CJP Protest: यह है अब तक का सबसे आक्रामक आंदोलन, जानें कितने आंदोलनकारियों की गई थी जान?
CJP Parliament March: कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया गया. आइए जानते हैं इतिहास के कुछ सबसे हिंसक आंदोलनों के बारे में.

- नक्सल आंदोलन में 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
CJP Sansad March: कॉकरोच जनता पार्टी के हालिया संसद मार्च ने एक बार फिर से भारत में जन आंदोलन के इतिहास की तरफ लोगों का ध्यान किया है. रिपोर्ट के मुताबिक संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठी चार्ज भी किया गया. इसी बीच आइए जानते हैं इतिहास के कुछ ऐसे बड़े आंदोलनों के बारे में जो या तो हिंसक हो गए थे या फिर जिनका सरकार ने सख्ती से दमन किया.
1857 का विद्रोह
1857 का विद्रोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला बड़े पैमाने पर सशस्त्र विद्रोह था. भारतीय सैनिकों के बीच शुरू हुआ यह विद्रोह जल्द ही उत्तर और मध्य भारत में फैल गया. इसमें आम नागरिक, स्थानीय शासक और स्वतंत्रता सेनानी भी शामिल हो गए थे.
ब्रिटिश प्रतिक्रिया तुरंत और काफी ज्यादा कठोर थी. हर जगह सैन्य कार्रवाई की गई और विद्रोह को दबाने के दौरान हजारों संदिग्ध विद्रोहियों और नागरिकों को मार दिया गया. हालांकि कितने लोगों की जान गई इसकी सटीक संख्या पर इतिहासकारों के बीच अभी भी बहस जारी है. लेकिन यह भारत के औपनिवेशिक इतिहास के सबसे घातक संघर्षों में से एक बना हुआ है.
जलियांवाला बाग हत्याकांड
भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक सबसे काला अध्याय 13 अप्रैल 1919 को रॉलेट एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया था. अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल रेजिनाल्ड डायर के नेतृत्व में ब्रिटिश सैनिकों ने निहत्थे लोगों की भीड़ पर गोलीबारी की थी. आधिकारिक ब्रिटिश रिकॉर्ड में 379 लोगों की मौत की बात कही गई. लेकिन भारतीय स्रोत और बाद की जांच में अनुमान लगाया गया कि करीब 1000 से ज्यादा लोगों की जान गई होगी. यह हत्याकांड भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ और इसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन विरोध को और तेज कर दिया.
भारत छोड़ो आंदोलन
1942 में महात्मा गांधी द्वारा करो या फिर मरो के नारे के साथ शुरू किया गया भारत छोड़ो आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे बड़े जन आंदोलन में से एक बन गया. इस आंदोलन के दौरान पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, हड़ताल और सिविल डिसऑबेडिएंस की घटना हुई. रिकॉर्ड्स के मुताबिक पुलिस की गोलीबारी और दमनकारी कार्रवाई में 1028 लोग मारे गए.
तेलंगाना किसान सशस्त्र संघर्ष
1946 और 1951 के बीच तेलंगाना क्षेत्र में सामंती जमींदार और निजाम के प्रशासन के खिलाफ किसानों का एक बड़ा सशस्त्र आंदोलन हुआ. इस संघर्ष में लंबे समय तक सशस्त्र प्रतिरोध और सैन्य कार्रवाई शामिल थी. इस आंदोलन के दौरान 4000 से ज्यादा किसान और कार्यकर्ता मारे गए. इस आंदोलन ने आजादी के बाद भारत में कृषि सुधारों को आकार देने में एक बड़ी भूमिका निभाई.
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नक्सलवादी आंदोलन
नक्सलवादी आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में कट्टरपंथी भूमि सुधारों की मांग करने वाले किसानों के सशस्त्र विद्रोह के रूप में शुरू हुआ. दशकों के दौरान यह एक लंबे समय तक चलने वाले विद्रोह में बदल गया. इसने भारत के कई राज्यों को प्रभावित किया. इस संघर्ष में नागरिकों, सुरक्षाकर्मी और सशस्त्र समूह के सदस्यों सहित 10000 से ज्यादा लोगों की जान गई. इससे यह आजाद भारत में आंतरिक सुरक्षा की सबसे लंबी चुनौतियों में से एक बन गया.
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