1 घंटे की चढ़ाई सिर्फ 20 मिनट में, जानें किस तरह बनाया गया दुनिया का सबसे लंबा एस्कलेटर?
दुनिया में एक जगह 905 मीटर लंबा दुनिया का सबसे बड़ा आउटडोर एस्केलेटर सिस्टम शुरू किया गया है. इस नेटवर्क ने एक घंटे की पैदल चढ़ाई को मात्र 20 मिनट के सुहाने सफर में बदल दिया है.

- चीन के वुशान में 905 मीटर लंबा आउटडोर एस्केलेटर बना.
- दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर एक घंटे का सफर 20 मिनट हुआ.
- 21 एस्केलेटर, 8 लिफ्ट का नेटवर्क, इंजीनियरिंग का अद्भुत ढांचा.
- पर्यटन, जीवनशैली, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई गति.
चीन के हुबेई प्रांत के वुशान शहर ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने दुनिया भर के आर्किटेक्ट्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है. पहाड़ की दुर्गम ऊंचाइयों पर बसने वाले लोगों के लिए जो सफर कभी थका देने वाला और समय लेने वाला था, उसे अब आधुनिक तकनीक ने बेहद सुखद बना दिया है. वुशान में तैयार किया गया 905 मीटर लंबा यह आउटडोर एस्केलेटर न केवल दुनिया का सबसे लंबा एस्केलेटर सिस्टम है, बल्कि यह चीन की बढ़ती तकनीकी शक्ति का एक चमकता हुआ प्रतीक भी बन गया है.
एक घंटे का सफर मिनटों में सिमटा
वुशान शहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां के कई रिहाइशी और जरूरी इलाके पहाड़ियों पर स्थित हैं. पहले स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को मुख्य शहर से इन ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए एक घंटे की कठिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती थी. उम्रदराज लोगों और मरीजों के लिए यह रास्ता किसी सजा से कम नहीं था. लेकिन अब 905 मीटर लंबे इस एस्केलेटर सिस्टम ने पासा पलट दिया है. जो रास्ता एक घंटे में तय होता था, वह अब महज 20 मिनट में सुलभ हो गया है.
इंजीनियरिंग का अद्भुत और जटिल ढांचा
इसे दुनिया का सबसे लंबा एस्केलेटर कहना तकनीकी रूप से पूरी तरह सही नहीं होगा, क्योंकि यह कोई एक इकलौती मशीन नहीं है. यह असल में 21 अलग-अलग एस्केलेटरों, 8 अत्याधुनिक लिफ्टों, कई चलते हुए रास्तों (मूविंग वॉकवे) और पैदल पुलों का एक मिला-जुला नेटवर्क है. इंजीनियरों ने इसे पहाड़ की ढलान के हिसाब से इस तरह डिजाइन किया है कि यह प्राकृतिक लैंडस्केप के साथ पूरी तरह घुल-मिल गया है. इसमें सुरक्षा के कड़े मानकों का पालन किया गया है ताकि ढलान पर भी लोगों को संतुलन की समस्या न हो.
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जरूरी सेवाओं तक पहुंचना हुआ आसान
इस एस्केलेटर के शुरू होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय जनजीवन में भी क्रांतिकारी बदलाव आया है. हर दिन लगभग 9 हजार लोग इस सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं. इसके जरिए अब ऊंचाई पर बने स्कूलों, अस्पतालों और म्यूजियमों तक पहुंचना बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद आसान हो गया है. इस परिवहन क्रांति ने पहाड़ पर रहने वाले लोगों को मुख्य शहर की मुख्यधारा से जोड़ दिया है, जिससे उनकी रोजमर्रा की मुश्किलें काफी हद तक कम हो गई हैं.
रात में नजर आती है रोशनी की खूबसूरत लकीर
वुशान का यह एस्केलेटर सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि कला का नमूना भी है. रात के समय जब इस पूरे सिस्टम की लाइटें जलाई जाती हैं, तो दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पहाड़ के सीने पर रोशनी की कोई सुनहरी लकीर बिछी हो. रास्ते में कई व्यू पॉइंट बनाए गए हैं, जहां से यात्री पहाड़ के उतार-चढ़ाव और पास से गुजरने वाली नदी का मनमोहक नजारा देख सकते हैं. यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.
पहाड़ी शहरों के लिए ग्लोबल रोल मॉडल
दुनिया के कई पहाड़ी शहर अब वुशान के इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं. ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भारी वाहन या मेट्रो ले जाना जहां नामुमकिन होता है, वहां इस तरह का एस्केलेटर सिस्टम एक बेहतरीन समाधान पेश करता है. चीन ने यह साबित कर दिया है कि अगर तकनीक को सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए, तो प्रकृति की चुनौतियों को भी सुगमता में बदला जा सकता है. यह प्रोजेक्ट आधुनिक शहरी नियोजन और सार्वजनिक परिवहन का एक नया अध्याय लिख रहा है.
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