Ayatollah Khamenei: कर्नाटक के इस गांव से था खामेनेई का 40 साल पुराना रिश्ता, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह
कर्नाटक के विजयपुर (बीजापुर) जिले का अलीपुर गांव लंबे समय से शिया समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है. गांव की अधिकांश आबादी शिया समुदाय से जुड़ी है और इसी वजह से कई लोग इसे मिनी ईरान भी कहते हैं.

Ayatollah Khamenei: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में जहां दुनियाभर से लाखों लोग शामिल हुए, वहीं इस पूरे आयोजन के बीच एक भारतीय गांव का नाम खासतौर पर चर्चा में रहा है. कर्नाटक का छोटा सा गांव अलीपुर जिसे प्यार से मिनी ईरान भी कहते हैं. इस गांव से करीब 100 लोग खामेनेई को आखिरी विदाई देने के लिए ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे. जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर कर्नाटक के इस साधारण से गांव का का ईरान के इतने बड़े नेता का इतना गहरा और पुराना नाता कैसे बना. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि कर्नाटक के गांव से खामेनेई के 40 साल पुराना क्या रिश्ता है.
1980 के दशक में शुरू हुआ था यह रिश्ता
कर्नाटक के विजयपुर (बीजापुर) जिले का अलीपुर गांव लंबे समय से शिया समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है. गांव की अधिकांश आबादी शिया समुदाय से जुड़ी है और इसी वजह से कई लोग इसे मिनी ईरान भी कहते हैं. खामेनेई और अलीपुर के बीच भावनात्मक संबंध 1980 के दशक की शुरुआत में बने. जब उन्होंने भारत दौरे के दौरान इस गांव का दौरा किया था. बताया जाता है कि उस समय उन्होंने गांव के लोगों से मुलाकात की, स्थानीय धार्मिक विद्वानों से बातचीत की और गांव की समस्याओं को करीब से जाना. यही यात्रा आगे चलकर अलीपुर और ईरान के बीच गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्तों की नींव बन गई.
एक घटना के बाद अस्पताल बनाने का लिया फैसला
खामेनेई की अलीपुर यात्रा के दौरान एक ऐसी घटना हुई, जिसने गांव की तस्वीर बदल दी. स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि एक गर्भवती महिला की समय पर इलाज न मिलने के कारण रास्ते में ही मौत हो गई थी, क्योंकि आसपास कोई और अस्पताल नहीं था. यह बात सुनकर खामेनेई ने गांव में अस्पताल बनवाने का आश्वासन दिया. बाद में ईरानी सहायता से यहां इमाम खुमैनी अस्पताल का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन भी खामेनेई ने ही किया. यह अस्पताल आज भी इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है. गांव के लोगों का कहना है कि यह अस्पताल उनके और खामेनेई के रिश्ते का बड़ा प्रतीक है.
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गांव वालों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी खामेनेई
अलीपुर के लोगों के लिए खामेनेई केवल ईरान के सर्वोच्च नेता नहीं थे. गांव के कई परिवार उन्हें अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी मानते थे. स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने गांव के विकास और लोगों की भलाई के लिए जो पहल कि उस वजह से उनके प्रति लोगों के मन में विशेष सम्मान बना रहा. यही कारण है कि उनके निधन की खबर के बाद गांव में गहरा शोक देखने को मिला. कई घरों और मस्जिदों पर काले झंडे लगाए गए और लोगों ने सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि दी. गांव में कई दिनों तक बाजार और दुकान भी बंद रही.
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