Japan Intelligence Agency: जापान बना रहा अपनी खुफिया एजेंसी, जानें इस देश का सबसे बड़ा दुश्मन कौन?
Japan Intelligence Agency: जापान में अपनी एक खुफिया एजेंसी बनाने की ठानी है. आइए जानते हैं कि कौन सा देश जापान का सबसे बड़ा दुश्मन है.

- जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नई खुफिया एजेंसी बनाई।
- पूर्वी एशिया में तनाव, साइबर हमलों के कारण यह कदम।
- चीन, रूस और उत्तर कोरिया प्रमुख सुरक्षा चुनौतियाँ बने हुए हैं।
- आधुनिक युद्ध और डिजिटल खतरों से निपटने का लक्ष्य।
Japan Intelligence Agency: दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान एक सेंट्रलाइज्ड नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. देश की संसद ने नेशनल इंटेलिजेंस ब्यूरो बनाने के लिए कानून को मंजूरी दे दी है. यह दशकों में जापान के सुरक्षा ढांचे में सबसे बड़े सुधारों में से एक है. यह कदम पूर्वी एशिया में बढ़ते तनाव और साइबर हमलों, जासूसी और क्षेत्रीय सैन्य खतरे को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है. नई एजेंसी को लगभग 407 मिलियन अमेरिकी डॉलर के शुरुआती बजट के साथ शुरू किया जाएगा.
जापान नई इंटेलिजेंस एजेंसी क्यों बना रहा है?
1947 में युद्ध के बाद अपना संविधान अपनाने के बाद से जापान ने अनुच्छेद 9 के तहत सीमित सैन्य भूमिका बनाए रखी है. यह अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के साधन के रूप में युद्ध का त्याग करता है. कई दशकों तक देश विदेशी खुफिया जानकारी और रणनीतिक सुरक्षा सहायता के लिए काफी हद तक संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भर रहा.
हालांकि जापान में पहले से ही अलग-अलग सरकारी विभागों के तहत खुफिया कर्मी काम कर रहे हैं. इनमें कैबिनेट इंटेलिजेंस एंड रिसर्च ऑफिस, रक्षा मंत्रालय, पुलिस और विदेश मंत्रालय शामिल हैं. लेकिन खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और जानकारी साझा करने में तालमेल बिठाने के लिए कभी भी कोई एक सेंट्रलाइज्ड प्लेटफार्म नहीं रहा है. नए नेशनल इंटेलिजेंस ब्यूरो का मकसद सभी जरूरी खुफिया जानकारी को एक कमांड के तहत लाकर इस कमी को दूर करना है.
चीन जापान के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बनकर उभरा है
जापान चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को अपनी सबसे गंभीर सुरक्षा चिंता में से एक मानता है. टोक्यो ने बार-बार पूर्वी चीन सागर में बीजिंग की बढ़ती सैन्य गतिविधि, ताइवान के आस-पास बढ़ते दबाव और जापान के अधिकार वाले द्वीप से जुड़े क्षेत्रीय विवादों पर चिंता जताई है.
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रूस और उत्तर कोरिया भी बड़े खतरे पैदा करते हैं
रूस जापान के लिए एक और बड़ी चिंता का विषय बन चुका है. हाल की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक जासूसी रोधी कानून के कमजोर होने की वजह से रूसी खुफिया नेटवर्क ने जापानी तकनीक खासकर एडवांस्ड इंडस्ट्रियल सेक्टर को निशाना बनाया है. जापान अब संवेदनशील तकनीक और गोपनीय जानकारी के आसपास सुरक्षा को कड़ा करने की योजना बना रहा है.
इसी के साथ उत्तर कोरिया अपने बार-बार के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के जरिए सीधे सुरक्षा चुनौती पेश कर रहा है. इनमें से कई मिसाइल लॉन्च जापानी क्षेत्र के पास से गुजरे हैं, इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है.
8 दशकों बाद यह बदलाव क्यों?
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से आधुनिक युद्ध का स्वरूप काफी ज्यादा बदल चुका है. आज के खतरे पारंपरिक सैन्य संघर्ष से काफी आगे तक फैले हुए हैं. इनमें साइबर युद्ध, गलत सूचना फैलाने वाले अभियान, औद्योगिक जासूसी और डिजिटल निगरानी शामिल हैं. जापानी अधिकारियों का यह मानना है कि मौजूदा बिखरा हुआ इंटेलिजेंस ढांचा अब नहीं चुनौती से निपटने के लिए काफी नहीं है.
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