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Indian Currency: भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने का किसने लिया था फैसला, जानें क्या‌ था इसका इतिहास?

Indian Currency: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर को छापने का फैसला किसका था? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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  • नोटों पर पहले ब्रिटिश राजा, फिर अशोक स्तंभ आया।
  • गांधी की तस्वीर 1987 में ₹500 नोट पर दिखी।
  • 1996 में सुरक्षा हेतु गांधी सीरीज जारी हुई।

Indian Currency: महात्मा गांधी की तस्वीर भारतीय करेंसी की सबसे जानी पहचानी खासियतों में से एक है. आज देश भर में इस्तेमाल होने वाले हर नोट पर उनकी तस्वीर छपी होती है. हालांकि महात्मा गांधी की तस्वीर हमेशा से भारतीय नोटों का हिस्सा नहीं थी. नोटों पर उनकी तस्वीर को हमेशा के लिए छापने का फैसला 1990 के दशक के बीच में लिया गया था. यह फैसला एक बड़े रीडिजाइन का हिस्सा था जिसका मकसद सुरक्षा को बेहतर बनाना और भारत की करेंसी को और भी खास बनाना था. भारतीय रिजर्व बैंक ने 1996 में औपचारिक तौर पर महात्मा गांधी सीरीज शुरू की. 

1995 में लिया गया अंतिम फैसला 

भारतीय करेंसी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर को हमेशा के लिए छापने का आखिरी फैसला आरबीआई ने लिया था. यह फैसला तब लिया गया था जब आरबीआई ने 13 जुलाई 1995 को केंद्र सरकार को इस बारे में एक सिफारिश भेजी थी. इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई और 1996 में आरबीआई ने नोटों की महात्मा गांधी सीरीज जारी की. तब से लेकर अब तक केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए सभी बड़े नोटों पर महात्मा गांधी की ही तस्वीर छपी होती है.

ब्रिटिश राज के दौरान नोटों पर क्या छपा होता था? 

आजादी से पहले भारतीय करेंसी नोटों पर ब्रिटिश राजाओं की तस्वीर छपी होती थी. अलग-अलग समय पर भारत में जारी किए गए नोटों पर किंग जॉर्ज V और बाद में किंग जॉर्ज VI की तस्वीरें छपी होती थीं. ये नोट इस बात को दिखाते थे कि देश उस समय ब्रिटिश राज का एक उपनिवेश था.

आजादी के बाद नोटों पर किसकी तस्वीर? 

हालांकि भारत 1947 में आजाद हो गया था लेकिन देश की करेंसी व्यवस्था में रातों-रात कोई बदलाव नहीं आया. आजादी के बाद लगभग 2 साल तक किंग जॉर्ज VI की तस्वीर वाले नोट ही चलते रहे. ऐसा इसलिए क्योंकि नए डिजाइन बनाने और छपाई की नई व्यवस्था लागू करने में समय लगता है.

अशोक स्तंभ ने ब्रिटिश राजा की जगह ली 

1949 में एक बड़ा बदलाव आया जब भारत सरकार ने ₹1 के नए नोट जारी किए. इन नोटों पर  राष्ट्रीय प्रतीक के तौर पर सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ छपा हुआ था. ब्रिटिश राजा की तस्वीर की जगह अशोक स्तंभ को छापना इस बात का प्रतीक था कि भारत अब एक आजाद देश बन चुका है. 

महात्मा गांधी की तस्वीर सबसे पहले एक स्मारक नोट पर छपी थी 

भारतीय करेंसी पर महात्मा गांधी की तस्वीर सबसे पहले 1969 में छपी थी. यह वह समय था जब उनकी जन्मशताब्दी मनाई जा रही थी. आरबीआई ने एक खास स्मारक नोट जारी किया था जिस पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी थी. हालांकि यह बस एक स्मारक नोट था. 

1987 में रेगुलर करेंसी

महात्मा गांधी पहली बार अक्टूबर 1987 में रेगुलर इस्तेमाल होने वाले बैंक नोट पर देखें. उस वक्त ₹500 का नोट पेश किया गया था. इस नोट पर महात्मा गांधी की मुस्कुराती हुई तस्वीर थी. 

महात्मा गांधी सीरीज क्यों शुरू की गई?

1990 के दशक में नकली करेंसी को लेकर चिंता काफी बढ़ चुकी थी. सुरक्षा को मजबूत करने और भारतीय बैंक नोट को आधुनिक बनाने के लिए आरबीआई ने पूरी करेंसी सीरीज को फिर से डिजाइन करने का फैसला किया. इस पहल के तहत महात्मा गांधी की तस्वीर को उनकी राष्ट्रीय अहमियत और दुनिया भर में पहचान की वजह से हमेशा रहने वाली मुख्य तस्वीर के तौर पर चुना गया. 

1996 की महात्मा गांधी सीरीज 

1996 में शुरू हुई महात्मा गांधी सीरीज ने भारतीय करेंसी का रूप ही बदल दिया. महात्मा गांधी की मुस्कुराती हुई तस्वीर ₹10 से लेकर ₹100 और उससे ज्यादा कीमत वाले नोटों पर सबसे खास डिजाइन बन गई.

यह भी पढ़ेंः बीजेपी के सबसे अमीर और सबसे गरीब सीएम कौन हैं? नाम जानकर हैरान रह जाएंगे आप

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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