Gujarat Lion Attacks: 31 में से 7 आदमखोर! जानें गुजरात में क्यों इंसानों को खा रहे शेर, जमीन की लड़ाई में क्यों हो रहा इजाफा
Gujarat Lion Attacks: गुजरात में शेर और इंसानों के बीच एक बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है. आइए जानते हैं कि यहां शेर इंसानों पर क्यों हमला कर रहे हैं.

- गुजरात में 31 शेर बचाए, सात आदमखोर घोषित, हमेशा के लिए कैद होंगे।
- बढ़ती शेरों की आबादी और आवास की कमी संघर्ष का मुख्य कारण।
- मानसून और मानवीय गतिविधियां शेरों को आबादी क्षेत्रों में खींच रही हैं।
Gujarat Lion Attacks: गुजरात वन विभाग ने राज्य भर में इंसानों पर हमलों में तेजी से बढ़ोतरी के बीच 31 शेरों को बचाया है. इनमें से सात को आदमखोर घोषित कर दिया गया है और कई जानलेवा घटनाओं के बाद उन्हें हमेशा के लिए कैद में रखा जाएगा. यह फैसला जूनागढ़, अमरेली और भावनगर जैसे जिलों में हुए 9 बड़े हमलों के बाद लिया गया. इनमें कथित तौर पर छह लोगों की जान चली गई. जैसे-जैसे इंसानों और शेरों का आमना-सामना बढ़ रहा है वन्य जीव विशेषज्ञ इस बढ़ते टकराव के पीछे इलाके के लिए बढ़ता दबाव, रहने की जगह की कमी और बदलते पर्यावरण को मुख्य वजह बता रहे हैं.
शेरों की बढ़ती आबादी से इलाके के लिए दबाव
बढ़ते टकराव के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक एशियाई शेरों की आबादी में तेजी से हुई बढ़ोतरी है. गुजरात वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में शेरों की आबादी 2020 में 674 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है. हालांकि इसे संरक्षण की एक बड़ी जीत माना जा रहा है लेकिन इसने गिर इलाके में अपने इलाके के लिए मुश्किलों को बढ़ा दिया है. जैसे-जैसे शेरों की संख्या बढ़ रही है कई शेर जंगल की पारंपरिक सीमा से बाहर अपना इलाका बनाने के लिए मजबूर हो रहे हैं.
जंगल में जगह की कमी
गिर नेशनल पार्क का भौगोलिक दायरा काफी सीमित है. इस वजह से शेरों की बढ़ती आबादी को वहां रखना मुश्किल हो रहा है. वन्य जीव अधिकारियों का यह अनुमान है कि गुजरात के लगभग आधे शहर अब संरक्षित जंगलों के बाहर ग्रेटर गिर इलाके में रहते हैं. ये शेर अक्सर खेतों, सरकारी जमीन, चरागाहों और गांव में पाए जाते हैं.
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मानसून के हालात शेरों की आवाजाही बदलते हैं
मौसम भी शेरों के व्यवहार को बदलने में एक बड़ी भूमिका निभाता हैं. मानसून के दौरान जंगल के कुछ हिस्सों में पानी भर जाता है. इसी के साथ कुछ इलाकों में प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता भी कम हो सकती है. नतीजतन शेर अक्सर भोजन की तलाश में आसपास के गांव और खेतों की तरफ चले जाते हैं.
इंसानी गतिविधि टकराव बढ़ा रही हैं
वन्यजीव विशेषज्ञों का यह मानना है कि शेरों के रहने की जगह में इंसानी गतिविधियों का बढ़ना एक और बड़ी वजह है. खेती का विस्तार, वन्यजीव गलियारों में अतिक्रमण और अवैध लायन शो ने जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही में दखल डाला है. इसके अलावा कई लोग रात में वीडियो रिकॉर्ड करने या फिर सोशल मीडिया रील बनाने के लिए भी शेरों के करीब जाते हैं. जानवर अक्सर ऐसे व्यवहार को अपने इलाके में घुसपैठ मानते हैं.
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