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Dearness Allowance: DA देने पर सरकारी खजाने में कितना पड़ेगा भार, कहां से देती है सरकार?

Dearness Allowance: केंद्र सरकार AICPI आंकड़ों के आधार पर साल में दो बार कर्मचारियों का डीए बढ़ाती है, जिसका भुगतान संचित निधि और टैक्स राजस्व से होता है. 2% डीए बढ़ोतरी से खजाने पर अच्छा खासा भार पड़ता है.

Dearness Allowance: देश में बढ़ती महंगाई के दौर में दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दामों में होने वाली वृद्धि के बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत प्रदान करने के लिए महंगाई भत्ता यानी DA बेहद महत्वपूर्ण साधन है. वस्तुओं और सेवाओं की दरों में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर दरों में संशोधन करती है. इस वित्तीय राहत का ऐलान होते ही केंद्रीय खजाने पर भारी वित्तीय दबाव पड़ता है. ऐसे में यह जानना अत्यंत प्रासंगिक है कि सरकार इस बड़े वित्तीय खर्च का प्रबंधन कहां से करती है.

हालिया बढ़ोतरी और सरकारी खजाने पर दबाव

जनवरी 2026 से लागू दरों के तहत जब केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दरों में 2 प्रतिशत की वृद्धि की, तो भत्ते का स्तर 58% से बढ़कर 60% तक पहुंच गया. इस 2% की बढ़ोतरी के कारण केंद्र सरकार के वार्षिक खजाने पर लगभग 6,791.24 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा. भत्तों की यह राशि सीधा कर्मचारियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती है.

DA का लाभ पाने वाले लाभार्थी कितने?

DA में की गई इस वृद्धि का सीधा फायदा देश भर के लाखों परिवारों को मिलता है. आंकड़ों के अनुसार, इस निर्णय से लगभग 50.46 लाख से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों को सीधा लाभ मिला. इसके साथ ही, देश भर के करीब 68.27 लाख पेंशनभोगियों को भी बढ़ी हुई महंगाई राहत का फायदा दिया गया, जिससे उनके मासिक बजट को मजबूती मिली.

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Dearness Allowance: DA देने पर सरकारी खजाने में कितना पड़ेगा भार, कहां से देती है सरकार?

सरकार कहां से चुकाती है इतना पैसा?

सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का भुगतान भारत की संचित निधि (कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया) से करती है. इस खजाने को भरने का मुख्य जरिया देश के नागरिकों और व्यावसायिक संस्थानों द्वारा चुकाए जाने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर हैं. इसमें इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और जीएसटी जैसे राजस्व संग्रह के मुख्य साधन शामिल हैं, जिनके माध्यम से भत्ते का वित्तपोषण होता है.

बजट आवंटन और भत्ते की व्यवस्था

वार्षिक बजट सत्र के दौरान ही केंद्र और राज्य सरकारें अपने राजस्व बजट में कर्मचारियों के वेतन तथा विभिन्न भत्तों के लिए अग्रिम धनराशि निर्धारित करती हैं. केंद्र सरकार अपने अधीनस्थ कर्मियों का व्यय खुद वहन करती है, जबकि राज्य सरकारें अपने राजस्व कोष से अपने कर्मचारियों के डीए का भुगतान करती हैं. इस प्रकार भत्ते का भुगतान एक सुनियोजित वित्तीय प्रक्रिया के तहत किया जाता है.

महंगाई भत्ते की गणना कैसे होती है?

महंगाई भत्ते में बदलाव का निर्णय मनमाने ढंग से नहीं होता, बल्कि इसके लिए एक निर्धारित सांख्यिकीय पैमाना मौजूद है. सरकार देश में खुदरा महंगाई की स्थिति को दर्शाने वाले अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आंकड़ों को आधार मानती है. इसी सूचकांक में होने वाले उतार-चढ़ाव के गणितीय फॉर्मूले के आधार पर ही भत्ते की नई दरों का निर्धारण किया जाता है. महंगाई भत्ता कर्मचारियों के मूल वेतन पर आकलित किया जाता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है और वर्तमान डीए दर 60 प्रतिशत है, तो उसे हर महीने 18,000 रुपये भत्ते के रूप में दिए जाएंगे. इस स्थिति में कुल मिलाकर बेसिक सैलरी और भत्ते को जोड़कर कुल देय राशि 48,000 रुपये बनेगी, जिसमें अन्य भत्ते अलग रहते हैं.


Dearness Allowance: DA देने पर सरकारी खजाने में कितना पड़ेगा भार, कहां से देती है सरकार?

कितनी बार बढ़ता है DA?

केंद्र सरकार आमतौर पर एक वर्ष के भीतर दो बार महंगाई भत्ते की समीक्षा और संशोधन करती है. ये संशोधन मुख्य रूप से 1 जनवरी और 1 जुलाई की तिथियों से प्रभावी माने जाते हैं. हालांकि, जनवरी से लागू होने वाले भत्ते का औपचारिक ऐलान मार्च या अप्रैल के महीनों में किया जा सकता है, जिसके बाद कर्मचारियों को पिछले महीनों का एरियर प्रदान किया जाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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