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Continent Formation: एशिया से लेकर यूरोप तक, जानें कैसे बने थे कॉन्टिनेंट्स?

Continent Formation: जिन महाद्वीपों को हम आज देखते हैं वे हमेशा से ऐसे नहीं थे. आइए जानते हैं कि सभी कॉन्टिनेंट का निर्माण कैसे हुआ था?

Continent Formation: आज हम जो महाद्वीप देख रहे हैं वे हमेशा अपने मौजूदा आकर या फिर स्थिति में नहीं थे. एशिया, यूरोप, अफ्रीका और दुनिया के बाकी जमीनी हिस्से सैकड़ों लाखों सालों की धीमी भू वैज्ञानिक यात्रा का नतीजा हैं. इस पूरे मामले को कॉन्टिनेंटल ड्रिफ्ट और प्लेट टेक्टोनिक्स के सिद्धांतों से समझाया गया है. यह बताता है कि पृथ्वी की सतह लगातार कैसे हिल रही है और खुद को नया आकर दे रही है. आइए जानते हैं कि एशिया से लेकर यूरोप तक कैसे बने थे कॉन्टिनेंट.

जब सभी महाद्वीप एक थे 

लगभग 300 मिलियन साल पहले पृथ्वी के सभी महाद्वीप एक साथ मिलकर एक बड़े जमीनी हिस्से में जुड़े हुए थे. इसे पैंजिया के नाम से जाना जाता था. यह सुपरकॉन्टिनेंट पैंथलासा नाम के एक बड़े वैश्विक महासागर से घिरा हुआ था. उस समय जीवन, जलवायु और भूगोल काफी अलग थे. साथ ही अलग-अलग महाद्वीपों का विचार मौजूद नहीं था. पैंजिया लाखों सालों में टेक्टोनिक प्लेटों की धीमी रफ्तार से जमीन को एक साथ धकेलने का कारण बना था. 

पृथ्वी के अंदर गहराई में टूटना शुरू हुआ 

लगभग 200 मिलियन साल पहले पृथ्वी की सतह के नीचे की शक्तिशाली ताकतों ने पैंजिया पर काम करना शुरू कर दिया. पृथ्वी के कोर से निकलने वाली गर्मी ने मेंटल में कन्वैक्शन करंट बनाए, जिससे सुपरकॉन्टिनेंट में दरारें पड़ गईं और वह धीरे-धीरे अलग होने लगा. यह महाद्वीपीय अलगाव की शुरुआत थी. यह एक ऐसी धीमी प्रक्रिया है जिसे ध्यान देने योग्य बनने में लाखों साल लग गए.

लॉरेसिया और गोंडवानालैंड

जैसे ही पैंजिया टूटा यह सबसे पहले दो बड़े जमीन हिस्सों में बंट गया. उत्तरी हिस्सा लॉरेसिया बन गया, जबकि दक्षिणी हिस्से ने गोंडवानालैंड बाद में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया और भारतीय उपमहाद्वीप में टूट गया. इस विभाजन ने आधुनिक महाद्वीपीय लेआउट की नींव रखी. 

एशिया और यूरोप कितने करीब से क्यों जुड़े हैं?

एशिया और यूरोप लॉरेसिया के हिस्से के रूप में एक साथ विकसित हुए और यूरेशियन प्लेट नाम की एक ही टेक्टोनिक प्लेट पर जुड़े रहे. यही वजह है कि भौगोलिक रूप से एशिया और यूरोप को कभी-कभी एक ही महाद्वीप यूरेशिया माना जाता है, जिनके बीच कोई साफ प्राकृतिक सीमा नहीं है. 

भारत की एशिया से नाटकीय टक्कर 

महाद्वीपीय निर्माण के सबसे नाटकीय अध्यायों में से एक में भारतीय उपमहाद्वीप शामिल है. गोंडवानालैंड अलग होने के बाद इंडियन प्लेट तेजी से उत्तर की तरफ बढ़ी और लगभग 40-50 मिलियन साल पहले यूरेशियन प्लेट से टकरा गई. इस जबरदस्त टक्कर से पृथ्वी की ऊपरी परत मुड़ गई और ऊपर उठ गई. इससे ही हिमालय पर्वत श्रृंखला बनी जो आज भी बढ़ रही है.

एक ऐसी प्रक्रिया, जो अब भी जारी 

महाद्वीपों का बनना कोई खत्म कहानी नहीं है. टेक्टोनिक प्लेटें अभी भी हर साल कुछ सेंटीमीटर की दर से आगे बढ़ रही हैं. यह लगभग इतनी ही तेजी से बढ़ रही हैं जितनी तेजी से नाखून बढ़ते हैं. ये हलचलें पृथ्वी को लगातार आकर दे रही हैं. इस वजह से भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और महाद्वीपों का धीरे-धीरे खिसकना होता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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