Saudi Arabia To India Oil Ship: सऊदी से क्रूड ऑयल पहुंचा भारत, आपकी बाइक की टंकी तक कैसे पहुंचता है तेल? देखें पूरा प्रॉसेस
Saudi Arabia To India Oil Ship: भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर है. यह तेल विशाल समुद्री टैंकरों के जरिए भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचता है.

- गुणवत्ता जांच और एडिटिव्स के बाद डिपो से पेट्रोल पंपों तक पहुंचता है.
Saudi Arabia To India Oil Ship: सऊदी अरब के रेतीले मैदानों से निकलकर आपकी बाइक की टंकी तक पहुंचने वाला पेट्रोल ऐसा सफर तय करता है, जिसकी कल्पना करना भी रोमांचक है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है, जिसमें सऊदी अरब की भूमिका सबसे अहम है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि समुद्र पार करके आने वाला यह काला गाढ़ा तरल पदार्थ आपकी गाड़ी के लिए पारदर्शी ईंधन कैसे बन जाता है? आइए, इस पूरी जटिल सप्लाई चेन को गहराई से समझते हैं.
सऊदी अरब से तेल का आयात
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है. सऊदी अरब से हर महीने लाखों बैरल कच्चा तेल भारत आता है. यह तेल वहां के विशाल तेल क्षेत्रों से निकालकर सबसे पहले सऊदी के तटवर्ती बंदरगाहों, जैसे रास तनुरा तक पाइपलाइनों के जरिए पहुंचाया जाता है. वहां से इसे वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCC) नामक विशाल जहाजों में लादा जाता है. एक सामान्य समुद्री टैंकर में लगभग 20 लाख बैरल तेल समा सकता है, जो भारत जैसे बड़े देश की कुछ घंटों की जरूरत पूरी करने के लिए काफी होता है.
समुद्री रास्तों की चुनौती और भारत आगमन
सऊदी अरब से चलकर ये विशाल जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अरब सागर को पार करते हुए भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचते हैं. औसतन, सऊदी से भारत के जामनगर, मुंद्रा या वदीनार बंदरगाह तक पहुंचने में एक टैंकर को 4 से 7 दिन का समय लगता है. इन जहाजों की लंबाई फुटबॉल के तीन मैदानों के बराबर होती है. भारत पहुंचने पर इन जहाजों को सीधे किनारे पर नहीं लगाया जाता, बल्कि गहरे समुद्र में बने सिंगल पॉइंट मूरिंग (SPM) सिस्टम से जोड़ा जाता है. वहां से बड़ी पाइपलाइनों के जरिए तेल को किनारे पर बने विशाल स्टोरेज टैंकों में खाली किया जाता है.
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कच्चे तेल का रिफाइनरी तक पहुंचना
बंदरगाह के पास बने स्टोरेज टैंकों में जमा होने के बाद इस कच्चे तेल का अगला पड़ाव रिफाइनरी होती है. भारत में रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी या सरकारी कंपनियों की मथुरा और पानीपत जैसी बड़ी रिफाइनरियों तक इस तेल को पहुंचाने के लिए जमीन के नीचे हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों का जाल बिछा हुआ है. कच्चा तेल अपने आप में सीधा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह एक गाढ़ा और अशुद्ध मिश्रण होता है. इसे रिफाइनरी तक पंप करने के लिए भारी मोटर और प्रेशर कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल होता है, ताकि तेल का प्रवाह बना रहे.
रिफाइनरी में फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन का जादू
जब कच्चा तेल रिफाइनरी पहुंचता है, तो असली वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू होती है. इसे फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहा जाता है. एक विशाल लोहे के टावर में कच्चे तेल को लगभग 400 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है. जैसे-जैसे तेल उबलता है, इसकी स्टीम ऊपर उठती है. अलग-अलग तापमान पर यह वाष्प ठंडी होकर अलग-अलग पदार्थों में बदल जाती है. सबसे ऊपर हल्की गैसें और पेट्रोल निकलता है, उसके नीचे मिट्टी का तेल फिर डीजल और सबसे नीचे भारी लुब्रिकेंट्स और डामर बचता है.
गुणवत्ता की जांच और एड्रिटिव्स का मिश्रण
रिफाइनरी से निकलने वाला पेट्रोल सीधे आपकी गाड़ी में डालने लायक नहीं होता है. इसकी ऑक्टेन रेटिंग जांची जाती है, ताकि यह इंजन के भीतर सही तरीके से जले और इंजन को नुकसान न पहुंचाए. भारत में अब BS-VI मानक लागू हैं, इसलिए रिफाइनरी में तेल से सल्फर की मात्रा को बेहद कम किया जाता है, ताकि प्रदूषण कम हो. इसके बाद इसमें कुछ खास केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जो इंजन की सफाई और उसकी लाइफ बढ़ाने में मदद करते हैं. यहीं पर पेट्रोल और डीजल को उनका अंतिम रूप मिलता है.
ऑयल डिपो से पेट्रोल पंपों का नेटवर्क
रिफाइनरी में तैयार होने के बाद शुद्ध पेट्रोल और डीजल को फिर से पाइपलाइनों या रेलवे के वैगन (मालगाड़ी के टैंकर) के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में बने ऑयल डिपो तक भेजा जाता है. आपके शहर के बाहर आपने अक्सर बड़े-बड़े सफेद रंग के टैंक देखे होंगे, वही डिपो होते हैं. इन डिपो से हर रोज सुबह छोटे टैंकर ट्रक भरे जाते हैं, जो आपके मोहल्ले के पेट्रोल पंप तक पहुंचते हैं. एक पेट्रोल पंप पर पहुंचने वाला हर टैंकर सख्त सुरक्षा मानकों और डिजिटल लॉकिंग सिस्टम से लैस होता है, ताकि रास्ते में मिलावट न की जा सके.
आपकी बाइक की टंकी तक अंतिम डिलीवरी
जब टैंकर पेट्रोल पंप पर पहुंचता है, तो वह वहां जमीन के नीचे बने अंडरग्राउंड टैंक में तेल खाली कर देता है. जब आप पंप पर जाकर नोजल दबाते हैं, तो एक सक्शन पंप उस अंडरग्राउंड टैंक से तेल खींचकर मीटर के जरिए आपकी बाइक की टंकी में डालता है. इस पूरी प्रक्रिया में सऊदी के कुएं से आपकी बाइक तक पहुंचने में तेल को लगभग 15 से 20 दिन का समय और हजारों लोगों की मेहनत लगती है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जरा सा भी बदलाव आपकी जेब पर तुरंत असर डालता है.



















