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क्या किसी नेता को जेल भेज सकता है चुनाव आयोग, जान लीजिए कितना है ताकतवर

चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता भी लागू हो जाती है. इस दौरान चुनाव आयोग को कई अधिकार मिलते हैं, जिससे वह निष्पक्ष चुनाव करा सके. नियमों का पालन करना किसी भी दल या नेता के लिए जरूरी होता है.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में 'पानी' पर सियासत गर्म हो गई है. आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर दिल्ली में आने वाले यमुना के पानी में जहर मिलाने का आरोप लगाया. इसका बीजेपी ने कड़ा विरोध किया है, साथ ही चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई गई है. इसके बाद चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजकर उनसे  दावों के समर्थन में सबूत की मांग की है. 

इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर भी तीखा हमला बोला है और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त की निंदा भी की है. अब सवाल यह है कि यमुना के पानी में जहर वाले आरोप साबित न होने पर चुनाव आयोग केजरीवाल के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है? क्या चुनाव आयोग किसी नेता को जेल भेज सकता है? उसकी शक्तियां क्या हैं? आइए जानते हैं... 

क्या है मामला?

अरविंद केजरीवाल की ओर से हरियाणा से दिल्ली आने वाली पानी को जहर मिला बताने के बाद सियासत गरमा गई है. बीजेपी और कांग्रेस ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की है और इसे बेहद गंभीर मामला बताया है. इसके बाद चुनाव आयोग ने केजरीवाल को नोटिस जारी कर अपने दावे के समर्थन में सबूत पेश करने को कहा, जिसके बाद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर भी करारा हमला बोला. 

केजरीवाल पर क्या कार्रवाई हो सकती है

जहां तक अरविंद केजरीवाल से जुड़े मुद्दे की बात है तो जानकारों का कहना है कि इस मामले में चुनाव आयोग केजरीवाल को चुनाव प्रचार करने से रोक सकता है. आचार संहिता के मुताबिक, कोई भी नेता आधारहीन बात नहीं कर सकता है. दोषी पाए जाने पर चुनाव आयोग ऐसे नेता या व्यक्ति को चुनाव प्रचार से प्रतिबंधित कर सकता है. यह आयोग पर निर्भर करता है कि वह कितने दिन के लिए उस व्यक्ति पर चुनाव प्रचार यह प्रतिबंध लगाता है. हालांकि, इस मामले में हरियाणा की ओर से मानहानि जैसा मामला दर्ज कराया जा सकता है, जिसमें केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है. बता दें, दिल्ली में 5 फरवरी को वोटिंग होनी है. ऐसे में 3 फरवरी से यहां प्रचार बंद हो जाएगा. 

क्या चुनाव आयोग को है जेल भेजने का अधिकार

किसी भी चुनाव की घोषणा होने के साथ ही आचार संहिता भी लागू हो जाती है. आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग को कई अधिकार मिलते हैं, जिससे वह निष्पक्ष चुनाव करा सके. आचार संहिता के नियमों का पालन करना किसी भी दल या नेता के लिए जरूरी होता है. ऐसे में चुनाव आयोग किसी के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है. चुनाव को प्रभावित करने का दोषी पाए जाने पर चुनाव आयोग पुलिस के ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने का भी आदेश दे सकता है. धर्म-जाति के आधार पर भेदभाव फैलाने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा मतदान की समाप्ति के 48 घंटों के दौरान सार्वजनिक सभाओं पर भी रोक रहती है. इसके तहत भी 2 साल तक कारावास का प्रावधान है. मतदान केंद्र पर भी वोटिंग को प्रभावित करने पर भी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है. 

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