CJP Protest: ABVP से देश के शिक्षा मंत्री तक... ऐसा रहा धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर
CJP Protest: इस समय दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन कर रही है. आइए जानते हैं धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक सफर के बारे में.

- कॉकरोच जनता पार्टी प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी है।
- उनका राजनीतिक सफर 1983 में एबीवीपी से शुरू हुआ।
- 2000 में विधायक, 2004 में लोकसभा सदस्य बने।
- मोदी सरकार में पेट्रोलियम, कौशल और शिक्षा मंत्री रहे।
CJP Protest: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर राजनीतिक बहस तब और ज्यादा तेज हो गई जब कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की कि उनके इस्तीफे का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ पार्टी की बैठक को बेकार बताया और प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग दोहराई. चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आइए एबीवीपी में छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्रियों में से एक बनने तक धर्मेंद्र प्रधान के सफर पर नजर डालते हैं.
एबीवीपी के जरिए राजनीतिक शुरुआत
धर्मेंद्र प्रधान ने 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में एक छात्र कार्यकर्ता के तौर पर शामिल होकर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया. ओडिशा के तालचेर कॉलेज में अपने कॉलेज के दिनों में उन्हें छात्र संघ का अध्यक्ष चुना गया. यह उनकी पहली बड़ी नेतृत्व भूमिका थी. छात्र राजनीति में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें संगठन के अंदर आगे बढ़ने में मदद की. अंत में उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया.
भाजपा और चुनावी राजनीति में प्रवेश
राजनीति धर्मेंद्र प्रधान के लिए पहले से ही जानी पहचानी जगह थी. उनके पिता देवेंद्र प्रधान एक वरिष्ठ भाजपा नेता थे और अटल बिहारी वाजपेई सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर भी काम कर चुके थे. प्रधान ने 2000 में चुनावी राजनीति में कदम रखा. उन्होंने उड़ीसा के पल्लाहारा विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की और विधायक बने. 4 साल बाद 2004 के आम चुनाव में उन्हें देवगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुना गया. बाद में उन्होंने राज्यसभा में ओडिशा का प्रतिनिधित्व किया. इससे राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा में उनकी भूमिका मजबूत हुई. उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें पार्टी की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी नियुक्त किया.
मोदी सरकार में बड़ी जिम्मेदारियां
2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गठन के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई. वे इस विभाग में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मंत्रियों में से एक बने और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लागू करने में उन्होंने एक बड़ी भूमिका निभाई. वक्त के साथ उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती चली गई. उन्हें कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा इस्पात मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया.
भारत का शिक्षा मंत्री बनना
जुलाई 2021 में धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया और उन्होंने देश के सबसे जरूरी मंत्रालय में से एक का कार्यभार संभाला. उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी में से एक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन की देखरेख करना रहा है जो स्कूली और उच्च शिक्षा में बड़े सुधारों का प्रस्ताव करती है.
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की जीत के बाद धर्मेंद्र प्रधान नई केंद्रीय कैबिनेट में शिक्षा विभाग के प्रमुख बने रहे. वे शिक्षा सुधारों के कार्यान्वयन की देखरेख करते आ रहे हैं और साथ ही ओडिशा से भाजपा के प्रमुख नेता में से एक बने हुए हैं.
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