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फांसी के फंदे पर लटकाने के बाद शरीर में क्या-क्या होता है, कितनी देर में हो जाती है मौत?

देश में दो तरीके से फांसी के मामले देखने को मिलते हैं, एक तो सामान्य फांसी, जो कोई भी लगा लेता है, वहीं दूसरी वो होती है जहां अदालत से सजा मिलती है और जेल में फांसी दी जाती है. चलिए जानें कि इसके बाद शरीर में क्या होता है.

हमारे देश की न्याय व्यवस्था में सबसे जघन्य और गंभीर अपराधों के लिए मुजरिम को फांसी देने का प्रावधान तय किया गया है. जब भी किसी बड़े मामले में अदालत द्वारा फांसी की सजा का आखिरी फैसला सुनाया जाता है तो लोगों के मन में यह उत्सुकता होती है कि आखिर गले में फंदा कसने के बाद शरीर के भीतर क्या बदलाव होते हैं. विज्ञान और चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो फांसी लगने के बाद मौत का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फंदा किस तरीके से लगाया गया है. इस प्रक्रिया में गले पर अचानक पड़ने वाले अत्यधिक दबाव के कारण शरीर के अंग कुछ ही मिनट में काम करना बंद कर देते हैं.

सामान्य या सस्पेंशन हैंगिंग क्या है?

मेडिकल जर्नल और वैज्ञानिक शोधों के अनुसार आम तौर पर फांसी की प्रक्रिया को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है. इनमें पहला तरीका सामान्य या सस्पेंशन हैंगिंग होता है. आत्महत्या के मामलों में ज्यादातर यही तरीका सामने आता है, जिसमें व्यक्ति के शरीर का पूरा या आंशिक वजन रस्सी पर आ टिकता है. इस स्थिति में गले पर फंदा कसते ही महज 10 से 20 सेकेंड के अंदर इंसान का दिमाग सुन्न हो जाता है और वह बेहोशी की हालत में आ जाता है. इसका कारण है कि गले की मुख्य नसें दबने से मस्तिष्क तक खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है.

सामान्य फांसी में कितनी देर में हो जाती है मौत?

सस्पेंशन हैंगिंग के दौरान जब गर्दन की रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है तो दिमाग को ऑक्सीजन मिलना पूरी तरह से बंद हो जाता है. ऑक्सीजन की इस तत्काल कमी की वजह से शरीर के अंदर की पूरी प्रणाली ठप होने लगती है. आमतौर पर इस प्रक्रिया में व्यक्ति का जान जाने में 3 से 5 मिनट का वक्त लगता है, लेकिन कुछ पेचीदा मामलों में यह समय 2 से लेकर 10 मिनट भी हो सकता है.

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न्यायिक फांसी या लॉन्ग ड्रॉप हैंगिंग

फांसी की दूसरी श्रेणी को न्यायिक फांसी या फिर लॉन्ग ड्रॉप हैंगिंग कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल अदालती आदेश के बाद जेलों में किया जाता है. इस कानूनी प्रक्रिया में अपराधी के गले में फांसी का फंदा डालकर एक निश्चित ऊंचाई से नीचे लटका दिया जाता है, जिससे कि झटके से उसकी गर्दन की ऊपरी हड्डी (सर्वाइकल वर्टिबा C2) तुरंत टूट जाती है. रीढ़ की हड्डी के इस हिस्से के टूटते ही दिमाग और शरीर का आपसी संपर्क पूरी तरह से कट जाता है. इस न्यायिक तरीके में व्यक्ति लगभग तुरंत बेहोश हो जाता है और कुछ सेकेंड में उसकी मौत हो जाती है. कानून इस तरीके को अधिक मानवीय मानता है.

फांसी लगने के बाद शरीर में क्या-क्या होता है?

जब गले पर फांसी का फंदा कसता है और सांस पूरी तरीके से रुक जाती है तो शरीर के बाहरी हिस्सों में भी इसके साफ लक्षण दिखने लगते हैं. खून का दौरा अचानक रुकने और ऑक्सीजन न मिलने की वजह से चेहरे का रंग तेजी से लाल या नीला पड़ने लगता है. वायुमार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाने और गले की मांसपेशियों के खिंचाव के कारण कई मामलों में आंखें और जीभ बाहर की ओर निकल आती हैं. इसके तुरंत बाद अंगों में होने वाली हलचल पूरी तरह से थम जाती है और पूरा शरीर शांत हो जाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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