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Muharram 2026: इस्लाम में क्या होता है नफिल रोजा, यह रमजान के फर्ज रोजों से कितना अलग?

Muharram 2026: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल आता है कि नफिल रोजा और रमजान के महीने में रखे जाने वाले रोजे के बीच क्या फर्क होता है. आइए जानते हैं.

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  • मुहर्रम में नफिल रोज़े, अल्लाह की खुशी हेतु स्वैच्छिक होते हैं।
  • रमजान के रोज़े फर्ज, सभी सक्षम मुस्लिमों पर अनिवार्य हैं।
  • नफिल रोज़े अनिवार्य नहीं, इन्हें बिना गुनाह के छोड़ा जा सकता है।
  • नियत और समय के नियम भी दोनों रोजों में भिन्न हैं।

Muharram 2026: मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है और इसे इस्लाम में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. यह महीना कुर्बानी, सब्र, ईमान और याद करने का महीना है. इस दौरान कई मुसलमान मुहर्रम की 9 और 10 तारीख या फिर 10 और 11 तारीख को अपनी मर्जी से रोजे रखते हैं. इन्हें नफिल रोजा कहा जाता है. आइए जानते हैं कि ये रोजे रमजान के महीने में रखे जाने वाले फर्ज के रोजों से अलग कैसे होते हैं.

नफिल रोजा क्या है?

नफिल रोजा एक अपनी मर्जी से रखा गया रोजा है जिसे मुसलमान अल्लाह की खुशी पाने और सवाब कमाने के लिए रखते हैं. रमजान के रोजों के उलट ये रोजे जरूरी नहीं होते और इन्हें अपनी मर्जी से रखा जा सकता है. मुसलमान पूरे साल सुझाए गए दिनों में नफिल रोजा रख सकते हैं. इनमें मुहर्रम के दिन भी शामिल हैं. 

नफिल रोजा और रमजान के रोजे में अंतर 

रमजान के रोजे जरूरी होते हैं. रमजान के दौरान रोजा रखना इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और हर उस बालिग मुसलमान के लिए जरूरी है जो शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम है. इस्लाम के मुताबिक जो इंसान बिना किसी ठोस वजह के जानबूझकर रमजान का रोजा छोड़ता है वह एक बड़ा धार्मिक अपराध करता है और उसे छूटे हुए रोजे की भरपाई करनी पड़ती है.

वहीं दूसरी तरफ नफिल रोजा पूरी तरह से अपनी मर्जी का होता है. इन्हें रखने पर मुसलमान को आध्यात्मिक सवाब मिलता है. अगर वे रोजा ना भी रखें तो कोई गुनाह नहीं होता. क्योंकि ये रोजे अपनी मर्जी से रखने होते हैं इस वजह से इन रोजों को धार्मिक अनिवार्यता के बजाय इबादत के एक और काम के रूप में देखा जाता है.

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रोजे का समय 

रमजान के रोजे सिर्फ इस्लामिक कैलेंडर के 9वें महीने में ही रखे जा सकते हैं. इसी के साथ महीने का हर दिन सुबह से लेकर शाम तक रोजे के लिए तय होता है. वहीं दूसरी तरफ रमजान के अलावा कई सुझाए गए दिनों में नफिल रोजा रखा जा सकता है. 

नियत से जुड़े नियम 

रमजान के रोजों के लिए पहले से नीयत करना जरूरी है. रमजान के फर्ज रोजे के लिए आमतौर पर सुबह से पहले, यानी फज्र की नमाज और सहरी का समय खत्म होने से पहले ही नियत कर लेनी चाहिए.

वहीं नफिल रोजे के लिए कई इस्लामी विद्वानों का यह कहना है कि जिस व्यक्ति ने सुबह से कुछ भी खाया पिया नहीं है वह सुबह के समय या फिर दोपहर से पहले भी इसकी नीयत कर सकता है.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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