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भारत में कौन विदेशी चंदा ले सकता है, कौन नहीं? जानें नियम

FCRA Amendment Bill 2026: भारत में FCRA बिल को लेकर चर्चा चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि कौन विदेशी चंदा ले सकता है और कौन नहीं.

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  • FCRA संशोधन विधेयक, विदेशी अंशदान नियंत्रित करने हेतु।
  • राजनीतिक दल, जज, सांसद, कर्मी विदेशी धन से वंचित।
  • योग्य संस्थाएं पंजीकरण उपरांत विदेशी धन प्राप्त करतीं।
  • विदेशी दान केवल SBI खाते में जमा होगा।

FCRA Amendment Bill 2026: मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा कि विदेशी अंशदान संशोधन बिल को 12 अगस्त को संसद में पास होने के लिए पेश किया जा सकता है. हालांकि यह उसी तारीख से लागू नहीं होगा. इस बहस के बीच एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भारत में कौन कानूनी तौर पर विदेशी स्रोतों से पैसा ले सकता है और किसे ऐसा करने से मनाही है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

FCRA क्या है और यह विदेशी योगदान को क्यों रेगुलेट करता है? 

फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, या FCRA भारत में विदेशी योगदान और विदेशी मेहमाननवाजी को स्वीकार करने और उनके इस्तेमाल को रेगुलेट करता है. इसका मकसद इस बात को पक्का करना है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल इस तरह से ना हो जिससे भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, जनहित या फिर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बुरा असर पड़े. 

यह कानून सभी तरह की विदेशी फंडिंग पर रोक नहीं लगाता है. योग्य व्यक्ति, एसोसिएशन और संगठन विदेशी योगदान ले सकते हैं, लेकिन उन्हें कानून के तहत तय रजिस्ट्रेशन, मंजूरी, बैंकिंग, रिपोर्टिंग और इस्तेमाल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना होगा.


भारत में कौन विदेशी चंदा ले सकता है, कौन नहीं? जानें नियम

कौन विदेशी योगदान नहीं ले सकता? 

FCRA खास तौर पर कई तरह के लोगों और संगठनों को विदेशी योगदान लेने से रोकता है. इनमें राजनीतिक दल और उनके पदाधिकारी, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार, सांसद, विधायक, जज और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं. 

सरकारी कॉर्पोरेशन और राजनीतिक प्रकृति वाले संगठनों के कर्मचारी भी इन पाबंदियों के दायरे में आते हैं. कुछ मीडिया प्रोफेशनल जिनमें रजिस्टर्ड अखबारों के एडिटर, मालिक, पब्लिशर, कार्टूनिस्ट, कॉलमिस्ट और कॉरेस्पॉडेंट शामिल हैं, उन्हें भी लागू नियमों के तहत विदेशी योगदान लेने से रोका गया है. इन पाबंदियों का मकसद विदेशी पैसे को चुनावों, सरकारी फैसले लेने की प्रक्रिया, न्यायिक कामकाज, राजनीतिक गतिविधि या मीडिया को प्रभावित करने से रोकना है.

कौन विदेशी फंडिंग ले सकता है? 

योग्य व्यक्ति, एसोसिएशन, NGO, चैरिटेबल ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान और धार्मिक संगठन विदेशी योगदान ले सकते हैं. बशर्ते वे FCRA की जरूरत को पूरा करते हो. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, गरीबी दूर करने, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक काम और सामाजिक या फिर आर्थिक विकास जैसी गतिविधियों में शामिल संगठन विदेशी फंडिंग के लिए योग्य हो सकते हैं. हालांकि सिर्फ एनजीओ या फिर चैरिटेबल संगठन होने से ही किसी संस्था को विदेश से पैसा लेने का अधिकार नहीं मिल जाता. इसके लिए पहले FCRA मंजूरी लेनी होती है.

FCRA रजिस्ट्रेशन के लिए क्या जरूरी है? 

विदेशी योगदान लेने की चाहत रखने वाले संगठन को आमतौर पर या तो FCRA रजिस्ट्रेशन या फिर केंद्र सरकार से पहले से मंजूरी की जरूरत होती है. किसी खास प्रोजेक्ट के लिए किसी खास डोनर से तय योगदान पाने के लिए आम तौर पर पहले से मंजूरी दी जाती है. जो संगठन नियमित रूप से विदेशी फंडिंग पाना चाहते हैं वे जरूरी योग्यता शर्तों को पूरा करने पर FCRA रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. नए रजिस्ट्रेशन के लिए संगठन को आमतौर पर अपना अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड दिखाना होता है. 

विदेशी योगदान कहां जमा किया जा सकता है? 

नियमों के तहत विदेशी योगदान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नई दिल्ली मेन ब्रांच में मौजूद खास FCRA बैंक अकाउंट के जरिए ही मिलना चाहिए. अलग बैंकिंग व्यवस्था अधिकारियों को विदेशी पैसे पर नजर रखने और यह देखने में मदद करती है कि उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है. ऐसे फंड पाने वाले संगठनों को रिकॉर्ड रखना होता है और जरूरी रिपोर्टिंग और ऑडिटिंग नियमों का पालन करना होता है. कानून में मुख्य पदाधिकारियों, डायरेक्टर और ट्रस्टियों की पहचान की पुष्टि करने की जरूरतें भी शामिल हैं, जिसमें लागू होने पर आधार से जुड़े नियम भी शामिल हैं. 

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प्रशासनिक खर्चों पर कितना विदेशी पैसा खर्च किया जा सकता है? 

FCRA नियम प्रशासनिक खर्चों के लिए इस्तेमाल किया जा सकने वाले विदेशी योगदान की मात्रा को सीमित करते हैं. लागू नियमों के तहत आम तौर पर सीमा मिले हुए विदेशी योगदान का 20% होता है जो कानूनी नियमों और मंजूर अपवादों के अधीन है. प्रशासनिक खर्चों में सैलरी, ऑफिस के खर्च और संगठन के दूसरे ऊपरी खर्च शामिल हो सकते हैं. इस पाबंदी का मकसद इस बात को पक्का करना है कि विदेशी दान का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन्हीं चीजों के लिए हो जिनके लिए वह मिले थे. 

क्या कोई संगठन विदेशी फंड किसी दूसरे एनजीओ को ट्रांसफर कर सकता है?

FCRA नियम एक पाने वाले संगठन द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति या फिर संगठन को सब ग्रांट के तौर पर विदेशी योगदान ट्रांसफर करने पर भी रोक लगाते हैं. यह पाबंदी तब भी लागू होती है जब पाने वाले संगठन के पास खुद FCRA रजिस्ट्रेशन हो. इसका मकसद इस बात को पक्का करना है कि विदेशी पैसा पाने वाली संस्था उसके इस्तेमाल के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह रहे. ना कि फंड कई संगठनों से होकर गुजरे. 


भारत में कौन विदेशी चंदा ले सकता है, कौन नहीं? जानें नियम

क्या विदेश से मिलने वाला हर पेमेंट FCRA के दायरे में आएगा? 

नहीं, विदेश से आई हर पेमेंट अपने आप विदेशी योगदान नहीं माना जाता है. उदाहरण के लिए किसी भी विदेशी क्लाइंट से सही कमर्शियल, प्रोफेशनल या फिर बिजनेस सर्विस के बदले मिली फीस, सैलरी या प्रोफेशनल मेहनताना को आमतौर पर विदेशी योगदान की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता. इस वजह से सर्विस के लिए किया गया सही पेमेंट किसी संगठन की गतिविधि को सपोर्ट करने के मकसद से दिए गए विदेशी डोनेशन या फिर योगदान से अलग होता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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