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इस्तीफा देने के बाद भी जिंदगीभर ट्रस्ट में कैसे रहेंगे चंपत राय? यह नियम उड़ा देगा होश

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी की खबर के बाद से लगातार कार्रवाई हो रही है. इसी बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. चलिए जानें कि वे इसके बाद भी ट्रस्ट में कैसे शामिल रहेंगे.

अयोध्या का श्रीराम मंदिर पिछले कई सालों से लगातार किसी न किसी वजह से चर्चा में रहता है. कभी बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर, कभी रामलला के टेंट में रहने को लेकर, कभी राम मंदिर के निर्माण को लेकर तो अब मंदिर के दान में हुई चोरी के गबन को लेकर सुर्खियों में बना है. चढ़ावे में चोरी की खबरों के बाद ट्रस्ट के कद्दावर चेहरे और महासचिव चंपत राय के साथ-साथ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि चंपत राय इस इस्तीफे के बाद भी जिंदगीभर ट्रस्ट का हिस्सा बने रहेंगे. आइए जानें कि यह नियम क्या है.

महासचिव का पद छूटा लेकिन ट्रस्ट की सदस्यता बरकरार

चंपत राय के इस फैसले को लेकर आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इसके पीछे की कानूनी हकीकत सीधी है. दरअसल चंपत राय ने महासचिव के कार्यकारी पद से इस्तीफा दिया है, न कि ट्रस्ट की मूल सदस्यता से. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नियमावली के मुताबिक, किसी पद की जिम्मेदारी छोड़ना और संस्था से पूरी तरह से अलग होगा, दोनों ही दो अलग अलग बातें हैं. उन्होंने अपने रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज वाले पद को छोड़ा है, जिससे वे महासचिव के दायित्वों से मुक्त हो चुके हैं लेकिन ट्रस्ट के अंदर उनका वजूद पहले की तरह कायम रहेगा.

आजीवन ट्रस्टी रहने का नियम

इस पूरे मामले की असली जड़ ट्रस्ट के संविधान और उसके उपनियमों में छिपी है, जो आम आदमी के होश उड़ाने के लिए काफी है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियमों में यब साफ तौर पर लिखा है कि जो भी ट्रस्टी हैं, वो आजीवन इसके सदस्य होते हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बार ट्रस्टी बनने के बाद कोई भी व्यक्ति जीवनभर उस संस्था का हिस्सा बना रहता है. नियम के अनुसार जब तक कोई गंभीर कानूनी या स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल न हो, तब तक ट्रस्टी की सदस्यता खत्म नहीं होती. यही वजह है कि पद छोड़ने के बाद भी चंपत राय ट्रस्ट में बने रहेंगे.

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प्रबंधन समिति और नए फैसलों के अधिकार

राम मंदिर ट्रस्ट का एक पूरा ढांचा बेहद सोची-समझी प्रबंधन समिति के जरिए काम करता है. इस समिति के पास ही ट्रस्टियों की नियुक्ति करने, उनके काम तय करने और जरूरत पड़ने पर बदलाव करने के सारे कानूनी अधिकार सुरक्षित होते हैं. जब कोई ट्रस्टी किसी विशेष पद जैसे अध्यक्ष, महासचिव या कोषाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देता है तो वह केवल उस पद के कामकाज से ही अलग होता है. इसके बाद प्रबंधन समिति आपसी सहमति से उस पद पर किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपती है, लेकिन पुराना सदस्य एक सामान्य और वरिष्ठ ट्रस्टी के रूप में अपनी राय और वोट देने का अधिकार हमेशा रखता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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