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Gold Utensils: सोने-चांदी के बर्तनों में क्यों खाते थे राजा महाराजा, जानें क्या‌ थी वजह

Gold Utensils: पुराने समय में राजा-महाराजा सोने और चांदी के बर्तनों में खाना खाते थे. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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  • शाही लोग ज़हर से बचाव के लिए सोना-चांदी के बर्तन इस्तेमाल करते थे।
  • चांदी ज़हर से संपर्क में आने पर रंग बदल देती थी, देती थी चेतावनी।
  • आयुर्वेद के अनुसार सोने-चांदी के बर्तन स्वास्थ्य, शक्ति और संतुलन बढ़ाते थे।
  • ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सोना-चांदी मानसिक स्थिरता और ऊर्जा के प्रतीक थे।

Gold Utensils: प्राचीन राज्यों और शाही साम्राज्यों में सोने और चांदी के बर्तनों में भोजन करना सिर्फ विलासिता या फिर दिखावे का प्रदर्शन नहीं था. राजा, सम्राट और शाही परिवार इन कीमती धातुओं के बर्तनों का इस्तेमाल कई दूसरी वजहों से करते थे. जहर से बचाव से लेकर आयुर्वेद में बताए गए स्वास्थ्य सिद्धांतों तक सोने और चांदी के बर्तनों को शाही जीवन में काफी मूल्यवान माना जाता था. 

सोने और चांदी के बर्तन कितने फायदेमंद?

राजाओं द्वारा सोने और चांदी के बर्तनों को प्राथमिकता देने की सबसे बड़ी वजह जहर से बचाव थी. प्राचीन शाही दरबार में महल की साजिश और जहर मिले भोजन के जरिए से हत्या के प्रयास आम बात थी.  खास तौर से चांदी कुछ सल्फर आधारित कंपाउंड और टॉक्सिन पदार्थ के प्रति रासायनिक रूप से प्रतिक्रियाशील होती है. ऐतिहासिक मान्यता यह थी कि अगर चांदी के बर्तनों में जहर मिला भोजन परोसा जाता था तो धातु का रंग बदल सकता था या फिर वह काला पड़ सकता था. इससे राजा को भोजन करने से पहले ही चेतावनी मिल जाती थी. हालांकि आधुनिक विज्ञान सभी प्रकार के जहरों के खिलाफ इस तरीके की प्रभावशीलता पर बहस करता है.

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आयुर्वेद ने सोने और चांदी को स्वास्थ्य लाभों से जोड़ा 

प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ जैसे भोजनकुतूहलम्  अलग-अलग धातुओं के बर्तनों में भोजन करने से जुड़े खास स्वास्थ्य लाभों को बताते हैं. सोना जिसे आयुर्वेद में स्वर्ण के नाम से जाना जाता है एक गर्म और ऊर्जा देने वाली धातु मानी जाती थी. इसके बारे में माना जाता था कि यह शक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता, जीवन शक्ति, याददाश्त और दिल के स्वास्थ्य को बढ़ाती है. 

चांदी को एक शीतलता प्रदान करने वाली धातु के रूप में देखा जाता था. यह शरीर के तीन दोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करती थी. ऐसा माना जाता था कि यह मन को शांत करती है, बुद्धि में सुधार करती है और तनाव या फिर क्रोध को कम करती है.

सोना और चांदी ज्योतिष से जुड़े थे 

इन धातुओं के शाही इस्तेमाल में ज्योतिष ने भी एक बड़ी भूमिका निभाई. पारंपरिक भारतीय ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक चांदी का संबंध चंद्रमा से है और सोने का संबंध सूर्य से. चांदी के बर्तनों के रोजाना इस्तेमाल से मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और फैसले लेने की क्षमता के मजबूत होने की मान्यता थी. वहीं सोना ऊर्जा, नेतृत्व, आत्मविश्वास और शाही अधिकार का प्रतीक था.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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