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प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?

Plastic Currency India: आरबीआई जल्द ही बार-बार छपाई के खर्च को कम करने और जाली नोटों पर रोक लगाने के लिए पॉलीमर प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी में है. चलिए जानें कि इसके सेफ्टी फीचर्स कैसे होंगे.

Plastic Currency India: आज डिजिटल के दौर में जहां बैंकिंग प्रणाली लगातार आधुनिक हो रही है, वहीं आरबीआई भी अब फटे-पुराने नोटों और जालसाजी की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के उद्देश्य से एक बहुत बड़ा और अहम कदम उठाने की तैयारी में है. बार-बार नए कागजी छापने को लेकर होने वाले भारी-भरकम सरकारी खर्चे को घटाने और प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट पेश करने की योजना बना रहा है. इस बात के सामने आते ही लोगों के मन में सवालों की बाढ़ आ गई है कि इन नोटों में ऐसी क्या खास बात होगी कि जालसाज इनकी हूबहू नकल तैयार नहीं कर पाएंगे और उनके सुरक्षा उपाय क्या होंगे.

सरकार क्यों लेकर आ रही है प्लास्टिक नोट?

पॉलीमर नोट साधारण कागज की बजाय एक खास किस्म की लचीली प्लास्टिक शीट पर तैयार किए जाते हैं. ये छूने में तो पुराने नोटों की तरह से ही हल्के और सहज होते हैं, लेकिन पानी में पूरी तरह से भीग जाने पर भी न तो गलते हैं और न ही आसानी से फटते हैं. इन नोटों को लाने की सबसे बड़ी वजह इनकी लंबी उम्र है, क्योंकि ये धूल, नमी और गंदगी की वजह से जल्दी खराब नहीं होते हैं. इसके अलावा वित्त वर्ष 2025 में रिजर्व बैंक ने सिर्फ कागजी नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपये खर्चा किए थे. पॉलीमर नोटों के लंबे टिकाऊपने के कारण बार-बार नोट छापने का यह खर्चा काफी हद तक कम हो जाएगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. 

तो बाजार में कब तक आएंगे प्लास्टिक नोट?

आरबीआई फिलहाल इन प्लास्टिक नोटों को एक पायलट प्रोजेक्ट यानी शुरुआती परीक्षण के रूप में लेकर आ रहा है. रिजर्व बैंक की करेंसी प्रिंटिंग यूनिट ने पॉलीमर शीट की वैश्विक आपूर्ति के लिए एक अंतरराष्ट्रीय टेंडर भी आमंत्रित किया है, जिसमें बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त रखी गई है. इस पूरी टेंडर प्रक्रिया के पूरा होने, विदेशों से कच्चा माल प्राप्त होने और प्रिंटिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ये नोट चरणबद्ध तरीके से बाजार में देखने को मिलेंगे. यदि यह शुरुआती परीक्षण पूरी तरह से सफल और व्यावहारिक रहता है, तो आने वाले समय में रिजर्व बैंक अन्य मूल्यवर्ग के नोटों को भी पॉलीमर में छापने की योजना आगे बढ़ाएगा.

यह भी पढ़ें: Plastic Currency India: क्या नकली नहीं बनाई जा सकती प्लास्टिक करेंसी? इस तरह के नोट लाने से क्या होगा फायदा


प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?

कैसे बनेंगे पॉलीमर नोट?

इन नोटों की सबसे बड़ी खासियत वह सामग्री है जिससे इनको बनाया जाता है. ये आम दुकानों में मिलने वाली प्लास्टिक से नहीं, बल्कि ‘बाय-एक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपलीन' (BOPP) नाम के बेहद उच्च क्वालिटी के पॉलीमर से तैयार होते हैं. यह खास सुरक्षात्मक प्लास्टिक फिल्म खुले बाजार या आम व्यापारी के पास आसानी से उपलब्ध नहीं होती है. इसकी आपूर्ति पर बहुत सख्त सरकारी नियंत्रण होता है. इतना ही नहीं, जब यह प्लास्टिक शीट बनती है, तभी इसके अंदर निर्माण स्तर पर ही कई तरह के गुप्त सुरक्षा फीचर्स और केमिकल कंपाउंड्स जोड़ दिए जाते हैं, जिससे बिना इसकी मूल सामग्री के नकली नोट बनाना नामुमकिन हो जाता है.

