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क्या राष्ट्रपति ट्रंप को पद से हटाया जा सकता है, अमेरिकी संविधान में इसे लेकर क्या है नियम?

US Constitution Donald Trump Remove Post: ईस्टर के मौके पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई अश्लील धमकियों ने अमेरिका में संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है. अब वहां ट्रंप को हटाए जाने की बात चल रही है.

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  • ट्रंप के आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट से मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़े हुए.
  • अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन राष्ट्रपति की अक्षमता से संबंधित है.
  • संशोधन की धारा 4 के तहत उपराष्ट्रपति और कैबिनेट राष्ट्रपति हटा सकते हैं.
  • राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया में कांग्रेस के दोनों सदनों की मंजूरी आवश्यक.

अमेरिकी राजनीति में इस समय जबरदस्त उबाल है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक विवादित और सोशल मीडिया पर किए गए बेहद आपत्तिजनक पोस्ट ने न केवल कूटनीतिक मर्यादाएं तोड़ी हैं, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच ट्रंप की इस सनक ने अमेरिकी संविधान के उस पन्ने को पलटने पर मजबूर कर दिया है, जिसे 25वां संशोधन कहा जाता है. अब मांग उठ रही है कि क्या राष्ट्रपति को उनकी कुर्सी से बेदखल करने का वक्त आ गया है? अगर ऐसा है तो अमेरिकी संविधान में इसको लेकर क्या नियम हैं.

ट्रंप की आपत्तिजनक भाषा ने मचाया बवाल

डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर जैसे पवित्र मौके पर सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट किया, जिसने पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया. इस पोस्ट में उन्होंने ईरान को सीधी धमकी दी, लेकिन उसमें इस्तेमाल की गई भाषा बेहद अश्लील और गाली-गलौज से भरी थी. एक देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा रहा है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह व्यवहार किसी सामान्य और संतुलित मस्तिष्क वाले व्यक्ति का नहीं हो सकता, इसलिए अब उनके पद पर बने रहने की योग्यता जांची जानी चाहिए. 

क्या है अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन असल में राष्ट्रपति के पद को लेकर पैदा होने वाले शून्य को भरने के लिए बनाया गया था. साल 1963 में राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या के बाद 1967 में इसे पारित किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि यदि राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाए, वह इस्तीफा दे दे या अपने काम करने में असमर्थ हो जाए, तो सत्ता का हस्तांतरण कैसे होगा. इस संशोधन में कुल चार धाराएं हैं, जो अलग-अलग स्थितियों में लागू की जाती हैं. 

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किस धारा के तहत अमेरिका में हटाए जा सकते हैं राष्ट्रपति?

वर्तमान में जिस धारा की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है धारा 4. यह पूरी दुनिया के सबसे शक्तिशाली पदों में से एक को नियंत्रित करने का सबसे कड़ा प्रावधान है. इसके अनुसार, यदि देश के उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत (यानी 15 में से कम से कम 8 सदस्य) लिखित रूप में कांग्रेस को यह जानकारी दें कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हैं, तो राष्ट्रपति की शक्तियां तुरंत छीन ली जाती हैं. ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति तत्काल एक्टिंग राष्ट्रपति के रूप में देश की कमान संभाल लेता है.

राष्ट्रपति की कुर्सी छीनने की पूरी कानूनी प्रक्रिया

यदि धारा 4 के तहत राष्ट्रपति को हटाया जाता है और राष्ट्रपति यह दावा करता है कि वह पूरी तरह ठीक है, तो मामला कांग्रेस में चला जाता है. ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को चार दिनों के भीतर अपना पक्ष रखना होता है. इसके बाद अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से यह साबित करना अनिवार्य होता है कि राष्ट्रपति वाकई काम करने लायक नहीं हैं. अगर दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति अपनी शक्तियों को दोबारा वापस पा लेता है.

सनक और मानसिक स्वास्थ्य पर उठते सवाल

ट्रंप को हटाने की मांग केवल एक पोस्ट की वजह से नहीं हो रही है, बल्कि उनके लगातार बदलते फैसलों और युद्ध की रणनीति में अस्थिरता को लेकर भी है. मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ट्रंप का कभी ईरान को धमकाना और कभी पूरी तरह हवाई नियंत्रण का झूठा दावा करना, उनकी विश्वसनीयता को खत्म कर रहा है. सीनेटर क्रिस मर्फी जैसे नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि वे कैबिनेट में होते, तो अब तक संवैधानिक वकीलों के साथ इस मुद्दे पर बैठक कर चुके होते. 

कैबिनेट और उपराष्ट्रपति की भूमिका अहम

25वें संशोधन की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इसे लागू करने की पहली चाबी उपराष्ट्रपति के पास होती है. बिना उपराष्ट्रपति की सहमति और हस्ताक्षर के धारा 4 को सक्रिय नहीं किया जा सकता है. अभी तक उपराष्ट्रपति की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पर्दे के पीछे रिपब्लिकन खेमे में भी असंतोष के सुर सुनाई देने लगे हैं. यदि राष्ट्रपति का व्यवहार इसी तरह अनियंत्रित रहा, तो कैबिनेट के लिए भी चुप्पी साधे रखना नामुमकिन हो जाएगा.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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