ा कदम है. हंगौर क्लास पनडुब्बी को पाकिस्तान की सबसे आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों में से एक माना जाता है. आइए जानते हैं कि यह भारत की पनडुब्बियों के सामने कहां टिकती है.
हंगौर क्लास कितनी खतरनाक?
हंगौर पनडुब्बी का एक मुख्य फायदा यह है कि यह अपने ऐआईपी सिस्टम का इस्तेमाल करके दो हफ्ते तक पानी के नीचे रह सकती है. पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को लगातार सतह पर आना पड़ता है जिस वजह से उनके पकड़े जाने का खतरा बढ़ जाता है. ऐआईपी फीचर लड़ाई के दौरान छिपकर रहने और बचे रहने की क्षमता को काफी बेहतर बनाता है.
यह पनडुब्बी छह 533 एमएम टॉरपीडो ट्यूब से लैस है जो भारी टॉरपीडो और एंटी शिप क्रूज मिसाइल लॉन्च करने में सक्षम है. ऐसा कहा जाता है कि यह पाकिस्तान की बाबर 3 पनडुब्बी लॉन्च क्रूज मिसाइल को भी तैनात करने में सक्षम है. पाकिस्तान की योजना कुल आठ हंगौर पनडुब्बियां शामिल करने की है. इनमें से चार चीन में बनाई जा रही हैं और कराची में 4 असेंबल की जा रही हैं. इनका काम पाकिस्तान की सी डिनियल रणनीति को मजबूत करना और अरब सागर में भारतीय नौसेना के ऑपरेशन को मुश्किल बनाना होगा.
भारत को फायदा
पानी के नीचे की लड़ाई में भारत ने काफी बढ़त हासिल की है. सबसे अहम अंतर यह है कि भारत के पास अरिहंत क्लास जैसी परमाणु संचालित पनडुब्बियां हैं. पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के उलट परमाणु संचालित पनडुब्बियां महीनों तक पानी के नीचे रह सकती हैं और काफी तेज रफ्तार से काम कर सकती हैं. हंगौर एक पारंपरिक पनडुब्बी ही है. इसका मतलब है कि परमाणु संचालित प्लेटफार्म की तुलना में इसकी क्षमता और ऑपरेशनल लचीलापन अभी भी सीमित है.
चीनी एक्सपोर्ट टेक्नोलॉजी को लेकर चिंता
दरअसल ऐसा कहा जाता है कि चीन अपनी सबसे एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी को घरेलू इस्तेमाल के लिए बचाकर रखता है और विदेशी ग्राहकों को उनके मोडिफाइड वर्जन एक्सपोर्ट करता है. यही वजह है कि चीनी एक्सपोर्ट ग्रेड नेवल सिस्टम की लंबे समय की विश्वसनीयता और परफॉर्मेंस को लेकर सवाल बने रहते हैं. दूसरी तरफ भारत फ्रांस, रूस, जर्मनी और स्वदेशी डिफेंस प्रोग्राम से मिली भरोसेमंद टेक्नोलॉजी का मिला-जुला इस्तेमाल करता है. इससे ज्यादा विविधता और ऑपरेशनल अनुभव मिलता है.
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