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Petrol Diesel Price: क्या एक्साइज ड्यूटी घटने से 10 रुपये सस्ता होगा डीजल-पेट्रोल? जानें सरकार के कदम की हकीकत

Petrol Diesel Price: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव से कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है. इस बीच सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है. आइए जानते हैं क्यों लिया गया यह फैसला.

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  • सरकार ने पेट्रोल पर ₹10, डीजल पर ₹10 एक्साइज ड्यूटी घटाई।
  • तेल कंपनियों को वैश्विक कीमतों से हो रहा भारी नुकसान।
  • सरकार का लक्ष्य तेल कंपनियों पर वित्तीय बोझ कम करना।
  • कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, भारत में ईंधन महंगा।

Petrol Diesel Price: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल दिया है. होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की आशंका के चलते कीमतें लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. इस उछाल का भारत में ईंधन की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है.  इसी बीच हाल ही में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती कर दी है. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतें कम होंगी? आइए जानते हैं.

सरकार ने क्या बदलाव किया? 

सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी है. इसी के साथ डीजल के लिए ₹10 प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह से हटा दी गई है. कागज पर इससे ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट की गुंजाइश बनती है.

क्या है एक्साइज ड्यूटी?

एक्साइज ड्यूटी एक सेंट्रल टैक्स है जो वस्तुओं के उत्पादन पर लगाया जाता है. पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे में नहीं आते. इसका मतलब है कि उन पर सेंट्रल एक्साइज और राज्य स्तरीय VAT के जरिए अलग से टैक्स लगाया जाता है. इससे भारत में ईंधन की कीमतों में टैक्स एक बड़ा हिस्सा बन जाता है. 

कीमतें तुरंत क्यों नहीं गिर सकतीं? 

टैक्स कटौती के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत नहीं गिर सकतीं. दरअसल ऐसा कहा जा रहा है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनीज इस समय कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से भारी नुकसान का सामना कर रही हैं. अनुमानों के मुताबिक उन्हें लगभग ₹48.8 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है. इसकी भरपाई कंपनियां इस टैक्स राहत का इस्तेमाल करके करने की कोशिश कर रही हैं. 

क्या है सरकार की रणनीति? 

एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए कीमतें सीधे कम करने के बजाय तेल कंपनियों पर पड़ रहे वित्तीय बोझ को कम करना है. टैक्स में कटौती करके सरकार कंपनियों को बढ़ती लागत को खुद वहन करने में मदद कर रही है. इससे कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए इसका पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा. 

अगर तेल कंपनियां एक्सेस कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का फैसला करती हैं तो पेट्रोल की कीमतें ₹10 से ₹12 प्रति लीटर तक कम हो सकती हैं. इसी के साथ डीजल ₹8 से ₹10 प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है. हालांकि यह पूरी तरह से बाजार की स्थिति और कंपनियों के फैसले पर निर्भर करता है.

यह भी पढ़ें: कतर में कितने हो जाते हैं भारत के 10000 रुपये, इससे यहां क्या-क्या खरीद सकते हैं?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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