Iran US Conflict: अभी किस फेज में है ईरान और अमेरिका की जंग, कब कहलाने लगेगी वर्ल्ड वॉर?
Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है. आइए जानते हैं कि यह युद्ध अब कौन से चरण में है.

- ईरान-अमेरिका सैन्य टकराव तीसरे चरण में पहुँचा, सीधा शुरू।
- दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हवाई-मिसाइल हमले कर रहे।
- होर्मुज पर तनाव बढ़ा, पड़ोसी देश भी अब संकटग्रस्त।
Iran US Conflict: ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सैन्य टकराव काफी तेज हो गया है. इससे क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना के बारे में चिंता बढ़ गई है. हाल ही में हुई घटनाओं से यह पता चलता है कि जंग टकराव से आगे बढ़ गई है. दोनों पक्ष लगातार एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं. हालांकि संघर्ष को अभी भी विश्व युद्ध के रूप में नहीं देखा जा रहा है. इसके लिए कई बड़ी वैश्विक शक्तियों की भागीदारी और लड़ाई के भौगोलिक विस्तार की जरूरत होगी. यह युद्ध अब तीसरे फेस में है.
ईरान अमेरिका संघर्ष का वर्तमान चरण
रिपोर्ट के मुताबिक तनाव कम करने और अस्थायी युद्ध विराम के पहले के प्रायस विफल होने के बाद संघर्ष सीधे टकराव के चरण में आ चुका है. हाल ही में हुई घटनाओं में सैन्य बुनियादी ढांचे, बंदरगाह, और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ ईरान के अंदर रणनीतिक जगहों को लक्षित करने वाले लगातार हवाई हमले शामिल हैं. इसी के साथ ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कर्मियों और संपत्तियों की मेजबानी करने वाली जगहों के खिलाफ मिसाइल हमलों का जवाब दिया है.
होर्मुज बना फ्लैश प्वाइंट
वर्तमान में चल रहे संघर्ष के सबसे जरूरी पहलुओं में से एक कच्चे तेल के निर्यात के लिए दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग में से एक होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ता तनाव है. इस रास्ते के जरिए शिपिंग में किसी भी रुकावट का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत असर पड़ता है. समुद्री यातायात पर प्रतिबंध या फिर कमर्शियल जहाज पर हमले से तेल की आपूर्ति कम हो जाती है. इसी के साथ परिवहन लागत भी बढ़ जाती है और दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत बढ़ सकती है.
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संघर्ष का क्षेत्रीय प्रभाव
टकराव तेजी से पड़ोसी देशों को संकट में डाल रहा है. खाड़ी देश में सैन्य अड्डे और रणनीतिक सुविधाएं टारगेट बन चुके हैं क्योंकि वे अमेरिकी बलों की मेजबानी करते हैं या फिर अमेरिकी अभियानों को रसद सहायता देते हैं. यही वजह है कि पूरे क्षेत्र के देशों को बढ़ी हुई सुरक्षा चिंता का सामना करना पड़ रहा है. वहीं अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर कड़ी निगरानी बनी हुई है.
इसे विश्व युद्ध कब कहा जाएगा?
दरअसल एक क्षेत्रीय संघर्ष तभी विश्व युद्ध कहलाता है जब वह स्थानीय प्रतिभागियों से परे फैलता है. साथ ही इसमें सीधे तौर पर कई बड़े देश शामिल होते हैं. अगर एक संभावित परिदृश्य की बात करें तो संयुक्त राज्य अमेरिका या फिर उसके सहयोगियों के खिलाफ युद्ध अभियान में रूस या फिर चीन जैसे देशों का सीधा प्रवेश होगा. इसी के साथ रिपोर्ट्स अक्सर अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के दौरान अलग-अलग देशों द्वारा प्रदान किए गए राजनयिक, आर्थिक, साइबर या फिर खुफिया समर्थन पर भी चर्चा करती हैं. एक दूसरे अंदाजे में परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल शामिल होगा. कोई भी परमाणु आदान-प्रदान संघर्ष की प्रकृति को बदल सकता है और तेजी से बाकी देशों को युद्ध में शामिल कर सकता है.
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