Hair Growth After Death: क्या मरने के बाद भी बढ़ते रहते हैं नाखून और बाल, कितनी देर तक होता है ऐसा?
Hair Growth After Death: अक्सर ही ऐसा कहा जाता है कि मौत के बाद बाल और नाखून बढ़ते रहते हैं. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच और इस बारे में क्या कहता है विज्ञान.

- 12-72 घंटों में यह भ्रम शरीर के सूखने से बढ़ता है।
Hair Growth After Death: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद बाल और नाखून बढ़ना बंद हो जाते हैं. हालांकि उनके आसपास की त्वचा सूखकर पीछे हट सकती है जिससे बाल और नाखून का ज्यादा हिस्सा दिखाई देने लगता है. इससे ऐसा लगता है कि उनकी लंबाई बढ़ गई है. बाल और नाखून अपनी जड़ों के पास मौजूद कोशिकाओं के खास समूह से विकसित होते हैं. नाखूनों में जहां से विकास होता है उस हिस्से को मैट्रिक्स कहा जाता है.
इन हिस्सों में कोशिकाएं विभाजित होती हैं और पुरानी कोशिकाओं को आगे की तरफ धकेलती हैं. जैसे-जैसे यह कोशिकाएं विकास वाले हिस्से से दूर जाती हैं केराटिन बनने की वजह से सख्त हो जाती हैं. केराटिन एक मजबूत प्रोटीन है जो बालों और नाखूनों को उनकी संरचना देता है.
वास्तविक विकास क्यों रुक जाता है?
मौत के बाद जब दिल धड़कना बंद कर देता है तो शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाला रक्त संचार भी रुक जाता है. ऑक्सीजन के बिना कोशिकाएं अब वह एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट नहीं बन पाती जो सामान्य गतिविधि और विभाजन के लिए जरूरी होता है. यही वजह है कि नए बाल और नाखून बनाने वाली प्रक्रिया रुक जाती है. मौत के कुछ ही मिनट के अंदर वास्तविक विकास खत्म हो जाता है. बाद में बाल या फिर नाखून लंबे दिखाई देना इस बात का सबूत नहीं है कि यह टिशूज अभी भी बढ़ रहे हैं.

त्वचा का पीछे हटना एक भ्रम पैदा करता है
लंबाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से शरीर के सूखने की वजह से होती है. मौत के बाद शरीर में तरल पदार्थ की आपूर्ति बंद हो जाती है जबकि टिशूज से पानी लगातार वाष्पित होता रहता है. जैसे-जैसे त्वचा और दूसरे नरम टिशु अपनी नमी खोते हैं वे सिकुड़ जाते हैं और पीछे की तरफ खिंच जाते हैं.
यह बदलाव उंगलियों के आसपास देखा जा सकता है. नाखून के आधार पर मौजूद त्वचा, जिसमें क्यूटिकल वाला हिस्सा भी शामिल होता है, सूखने पर पीछे हट जाती है. इससे नाखून का ज्यादा हिस्सा दिखाई देने लगता है. इससे नाखून कुछ मिलीमीटर लंबे लगने लगते हैं जबकि असलियत में उनकी लंबाई में कोई भी बदलाव नहीं हुआ होता.
ऐसा ही असर चेहरे और सिर की त्वचा पर भी पड़ सकता है. जैसे-जैसे चेहरे की त्वचा सिकुड़ती है दाढ़ी के बाल गालों से ज्यादा बाहर निकले हुए लग सकते हैं. असल में बाल लंबे नहीं होते बल्कि आसपास की त्वचा पीछे हट गई होती है. इससे बालों का ज्यादातर हिस्सा दिखाई देने लगता है.

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शुरुआती घंटों और दिनों में होने वाले बदलाव
शुरुआती 0 से 5 मिनट के अंदर दिल और दिमाग काम करना बंद कर देता है, ऑक्सीजन सप्लाई रुक जाती है और कोशिकाओं का विभाजन रुक जाता है. इसी के साथ बालों और नाखूनों का असली विकास भी खत्म हो जाता है.
समय सीमा के मुताबिक एक से दो घंटे के अंदर शरीर की सभी कोशिकाएं मर जाती हैं. मांसपेशियों में होने वाले रासायनिक बदलावों की वजह से रिगर मॉर्टिस की स्थिति आ जाती है. इसमें शरीर अकड़ जाता है. बालों की जड़ों के पास की छोटी मांसपेशियां भी अकड़ जाती हैं, जिससे बाल सामान्य से ज्यादा मोटे या फिर कड़े महसूस हो सकते हैं. बालों की बनावट में होने वाले इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि बाल बढ़ रहे हैं.
12 से 24 घंटे के अंदर शरीर से नमी लगातार कम होती जाती है और डिहाइड्रेशन साफ तौर पर दिखने लगता है. उंगलियों, गालों और सिर की त्वचा सूखने लगती है और सिकुड़ने लगती है. नाखून के आधार के आसपास की त्वचा पीछे हटने लगती है जिससे नाखून पहले से ज्यादा लंबा दिखाई देने लगता है.
24 से 72 घंटे के दौरान त्वचा का सिकुड़ना अपने चरम पर पहुंच जाता है. इसी के साथ शरीर के सड़ने की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हो जाती है. जैसे-जैसे त्वचा और ज्यादा पीछे हटती है नाखून और दाढ़ी के वे हिस्से दिखने लगते हैं जो पहले छिपे हुए थे. इस दौरान ऐसा भ्रम होता है कि बाल और नाखून बढ़ रहे हैं जबकि असल में उनकी लंबाई में कोई बदलाव नहीं होता.
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