Funeral Meal: हिंदुओं में तेहरवीं तो मुस्लिमों में चहल्लुम, क्रिश्चियन और यहूदी मौत के बाद कौन सा भोज करते हैं? जानिए जवाब
Funeral Meal: हिंदू और मुस्लिम धर्म की तरह ही ईसाई और यहूदी धर्म में भी किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भोज रखा जाता है. आइए जानते हैं इन दोनों धर्म में क्या रस्म होती हैं.

- मृत्यु उपरांत कई धर्मों में परिजनों हेतु शोकभोज परंपरा।
- ईसाई 'रिपास्ट' अंतिम संस्कार बाद परिवार को सांत्वना देता है।
- यहूदी 'सेउदत हवराह' शोक सप्ताह का आरंभ करता है।
Funeral Meal: कई धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य और रिश्तेदार प्रार्थना करने, मरे हुए व्यक्ति को याद करने और शोक व्यक्त करने के लिए इकट्ठा होते हैं. हिंदू मृत्यु के 13वें दिन 13वीं की रस्म निभाते हैं. इसी के साथ मुसलमान 40वें दिन चहल्लुम मनाते हैं. साथ ही ईसाई और यहूदी धर्म में भी सामूहिक भोजन और शोक सभाओं की अपनी-अपनी परंपराएं होती हैं. हालांकि उनके रीति रिवाजों का मकसद और समय अलग-अलग होता है.
ईसाई धर्म में अंतिम संस्कार के बाद भोजन
आमतौर पर ईसाई धर्म में अंतिम संस्कार और दफनाने की रस्मों के तुरंत बाद एक खास सभा आयोजित की जाती है. इस सभा को आमतौर पर रिपास्ट या फिर फ्यूनरल रिसेप्शन कहा जाता है. चर्च में प्रार्थना और दफनाने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिवार के सभी सदस्य, रिश्तेदार, दोस्त और समुदाय के लोग भोजन के लिए एक साथ इकट्ठा होते हैं. इस सभा का मकसद शोक में डूबे परिवार को सांत्वना देना और मरे हुए व्यक्ति की याद साझा करना होता है.
इस भोज में परोसा जाने वाला खाना आमतौर पर सादा होता है. आम चीजों में सैंडविच, पास्ता, केक, पुडिंग, चाय, कॉफी और हल्का नाश्ता शामिल होता है. कई पश्चिमी देशों में इस परंपरा को फ्यूनरल टी या फिर फ्यूनरल लंच भी कहा जाता है.
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रिपास्ट क्यों जरूरी है?
यह भोज परिवार के सदस्यों और दोस्तों के लिए अंतिम संस्कार के बाद एक दूसरे को इमोशनली सपोर्ट देने का मौका देता है. यह लोगों को कहानियां, अनुभव और प्यारी यादें साझा करके मरे हुए व्यक्ति के जीवन का जश्न मनाने का मौका भी देता है. धार्मिक रस्मों पर ध्यान लगाने के बजाय यह सभा समुदाय के सहयोग और सामूहिक रूप से याद करने पर जोर देती है.
यहूदी धर्म में अंतिम संस्कार के बाद का भोजन
यहूदी धर्म में शोक मनाने की एक काफी व्यवस्थित परंपरा है. अंतिम संस्कार के तुरंत बाद होने वाले भोजन को सेउदत हवराह कहा जाता है. इसका मतलब है शोक का भोजन. दफनाने के बाद परिवार के करीबी सदस्य घर लौटते हैं और 7 दिन के शोक का समय शुरू करते हैं. इसे शिवा कहा जाता है. इस दौरान शोक मनाने वालों से खुद खाना पकाने की उम्मीद नहीं की जाती है. इसलिए दोस्त, पड़ोसी और समुदाय के सदस्य शोक में डूबे परिवार के लिए पहला भोजन बनाते हैं.
इस भोजन में आमतौर पर उबले हुए अंडे शामिल किए जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनका गोल आकार जीवन और मृत्यु के निरंतर चक्र को दर्शाता है. इसी के साथ साबुत दाल भी परोसी जाती है.
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