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परमाणु युद्ध हुआ तब भी बचे रहेंगे ये देशे, जानें कितनी मजबूत है इनकी न्यूक्लियर शील्ड?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध बड़े पैमाने पर फैल रहा है. आइए जानते हैं अगर न्यूक्लियर युद्ध छिड़ जाता है तो क्या कोई देश उससे बच पाएगा?

ग्लोबल टेंशन बढ़ने और बड़ी ताकतों के एक दूसरे के साथ चल रहे युद्ध की वजह से न्यूक्लियर युद्ध का डर एक बार फिर से दुनिया भर में चर्चा में है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने कई लोगों के बीच एक डरावना सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर न्यूक्लियर युद्ध हो जाता है तो क्या कोई ऐसा देश है जो उससे बच पाएगा? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

न्यूजीलैंड: दूरी और फूड सिक्योरिटी सबसे बड़ी ताकत

न्यूजीलैंड को न्यूक्लियर युद्ध की स्थिति में धरती पर सबसे सुरक्षित जगहों में से एक माना जाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा दूरी है. दक्षिणी हेमिस्फीयर में गहराई में और बड़े जियोपॉलिटिकल फ्लैशपॉइंट से दूर होने की वजह से इसके मुख्य मिलिट्री टारगेट बनने की संभावना काफी कम है. इसकी एक और बड़ी ताकत फूड सिक्योरिटी है. न्यूजीलैंड के पास खेती का एक मजबूत बेस है जो न्यूक्लियर विंटर के दौरान भी अपनी आबादी का पेट भरने में काबिल है.

ऑस्ट्रेलिया: विशाल जमीन और कम आबादी का फायदा

ऑस्ट्रेलिया को भी ज्योग्राफिकल आइसोलेशन से काफी फायदा होता है. इसकी काफी बड़ी जमीन, कम आबादी और काफी सारे नेचुरल रिसोर्स इसे स्ट्रैटेजिक रूप से मजबूत बनाते हैं. हालांकि ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी ताकतों के साथ मिलिट्री रिश्ते हैं. यही रिश्ते थ्योरी के हिसाब से इस टारगेट बना सकते हैं. लेकिन इसका इंफ्रास्ट्रक्चर और आबादी के सेंटर काफी दूर-दूर तक फैले हुए हैं. इस वजह से बड़े हमले का खतरा कम हो जाता है.

स्विट्जरलैंड: मजबूत बंकर सिस्टम और न्यूट्रैलिटी

स्विट्जरलैंड आइसोलेशन की वजह से नहीं बल्कि तैयारी की वजह से सबसे अलग है. दशकों से देश ने दुनिया के सबसे बड़े सिविल डिफेंस सिस्टम में से एक को बनाए रखा है. यह उन कुछ देशों में से है जिनके पास अपनी 100% से ज्यादा आबादी को पनाह देने के लिए काफी न्यूक्लियर बंकर हैं. इन बंकरों में एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगे हैं जो रेडियोएक्टिव फॉलआउट से बचाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. इसी के साथ स्विट्जरलैंड की लंबे समय से चली आ रही न्यूट्रैलिटी की वजह से इसके सीधे टारगेट होने की भी संभावना कम हो जाती है.

आइसलैंड: शांति और लो-प्रोफाइल विदेश नीति

आइसलैंड दुनिया भर के सबसे शांतिपूर्ण देशों में गिना जाता है. इसकी कोई भी स्टैंडिंग आर्मी नहीं है और यह लो-प्रोफाइल फॉरेन पॉलिसी रखता है. नॉर्थ अटलांटिक में इसकी लोकेशन इसे बड़े मिलिट्री थिएटर से दूर रखती है. लिमिटेड स्ट्रैटेजिक वैल्यू इसके सीधे न्यूक्लियर टारगेट बनने की संभावना को भी कम करती है.

अर्जेंटीना: एग्रीकल्चर पावरहाउस

अर्जेंटीना का मुख्य फायदा इसकी खेती की पैदावार में है. न्यूक्लियर विंटर की स्थिति में दक्षिणी हेमिस्फेयर के देशों में उत्तरी हेमिस्फेयर की तुलना में कम गंभीर क्लाइमेट इफेक्ट हो सकते हैं, जहां ज्यादातर न्यूक्लियर पावर मौजूद हैं. अर्जेंटीना गेहूं और दूसरी जरूरी फसलों का एक बड़ा प्रोड्यूसर है. इसकी बड़ी एग्रीकल्चरल कैपेसिटी ग्लोबल ट्रेड के ठप होने पर भी इसकी आबादी को बनाए रख सकती है.

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चिली: प्राकृतिक सुरक्षा कवच और मजबूत कृषि

चिली के पास अर्जेंटीना जैसे ही फायदे हैं. लेकिन इसमें एक और खास बात भी है, नेचुरल ज्योग्राफिक प्रोटेक्शन. एंडीज माउंटेन्स इसकी ज्यादातर पूर्वी बॉर्डर पर एक नेचुरल बैरियर बनाते हैं और पश्चिम में पेसिफिक ओशन है. यह ज्योग्राफिकल आइसोलेशन सेंट्रल चिली में मजबूत एग्रीकल्चरल रीजन्स के साथ मिलकर लंबे समय तक ग्लोबल  डिसरप्शन से बचने की  ताकत को बढ़ाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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