चीन में किस नौकरी में सबसे ज्यादा कमाते हैं भारतीय? जानें वहां जॉब के नियम
भारत-चीन संबंधों में सुधार के बाद चीनी टेक और फाइनेंस कंपनियां भारतीय पेशेवरों को आकर्षित कर रही हैं, जहां एआई व आईटी क्षेत्र में 35 लाख से 56 लाख रुपये प्रतिमाह तक का पैकेज मिल रहा है.

भारत और चीन के कूटनीतिक रिश्तों में जमी बर्फ अब धीरे-धीरे पिघलने लगी है. कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की वापसी के बाद अब वीजा नियमों में नरमी और व्यापारिक संपर्कों को मजबूती दी जा रही है. इस सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा फायदा रोजगार बाजार में देखने को मिल रहा है. तेजी से डिजिटल होती चीनी अर्थव्यवस्था और टेक सेक्टर में कुशल पेशेवरों की कमी को पूरा करने के लिए ड्रैगन अब भारतीय हुनर पर दांव लगा रहा है. चलिए जानें कि यहां भारतीयों के किन सेक्टर्स में अच्छा पैसा है.
रिश्तों में गर्माहट से खुले रोजगार के बंद दरवाजे
दोनों देशों के बीच सीमावर्ती तनाव कम होने के साथ ही द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों में नया सुधार देखने को मिल रहा है. चीनी कंपनियां एक बार फिर वैश्विक सप्लाई चेन और अपने टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए विदेशी प्रतिभाओं को जोडने में जुट गई हैं. भारत में मौजूद उच्च कुशल आईटी और इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स की क्षमता को देखते हुए चीनी फर्म्स उन्हें प्राथमिकता दे रही हैं. इस कूटनीतिक सुधार ने भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़े और रणनीतिक पड़ोसी देश में करियर बनाने के नए रास्ते पूरी तरह से खोल दिए हैं.
चीन में सबसे मोटी सैलरी देने वाला क्षेत्र
चीन अपने यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण पर अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है. इसी वजह से एसटीईएम (STEM) यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स के विशेषज्ञों की वहां सबसे ज्यादा कद्र है. इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों को हर महीने 2,50,000 से 4,00,000 चीनी युआन की सैलरी मिल रही है, जो भारतीय रुपये में लगभग 35.4 लाख से 56.6 लाख रुपये महीना बैठती है. स्मार्ट सिटी, ऑटोमेशन और रिसर्च प्रोजेक्ट्स में भारतीय STEM विशेषज्ञों को शीर्ष पदों पर रखा जा रहा है.
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फाइनेंस, सेल्स और आईटी सेक्टर में पैकेज
तकनीकी और वित्तीय प्रबंधन के मामले में भी भारतीय पेशेवरों का दबदबा कायम है. अकाउंट्स एंड फाइनेंस में काम करने वाले विशेषज्ञों को 2.5 लाख से 3.8 लाख युआन (35.4 लाख से 53.8 लाख रुपये) प्रति माह का पैकेज मिल रहा है. आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र के साथ-साथ कॉर्पोरेट सेल्स में कार्यरत पेशेवरों को 2 लाख से 3.5 लाख युआन (28.3 लाख से 49.6 लाख रुपये) प्रतिमाह तक सैलरी ऑफर की जा रही है. क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और एआई डेवलपर की भूमिकाओं में भारतीयों को शीर्ष दावेदार माना जाता है.
इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और कोर मैन्युफैक्चरिंग में अवसर
चीन में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल मेडिकल नेटवर्क के विस्तार के कारण कोर इंजीनियर्स और हेल्थकेयर स्टाफ की भारी मांग है. स्वास्थ्य सेवा में विशेषज्ञ डॉक्टरों को 2 लाख से 3.2 लाख युआन (28.3 लाख से 45.3 लाख रुपये) और कोर मैकेनिकल व सिविल इंजीनियरों को 1.8 लाख से 3 लाख युआन (25.5 लाख से 42.5 लाख रुपये) महीने का वेतन दिया जा रहा है. मानव संसाधन में 1.8 लाख से 2.6 लाख युआन (25.5 लाख से 36.8 लाख रुपये) और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में 1.5 लाख से 2.5 लाख युआन (21.2 लाख से 35.4 लाख रुपये) का मासिक पैकेज दिया जा रहा है.
एजुकेशन, नर्सिंग और सप्लाई चेन में मांग
मेडिकल सपोर्ट, नर्सिंग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी भारतीयों के लिए पर्याप्त संभावनाएं बनी हुई हैं. चीन में नर्सिंग और मेडिकल सपोर्ट प्रोफेशनल्स को 1.4 लाख से 2.2 लाख युआन (19.8 लाख से 31.2 लाख रुपये) और भाषा व विषय विशेषज्ञों को टीचिंग में 1.2 लाख से 2 लाख युआन (17 लाख से 28.3 लाख रुपये) प्रतिमाह मिल रहे हैं. इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन मैनेजमेंट और औद्योगिक मशीनों के संचालन के लिए भारतीय युवाओं को व्यापक स्तर पर भर्ती किया जा रहा है.
चीन में भारतीयों के काम करने के नियम
चीन में काम करने की प्रक्रिया थोड़ी सख्त और स्पष्ट नियमों पर आधारित है. किसी भी भारतीय को वहां जाने से पहले आधिकारिक जॉब ऑफर लेटर हासिल करना अनिवार्य है. इसके बिना वर्क परमिट और एम्प्लॉयमेंट (Z) वीजा के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है. कूटनीतिक सुधारों के बावजूद भारतीय नागरिकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों, बैकग्राउंड चेक और पुलिस वेरिफिकेशन की गहन एवं बहुस्तरीय जांच की जाती है. पूरी तरह से सत्यापित दस्तावेज जमा करने के बाद ही वर्क परमिट जारी होता है.

अलग डिजिटल दुनिया और लोकल ऐप्स की बाध्यता
चीन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती वहां का डिजिटल माहौल है. चीन के राष्ट्रीय इंटरनेट नियमों और फायरवॉल के कारण गूगल वर्कस्पेस, जीमेल, गूगल ड्राइव, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म सामान्य नेटवर्क पर काम नहीं करते. वहां इनका उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके बदले वहां काम करने वाले भारतीयों को चीनी ऐप्स जैसे वीचैट (WeChat), बायडू (Baidu), डिंगटॉक (DingTalk) और फीशू (Feishu) को अपनाना पड़ता है.
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