Goat Price In Pakistan: पाकिस्तान में आसमान छू रही बकरों की कीमतें, इतने में तो घर आ जाएगी चमचमाती कार
Goat Price In Pakistan: पाकिस्तान में बकरीद से पहले पशु बाजारों में रौनक तो है, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण लोग सिर्फ दाम पूछकर लौट रहे हैं. उनका मानना है कि इतने में घर में चमकिली कार आ सकती है.

Goat Price In Pakistan: दुनिया भर में चल रहे युद्ध और तनाव का असर हर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, लेकिन पाकिस्तान में हालात कुछ ज्यादा ही खराब नजर आ रहे हैं. वहां पहले से ही महंगाई लोगों को परेशान करती थी, ऊपर से अब रोजमर्रा की चीजें भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. कभी पानी महंगा हुआ, फिर आटे के दाम आसमान पर पहुंचे और अब बकरीद से पहले बकरों की कीमतों ने लोगों को हैरान करना शुरू कर दिया है . हालत ऐसी हो गई है कि जितने में वहां पर बकरा बिक रहा है, उतने में कई लोग चमचमाती छोटी कार घर ले आता.
बकरीद से पहले पशु बाजारों में लगी भीड़, लेकिन जेबें खाली
ईद-उल-अजहा यानी बकरीद करीब आते ही पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में पशु बाजार सजने लगे हैं. हर साल लोग अपने परिवार के साथ अच्छे बकरे खरीदने बाजार पहुंचते हैं, लेकिन इस बार ज्यादातर लोग सिर्फ कीमत पूछकर वापस लौट आ रहे हैं. पाकिस्तान में सामान्य और छोटी बकरा यानी 15 से 25 किलो वजन वाले कि कीमत करीब 30,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक है. वही अगर मध्यम आकार का बकारा 30 से 40 किलो लगभग 50,000 से 80,000 रुपये तक में बिक रहा है.
साथ ही कई बाजारों में बड़े और अच्छे नस्ल के बकरों (जैसे बीटल, राजपुरी) लगभग 50 किलो से अधिक की कीमत करीब 90,000 रुपये से लेकर 1,500,00 रुपये तक है या इससे अधिक तक में बिक रहे हैं. वही कुछ खास नस्ल के बकरों की कीमत तो इससे भी ज्यादा पहुंच गई है. दुकानदारों से पुछने पर पता चला कि चारे, ट्रांसपोर्ट और पशुओं की देखभाल का खर्च काफी बढ़ चुका है, इसलिए दाम भी बढ़ाने पड़ रहे हैं.
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कार जितनी कीमत वाले बकरे बने चर्चा का विषय
पाकिस्तान में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा उन बकरों की हो रही है जिनकी कीमत लाखों में रखी गई है. कुछ बकरों की कीमत इतनी ज्यादा बताई जा रही है कि उतने में एक नई छोटी कार खरीदी जा सकती है. इतना ही नहीं अब तो वहां के लोगों ने भी मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है, उनका कहना है कि “बकरा खरीदें या कार दोनों ही औकात से बाहर है?” हालांकि इस मजाक के पीछे वहां की जनता का दर्द भी छिपा हुआ है. लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों की बचत खत्म कर दी है जिसके कारण इसलाम का सबसे महत्व त्योहार बकरीद की खुशियों पर भी असर पड़ने लगा है. अगर ऐसी ही स्थिति रही तो कई परिवारों में अब मिलकर एक ही जानवर की कुर्बानी करने का फैसला लेना पड़ेगा जिससे खर्च थोड़ा कम होगा.
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