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2013 में बनी AfD का WW2 से क्या कनेक्शन, क्यों जुड़ता है नाजी जर्मनी से नाम?

जर्मन राजनीति में भूचाल लाने वाली AfD पार्टी के उग्र-राष्ट्रवाद, अप्रवासी विरोधी बयानों और विवादित नारों के चलते आलोचक क्यों मानते हैं इसे हिटलर की नाजी विचारधारा का आधुनिक रूप.

यूरोप की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है- Alternative for Germany (AfD). साल 2013 में बनी यह राजनीतिक पार्टी जर्मनी के हालिया चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर चुकी है. द्वितीय विश्व युद्ध और एडोल्फ हिटलर के दौर के बाद यह पहली बार है जब जर्मनी में किसी दक्षिणपंथी पार्टी ने इतनी बड़ी सफलता हासिल की है. जर्मनी की राजनीति को समझने वाले एक्सपर्ट्स इस पार्टी के उदय को लेकर काफी चिंतित हैं. अक्सर मीडिया रिपोर्ट्स में AfD का नाम आते ही द्वितीय विश्व युद्ध और नाजी जर्मनी का जिक्र होने लगता है. 

2013 में कैसे हुई थी AfD की शुरुआत?

जब साल 2013 में AfD का गठन हुआ था, तब इसका मकसद नाजी विचारधारा नहीं था. यह पार्टी मूल रूप से अर्थशास्त्रियों और विचारकों द्वारा बनाई गई थी. उस समय इनका मुख्य विरोध यूरो करेंसी को लेकर था. यह पार्टी चाहती थी कि जर्मनी यूरोपीय संघ के वित्तीय संकट में दूसरे देशों की मदद करना बंद करे. शुरुआत में यह एक साधारण आर्थिक एजेंडे वाली पार्टी थी. लेकिन वक्त के साथ पार्टी का नेतृत्व बदला और इसका झुकाव तेजी से कट्टर राष्ट्रवाद और अप्रवासी विरोध की तरफ हो गया.

नाजी जर्मनी और WW2 से क्यों जुड़ता है कनेक्शन?

जर्मनी में एडोल्फ हिटलर और उसकी नाजी पार्टी के शासन (1933-1945) के दौरान हुए नरसंहार और द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद, देश के संविधान में कट्टर राष्ट्रवाद को लेकर बेहद सख्त नियम बनाए गए थे. इसके बावजूद AfD पर लगातार नाजी दौर की यादें ताजा करने के आरोप लगते हैं. AfD के कई बड़े नेताओं पर आरोप है कि वे अपने भाषणों में उन शब्दों और नारों का इस्तेमाल करते हैं, जिन पर जर्मनी में नाजी दौर से जुड़े होने के कारण पाबंदी है. हाल ही में पार्टी के एक प्रमुख नेता ब्योर्न होके पर नाजी अर्धसैनिक संगठन के एक प्रतिबंधित नारे का इस्तेमाल करने के लिए अदालत द्वारा जुर्माना भी लगाया गया था.

पार्टी के कुछ नेताओं के बयानों को लेकर भारी विवाद हुआ है, जिसमें उन्होंने हिटलर के 12 साल के शासनकाल को जर्मनी के हजारों साल के गौरवशाली इतिहास में महज एक चिड़िया की बीट जैसा बताया था. आलोचकों का मानना है कि यह नाजी अपराधों को कम आंकने की कोशिश है. नाजी पार्टी की तरह ही AfD का मुख्य एजेंडा जर्मनी सिर्फ जर्मन लोगों के लिए का रहा है. वे देश में शरणार्थियों और खास तौर पर मुस्लिम प्रवासियों के आने का खुलकर विरोध करते हैं.

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खुफिया एजेंसी की नजर और आज के हालात

AfD का नाजी कनेक्शन सिर्फ अखबारी दावों तक सीमित नहीं है. जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने खुद इस पार्टी को आधिकारिक तौर पर दक्षिणपंथी चरमपंथ के रूप में बताया है. इसका मतलब है कि सरकार कानूनी तौर पर इस पार्टी के नेताओं की निगरानी कर सकती है. इसके बावजूद, जर्मनी के पूर्वी राज्यों जैसे थुरिंगिया और सैक्सनी में आम जनता के बीच इस पार्टी की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है. स्थानीय लोग बढ़ती महंगाई, अपराध और सरकार की अप्रवासी नीतियों से नाराज हैं, जिसका फायदा उठाकर AfD खुद को राजनीति में स्थापित कर चुकी है. 

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दीनदयाल पाटीदार एबीपी लाइव में कार्यरत हैं. एजुकेशन बीट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह स्कूल और यूनिवर्सिटी एडमिशन, प्रतियोगी परीक्षाओं के नतीजों, सरकारी भर्तियों, स्कॉलरशिप और शिक्षा से जुड़ी नीतियों पर नियमित तौर पर खबरें लिखते हैं, ताकि छात्रों और अभिभावकों तक सही, सटीक और समय पर जानकारी पहुंच सके. उनकी कोशिश रहती है कि जटिल से जटिल सरकारी नियम और शैक्षणिक अपडेट भी पाठकों तक आसान और समझने लायक भाषा में पहुंचे.

एबीपी लाइव में आने से पहले दीनदयाल पाटीदार अपनी यूनिवर्सिटी की मीडिया टीम का हिस्सा रह चुके हैं, जहां उन्होंने कैंपस से जुड़ी खबरों, इवेंट्स और एकेडमिक गतिविधियों की रिपोर्टिंग और कवरेज की जिम्मेदारी निभाई. इसी दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, न्यूज राइटिंग की बारीकियां और खबरों को सही फॉर्मेट व भाषा में पेश करने का हुनर सीखा, जो आज उनकी पत्रकारिता का अहम हिस्सा हैं.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने मंदसौर यूनिवर्सिटी, मंदसौर से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीए-जेएमसी) में स्नातक की पढ़ाई की है. वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले हैं.

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