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NATO Rules: अगर नाटो देश पर ही हमला कर दे अमेरिका तो कहां होगी शिकायत, क्या इसके लिए भी है नियम?

NATO Rules: हाल ही में अमेरिका में ग्रीनलैंड को हासिल करने का बड़ा बयान दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर किसी नाटो देश पर अमेरिका हमला कर दे तो उसकी शिकायत कहां पर होगी.

NATO Rules: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि अमेरिका रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करना चाहता है. हालांकि ग्रीनलैंड खुद नाटो का अलग सदस्य नहीं है लेकिन यह डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है. डेनमार्क नाटो का संस्थापक सदस्य है जिस वजह से यह द्वीप नाटो के सामूहिक सुरक्षा ढांचे के अंदर आता है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर नाटो देश पर अमेरिका हमला कर दे तो कहां पर होगी शिकायत.

क्या है नाटो का मुख्य सिद्धांत 

नाटो की स्थापना इस धारणा पर हुई थी कि इसके सदस्य कभी भी एक दूसरे के खिलाफ जंग नहीं लड़ सकते. यह गठबंधन रक्षात्मक है, जिसे बाहरी आक्रमण को रोकने के लिए बनाया गया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून संधि के उल्लंघन की उम्मीद करता है और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए तंत्र मौजूद है.

उत्तरी अटलांटिक परिषद 

उत्तरी अटलांटिक परिषद नाटो की एक संस्था है जहां पर सभी सदस्य देशों का समान रूप से प्रतिनिधित्व होता है. अगर किसी नाटो देश को लगता है कि उस पर खतरा है या फिर किसी दूसरे सदस्य ने उस पर हमला किया है तो वह नाटो संधि के अनुच्छेद 4 के तहत तुरंत उत्तरी अटलांटिक परिषद के सामने इस मुद्दे को उठा सकता है. अनुच्छेद 4 किसी भी सदस्य को परामर्श के लिए बुलाने की अनुमति देता है जब उसकी क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता या फिर सुरक्षा खतरे में हो.

क्या अमेरिका के खिलाफ अनुच्छेद 5 लागू किया जा सकता है 

अनुच्छेद 5 नाटो का प्रसिद्ध सामूहिक रक्षा खंड यह कहता है कि एक पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. यानी कि अगर एक नाटो सदस्य दूसरे पर हमला करता है तो बाकी सहयोगी पीड़ित देश की रक्षा में अनुच्छेद 5 लागू कर सकते हैं. हालांकि नाटो के पास एक सदस्य द्वारा दूसरे के खिलाफ आक्रामकता से निपटने के लिए कोई खास नियम नहीं है. क्योंकि संधि का मसौदा तैयार करते समय ऐसी स्थिति की कभी कल्पना ही नहीं की गई थी. 

अधिकारों का निलंबन 

नाटो संधि के अनुच्छेद एक के तहत सभी सदस्य विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने और एक दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग से बचने के लिए बंधे हुए हैं. अगर कोई भी सदस्य इस सिद्धांत का पालन नहीं करता है तो उसे गठबंधन के अंदर अधिकारों के निलंबन या फिर राजनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है.

ये भी पढ़ें: जब ग्रीनलैंड की नहीं है अपनी कोई सेना तो कौन करता है उसकी सुरक्षा, अमेरिका ने हमला किया तो कौन बचाएगा?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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