प्लास्टिक नोटों के सिक्योरिटी फीचर्स

पॉलीमर नोटों की सबसे अलग और खास पहचान इनमें मौजूद एक पारदर्शी खिड़की (ट्रांसपेरेंट विंडो) होती है. यह एक ऐसा साफ और आर-पार दिखने वाला हिस्सा होता है जिसकी नकल करना जालसाजों के लिए लगभग असंभव है. सामान्य कागजी नोट में काटकर ऐसी खिड़की बनाना मुमकिन नहीं है क्योंकि ऐसा करने से नोट तुरंत फट जाएगा, और ऊपर से अलग से प्लास्टिक चिपकाने पर वह छूते ही तुरंत पकड़ में आ जाता है. इस पारदर्शी प्लास्टिक खिड़की के अंदर ही 3D सुरक्षा फीचर्स, विशेष होलोग्राम और बेहद बारीक माइक्रो-डिजाइन शामिल किए जाते हैं, जिन्हें किसी भी साधारण फोटोकॉपी या प्रिंटर से नहीं छापा जा सकता है.

जटिल प्रिंटिंग से रुकेगी जालसाजी

प्लास्टिक नोटों पर छपाई की तकनीक बेहद जटिल और खर्चीली होती है. इन पर प्रिंटिंग करने के लिए खास किस्म की गुप्त रासायनिक फॉर्मूले वाली रंगीन स्याही का इस्तेमाल किया जाता है, जो जल्दी मिटती नहीं है. हमारे घरों या दुकानों में इस्तेमाल होने वाले साधारण कमर्शियल प्रिंटर और फोटोकॉपी मशीनें इस चिकनी प्लास्टिक सतह पर सही तरीके से स्याही नहीं छोड़ पाते और रंग फैल जाता है. इसके अलावा, इन नोटों को छापने वाली भारी-भरकम मशीनरी इतनी ज्यादा महंगी होती है कि किसी भी छोटे-मोटे जालसाज या आपराधिक गिरोह के लिए इस पूरी तकनीक को खरीद पाना या स्थापित करना आर्थिक रूप से नामुमकिन हो जाता है.

छूने से ही हो जाएगी पहचान?

इन नोटों में मल्टी-लेयर सुरक्षा शामिल होती हैं, जिनमें रोशनी के साथ अपना रंग बदलने वाले होलोग्राफिक तत्व, सुरक्षा धागे, ऑप्टिकल फीचर्स और अति-सूक्ष्म लिखावट शामिल हैं. इसके साथ ही, इन नोटों को छूने का टेक्सचर आम कागज या घरेलू प्लास्टिक से पूरी तरह अलग होता है. अगर कोई जालसाज किसी तरह से इसकी नकल बनाने की कोशिश भी करता है, तो स्पर्श पहचान तकनीक के कारण आम नागरिक भी इसे छूते ही तुरंत असली और नकली का फर्क समझ लेंगे. साथ ही, बैंकों की ऑटोमैटिक कैश मशीनें और स्कैनर भी नकली नोट को एक सेकंड में पहचानकर खारिज कर देंगे.


प्लास्टिक के नकली नोट बनाना मुश्किल क्यों, कैसे सेफ्टी फीचर्स?

क्या पूरी तरह नामुमकिन है नकली नोट बनाना?

सैद्धांतिक रूप से देखा जाए तो दुनिया में कोई भी मुद्रा पूरी तरह से शत-प्रतिशत नकल-रोधी नहीं हो सकती, लेकिन पॉलीमर नोटों की नकल बनाना कागजी नोटों के मुकाबले हजारों गुना कठिन होता है. इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली जटिल तकनीक, दुर्लभ कच्चा माल और आधुनिक प्रिंटिंग प्रोसेस के कारण कोई भी विश्वसनीय नकली प्लास्टिक नोट तैयार नहीं कर सकता है. बाजार में मिलने वाले किसी भी उपकरण से इसकी कॉपी बनाना संभव नहीं है. यही कारण है कि जब ये नोट बाजार में आएंगे, तो आम जनता और ऑटोमेटेड मशीनें दोनों ही बिना किसी झंझट के तुरंत असली नोट की पहचान कर सकेंगे और जाली नोटों का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा.

यह भी पढ़ें: प्लास्टिक करेंसी के बाद कागज के नोटों का क्या करेगा RBI, कैसे होंगे नष्ट?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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