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Dharmendra Death: विले पार्ले श्मशान घाट में कितनी तरह से होता है अंतिम संस्कार? यहां धर्मेंद्र को दी गई अंतिम विदाई

बॉलीवुड के ही-मैन यानी धर्मेंद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे. उन्होंने 24 नवंबर को अंतिम सांस ली. उनका अंतिम संस्कार मुंबई के विले पार्ले श्मशान घाट पर हुआ, जिसे पवन हंस श्मशान घाट भी कहते हैं.

बॉलीवुड के सुपरस्टार्स में शुमार धर्मेंद्र का निधन हो गया है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 89 साल की उम्र में अंतिम सांस ली.  उनका अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में किया गया. आइए जानते हैं कि इस श्मशान घाट में कितनी तरह से अंतिम संस्कार होता है और कितना चार्ज देना पड़ता है?

इन तरीकों से होते हैं अंतिम संस्कार

गौरतलब है कि पवन हंस श्मशान घाट को विले पार्ले श्मशान घाट या वाघ जी वाड़ी श्मशान घाट के नाम से भी जाना जाता है. यहां इलेक्ट्रिक और पारंपरिक लकड़ी की चिता दोनों तरीकों से अंतिम संस्कार किए जाते हैं. 

किसमें कितना लगता है वक्त?

अगर कोई इलेक्ट्रिक मैथड से अंतिम संस्कार कराता है तो इसमें करीब एक से डेढ़ घंटे का वक्त लगता है. वहीं, लकड़ी की चिता से दाह संस्कार करने पर करीब 3 घंटे का वक्त लगता है. कई बार इसमें ज्यादा टाइम भी लग जाता है.

कितना होता है खर्च?

मुंबई नगर निगम की ओर से तय किए गए चार्ज के मुताबिक यहां दाह संस्कार करने के लिए करीब 200 से ₹2000 रुपये तक लगते हैं. इनमें डेडबॉडी को लाने से लेकर डॉक्युमेंटेंशन हेल्प, अनुष्ठान सामग्री, पंडित की सेवाएं और अन्य व्यवस्थाएं शामिल होती हैं. अगर कोई प्राइवेट अंतिम संस्कार सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से दाह संस्कार  कराता है तो 15 से ₹35 हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं. वहीं, अन्य चीजों के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है. 

किन चीजों का देना पड़ता है पैसा?

पवन हंस श्मशान घाट की सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए स्थानीय सरकारी निकाय ने बेहद कम चार्ज रखा है. सिर्फ अतिरिक्त सेवाओं जैसे शव वाहन, फ्रीजर बॉक्स, अनुष्ठान संबंधी वस्तुएं और पुजारी के लिए चार्ज देना पड़ता है. जानकारी के मुताबिक, चिता के लिए लकड़ी की लागत आवश्यक के आधार पर अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए, प्रति 100 किलोग्राम लकड़ी करीब 700 रुपये में मिलती है. वहीं, सामान्य चिता के लिए करीब 400 किलोग्राम की जरूरत होती है.

कैसे करा सकते हैं बुकिंग?

किसी विशिष्ट समय स्लॉट के लिए ऑनलाइन बुकिंग आम तौर पर अनिवार्य होती है और इसका मैनेजमेंट संबंधित नगरपालिका या अधिकृत तृतीय-पक्ष प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है. यहां दाह संस्कार कराने के लिए आपको जरूरी दस्तावेज देने होंगे, जिनमें डॉक्टर का मृत्यु प्रमाण पत्र (फॉर्म 4/4ए) या पुलिस एनओसी और अप्राकृतिक मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा मृतक का फोटो पहचान पत्र शामिल होता है. 

ये भी पढ़ें: हेमा मालिनी या प्रकाश कौर, किसे मिलेगी धर्मेंद्र की पेंशन? जानें क्या है नियम

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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