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तुम मेरी मार्कशीट जला सकते हो... ऐसा क्यों कहते थे हिमंता बिस्वा सरमा? हैरान कर देगी वजह

Himanta Biswa Sarma Row: हिमंता बिस्वा ने एक बार यह कहा था कि आप मेरी मार्कशीट जला सकते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर उन्होंने यह क्यों कहा था.

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  • कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने से असम की राजनीति बदली।

Himanta Sarma: 2026 के असम विधानसभा चुनावों से पहले असम में राजनीतिक माहौल गर्मा रहा है. हिमंता बिस्वा और पवन खेड़ा के बीच जुबानी जंग अब तेज हो चुकी है. दरअसल पवन खेड़ा ने यह आरोप लगाया है कि हिमंता बिस्वा की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं. इन सब के बीच आइए जानते हैं हिमंता बिस्वा के एक बयान के बारे में जिसमें उन्होंने कहा था कि आप मेरी मार्कशीट जला सकते हैं.  

क्यों कहा था हिमंता बिस्वा ने ऐसा? 

बीबीसी के एक इंटरव्यू के दौरान राहुल महंता ने बताया कि हिमंता बिस्वा ने राहुल से कहा था कि 'आप मेरी मार्कशीट जला सकते हैं मुझे इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी.'  दरअसल हिमंता बिस्वा और राहुल महंता एक ही हॉस्टल में रहते थे. जहां ज्यादातर छात्र अपने एकेडमिक नतीजे और भविष्य की संभावनाओं को लेकर चिंतित रहते थे वहीं हिमंता बिस्वा सबसे अलग थे. उन्हें एक बात को लेकर पहले से ही पक्का यकीन था कि वह राजनीति में आना चाहते हैं. उनके लिए मार्कशीट नौकरी पाने का जरिया नहीं बल्कि महज एक औपचारिकता थी.

राजनीतिक करियर पर फोकस 

कई ऐसे छात्रों के उलट जो ग्रेजुएशन के बाद करियर के विकल्प तलाशते हैं, हिमंता बिस्वा को शुरू से ही अपने लक्ष्य को लेकर पूरा यकीन था. उनके सफर की शुरुआत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन से हुई. यहां उन्होंने एक छात्र नेता के तौर पर सक्रिय रूप से हिस्सा लिया. इस शुरुआती जुड़ाव ने उनके रास्ते को आकार दिया.

कांग्रेस नेता से बीजेपी के रणनीतिकार तक 

हिमंता बिस्वा के राजनीतिक कैरियर में कुछ सालों में एक बड़ा बदलाव आया. शुरुआत में वे इंडियन नेशनल कांग्रेस में धीरे-धीरे आगे बढ़े और एक ताकतवर नेता बने. उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली. लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मतभेदों की वजह से उनके करियर में एक बड़ा मोड़ आया. 

2015 का बड़ा बदलाव 

साल 2015 में हिमंता बिस्वा ने कांग्रेस छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.  इस कदम ने असम के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया. समय के साथ वे पूर्वोत्तर में बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बनकर उभरे. 

1996 के चुनाव में जालुकबारी से शुरुआती हार के बावजूद हिमंता बिस्वा ने 2001 में जोरदार वापसी की. तब से उन्होंने उसी निर्वाचन क्षेत्र से लगातार जीत हासिल की है. 5 साल तक मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा देने के बाद हिमंता बिस्वा अब 2026 के विधानसभा चुनाव में एक और कार्यकाल की उम्मीद कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: अमेरिका ने ईरान पर अब तक कौन-से बम नहीं चलाए, जानें उसके जखीरे में कितने तीर?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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