Air India का कौन-सा विमान हुआ क्रैश? जानें इस प्लेन के बारे में हर एक बात
बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने दुनिया में पहली उड़ान 15 दिसंबर 2009 के दिन भरी थी. इसका कमर्शियल संचालन साल 2011 में शुरू हुआ था. एयर इंडिया के लिए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने 14 दिसंबर 2013 को पहली उड़ान भरी.

अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान बोइंग 787 ड्रीमलाइनर क्रैश हो गया. लंदन जा रहे इस प्लेन में 10 क्रू मेंबर्स के साथ 242 लोग सवार थे. क्या आपको पता है कि एयर इंडिया का जो विमान क्रैश हुआ, वह किस कंपनी का था? यह प्लेन एयर इंडिया में कब शामिल हुआ था और इसने कब पहली उड़ान भरी थी?
ड्रीमलाइनर ने कब भरी थी पहली उड़ान?
जानकारी के मुताबिक, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने दुनिया में पहली उड़ान 15 दिसंबर 2009 के दिन भरी थी. हालांकि, इसका कमर्शियल संचालन साल 2011 में शुरू हुआ था. एयर इंडिया के लिए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने 14 दिसंबर 2013 के दिन पहली उड़ान भरी थी. इसका मतलब यह है कि गुजरात में क्रैश हुआ विमान करीब 12 साल साल पुराना था.
कितनी होती है ड्रीमलाइनर की क्षमता?
जानकारी के मुताबिक, बोइंग की ड्रीमलाइनर कैटिगरी में अलग-अलग कैटिगरी के प्लेन हैं. इनमें 787-8 में 242 यात्रियों तक ले जाने की क्षमता होती है. एयर इंडिया का जो प्लेन क्रैश हुआ, वह इसी कैटिगरी का था. वहीं, बोइंग 787-10 में 318 यात्रियों को ले जा सकते हैं. हालांकि, यह क्षमता एयर लाइन के कॉन्फिग्रेशन पर निर्भर होती है.
कितनी होती है ड्रीमलाइनर की रेंज?
बोइंग 787-8 की रेंज लगभग 13530 किमी की होती है, जबकि बोइंग 787-9 करीब 14010 किमी का सफर तय कर सकता है. इसके अलावा बोइंग 787-10 से करीब 11910 किमी का सफर किया जा सकता है. लंबी दूरी की उड़ानों के लिए इस विमान को आदर्श माना जाता है.
कैसा होता है बोइंग 787 ड्रीमलाइनर?
बोइंग 787 ड्रीमलाइनर की बॉडी कंपोजिट होती है. दरअसल, इस विमान का काफी हिस्सा कार्बन फाइबर से बना होता है, जिससे यह हल्का और मजबूत रहता है. साथ ही, ईंधन की बचत भी करता है. पुराने विमानों की तुलना में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर 20-25 फीसदी तक कम फ्यूल की खपत करता है. कम शोर और कंपन के साथ इस प्लेन का डिजाइन पैसेंजर्स के हिसाब से बेहद आरामदायक है. इसके अलावा ड्रीमलाइनर में विंडो भी पारंपरिक विमानों से बड़ी होती हैं, जो इलेक्ट्रॉनिकली डिम होती हैं.
इन विमानों में आती थीं ये दिक्कतें
गौरतलब है कि Boeing 787 के शुरुआती मॉडल्स में बैटरी ओवरहीटिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी कुछ समस्याएं सामने आई थीं. हालांकि, बाद में Boeing और FAA (अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर) ने इन सभी दिक्कतों को दूर कर दिया था.
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Source: IOCL






















