एक्सप्लोरर

FCRA Amendment Bill: FCRA से किस विदेशी पैसे को खतरा, जानें क्या हैं नियम?

FCRA Amendment Bill: केंद्र सरकार अब एफसीआरए संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है. आइए जानते हैं कि इसके तहत कौन सा विदेशी पैसा खतरनाक माना जाता है.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • केंद्र सरकार मानसून सत्र में FCRA संशोधन विधेयक लाएगी।
  • विदेशी धन के दुरुपयोग से लोकतांत्रिक संस्थानों को खतरा है।
  • धर्म परिवर्तन, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों हेतु विदेशी धन प्रतिबंधित।
  • चुनाव उम्मीदवार, राजनेता, पत्रकार विदेशी अंशदान स्वीकार नहीं कर सकते।

FCRA Amendment Bill: केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र के दौरान विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है. सरकार के मुताबिक उभरती वैश्विक चुनौती ने भारत के लोकतांत्रिक संस्थान, चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक चर्चा को काफी ज्यादा प्रभावित करने के लिए विदेशी पैसे के इस्तेमाल पर चिंता बढ़ा दी है. प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करना और देश में प्राप्त विदेशी योगदान की निगरानी में सुधार करना है. 

एफसीआरए क्या है? 

फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी एफसीआरए प्राथमिक कानून है जो भारत में व्यक्ति और संगठन द्वारा प्राप्त विदेशी दान, धन और संपत्ति को कंट्रोल करता है. यह अधिनियम गृह मंत्रालय द्वारा प्रशासित है. इसका मुख्य उद्देश्य इस बात को पक्का करना है कि विदेशी योगदान का इस्तेमाल उन तरीकों से ना किया जाए जो भारत की संप्रभुता, आंतरिक सुरक्षा या फिर लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं. 

कौन से फंड माने जाते हैं खतरनाक?

एफसीआरए विदेशी योगदान की कई श्रेणियों की पहचान करता है जिन्हें अवैध या फिर राष्ट्रीय हित के लिए नुकसानदेह माना जाता है. बड़ी चिंताओं में से एक बल, प्रलोभन या फिर धोखे के जरिए धार्मिक रूपांतरण के लिए पैसा भेजना है. यह कानून के तहत पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

यह अधिनियम राष्ट्र विरोधी गतिविधि या फिर हिंसक विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के उद्देश्य से विदेशी पैसे पर भी रोक लगाता है. इसमें सरकारी परियोजना को बाधित करने या फिर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को प्रभावित करने वाले दंगों को भड़काने के प्रयास भी शामिल हैं.

एक दूसरी प्रतिबंधित श्रेणी में विदेशी हस्तक्षेप के जरिए भारतीय चुनाव, राजनीतिक प्रवचन या फिर सरकारी नीति को प्रभावित करने के उद्देश्य से धन शामिल है.  इसी के साथ कानून बेहिसाब या फिर संदिग्ध विदेशी योगदान को भी गंभीर चिंता का विषय मानता है.

इन सबके अलावा सामाजिक कल्याण के नाम पर मिला विदेशी दान, लेकिन कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी चीजों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में आता है. 

यह भी पढ़ेंः शिक्षा मंत्री को कौन-सा बंगला अलॉट होता है, इसका किराया कितना है?

कौन विदेशी अंशदान प्राप्त नहीं कर सकता? 

एफसीआरए कुछ व्यक्तियों और संस्थानों पर विदेशी योगदान स्वीकार करने पर सख्त प्रतिबंध लगाता है. प्रतिबंधित लोगों में चुनाव उम्मीदवार, संसद सदस्य, विधानसभा के सदस्य, विधायिका के सदस्य, राजनीतिक दल और उनके पदाधिकारी, न्यायाधीश और न्यायिक कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के निगम के कर्मचारी और इन सब के साथ पत्रकार, मीडिया संपादक, प्रकाशक और कार्टूनिस्ट शामिल हैं.

यह भी पढ़ेंः राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री... किसे मिलती है ज्यादा सैलरी?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

एक यूट्यूब वीडियो बनाकर कितना कमा लेते हैं ध्रुव राठी, जानें हिसाब-किताब?
एक यूट्यूब वीडियो बनाकर कितना कमा लेते हैं ध्रुव राठी, जानें हिसाब-किताब?
अमेरिका के इन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा, जानें कहां-कितने भारतीय?
अमेरिका के इन सेक्टरों में विदेशियों का दबदबा, जानें कहां-कितने भारतीय?
हिंदू या मुस्लिम, किस धर्म के लोग सऊदी में ज्यादा करते हैं नौकरी?
हिंदू या मुस्लिम, किस धर्म के लोग सऊदी में ज्यादा करते हैं नौकरी?
प्रेस फ्रीडम में कौन सा देश नंबर-1, कहां खड़ा है अपना भारत?
प्रेस फ्रीडम में कौन सा देश नंबर-1, कहां खड़ा है अपना भारत?
Advertisement

वीडियोज

कैमरे पर हुस्न की खतरनाक 'जादूगर'!
दिल्ली पुलिस अलर्ट, 'कॉकरोचों' की धरपकड़
प्रदर्शन पर अंकुश...जरूरी या पुलिस निरंकुश?
SC ने क्यों दिखाई सख्ती?
सड़क पर तकरार...खामोश ज्ञानेश कुमार!
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'...तो यह पूरी तरह से उल्लंघन होगा', CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी
'...तो यह पूरी तरह से उल्लंघन होगा', CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी
'अब केवल टैंक आना बाकी...', जंतर-मंतर पर सशस्त्र बल की तैनाती पर बोले अखिलेश
'अब केवल टैंक आना बाकी...', जंतर-मंतर पर सशस्त्र बल की तैनाती पर बोले अखिलेश
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के सामने रखी शर्त, बोले- 'आप अपराधी नहीं, आपको छोड़ देंगे...'
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के सामने रखी शर्त, बोले- 'आप अपराधी नहीं, आपको छोड़ देंगे...'
वेस्टइंडीज ने 2000 सिक्स लगाकर बनाया टी20 का वर्ल्ड रिकॉर्ड, भारत पीछे-पीछे
वेस्टइंडीज ने 2000 सिक्स लगाकर बनाया टी20 का वर्ल्ड रिकॉर्ड, भारत पीछे-पीछे
दिग्गज मराठी एक्ट्रेस मधु कांबीकर का निधन, निभा चुकी हैं नाना पाटेकर की मां का रोल
दिग्गज मराठी एक्ट्रेस मधु कांबीकर का निधन, निभा चुकी हैं नाना पाटेकर की मां का रोल
जंतर मंतर प्रोटेस्ट साइट से हटा तो भड़की CJP, सौरव दास बोले- 'लिखकर ले लीजिए कि...'
जंतर मंतर प्रोटेस्ट साइट से हटा तो भड़की CJP, सौरव दास बोले- 'लिखकर ले लीजिए कि...'
जंतर-मंतर वाले आदेश पर जन सुराज की पहली प्रतिक्रिया, 'मोदी सरकार…'
जंतर-मंतर वाले आदेश पर जन सुराज की पहली प्रतिक्रिया, 'मोदी सरकार…'
बिना खेत कैसे कर सकते हैं मशरूम की खेती, इसमें कितनी लागत?
बिना खेत कैसे कर सकते हैं मशरूम की खेती, इसमें कितनी लागत?
Embed widget