Police Encounter: कैसे होती है बुलेट फायरिंग के राउंड की गिनती, क्या बदमाशों की गोलियां भी करते हैं शामिल?
Police Encounter: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या फायरिंग के दौरान राउंड की गिनती की जाती है. जानें क्या बदमाशों की गोलियों की भी की जाती है गिनती.

- पुलिस मुठभेड़ में चली हर गोली का होता सटीक हिसाब।
- पुलिसकर्मियों को आवंटित गोलियों और बचे कारतूसों का सत्यापन।
- फॉरेन्सिक टीम बरामद खोखे गिनकर चली गोलियों से मिलाती।
- अपराधियों की गोलियां भी गिनी जाती, आत्मरक्षा की पुष्टि होती।
Police Encounter: जब भी पुलिस एनकाउंटर या फिर गोलीबारी होती है तो जांच के दौरान सबसे बड़े सवालों में से एक यह होता है कि कितनी गोलियां चलाई गई और किसने चलाई. आम धारणा के उलट जांचकर्ता अंदाजे पर निर्भर नहीं रह पाते. पुलिस और संदिग्धों दोनों की तरफ से चलाई गई हर गोली का वैज्ञानिक तरीके से रिकॉर्ड रखा जाता है.
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पुलिस की गोलियों की गिनती कैसे होती है?
किसी भी ऑपरेशन से पहले पुलिस कर्मियों को एक तय संख्या में सर्विस राउंड दिए जाते हैं. साथ ही जारी किए गए गोला-बारूद का आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाता है. ऑपरेशन खत्म होने के बाद अधिकारियों को सत्यापन के लिए अपने हथियार और बची हुई जिंदा गोलियां जमा करनी होती हैं.
जांच करने वाले सबसे पहले हर अधिकारी की मैगजीन में बची हुई जिंदा गोलियों की गिनती करते हैं. अगर किसी अधिकारी को 30 राउंड दिए गए थे और वह 26 के साथ लौटता है इसका मतलब है कि चार राउंड चलाए गए. इसके बाद संख्या का मिलान एनकाउंटर वाली जगह से मिले सबूतों से किया जाता है.
सत्यापन पूरा करने के लिए फोरेंसिक टीम पुलिस के हथियारों से चलाई गई गोली के खाली कारतूस केस इकट्ठा करती हैं. खाली केस की संख्या चलाई गई गोलियों के रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए. ऐसा इसलिए ताकि यह पक्का हो सके कि हर गोली का सही हिसाब है.
क्या अपराधियों द्वारा चलाई गई गोली की भी गिनती होती है?
अपराधियों द्वारा चलाई गई गोलियों की भी गिनती अलग से की जाती है. जांच में इनकी एक बड़ी भूमिका होती है. यह साबित करना कि संदिग्धों ने गोली चलाई थी जांचकर्ताओं को इस बात को तय करने में मदद देता है कि क्या पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की और क्या कानून के तहत बल का प्रयोग सही था.
फॉरेंसिक टीम घटना स्थल पर अपराधियों के हथियारों से चलाई गई गोलियों के खाली कारतूस केस ढूंढती है. इन्हें सावधानी से इकट्ठा किया जाता है, सील किया जाता है और साथ ही इनका रिकॉर्ड भी रखा जाता है. जांचकर्ताओं की टीम दीवार, गाड़ी पेड़, इमारत और पुलिस के सुरक्षा उपकरणों पर गोली लगने के निशानों की भी जांच करती है.
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