कब आयोजित किया जाएगा अगला BRICS? अब यह पड़ोसी देश करेगा मेजबानी
BRICS Summit 2026: भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित किया गया. आइए जानते हैं कि अगला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कहां आयोजित किया जाएगा और कब होगा इसका आयोजन.

- विस्तारित ब्रिक्स व ग्लोबल साउथ को मजबूत करेगा चीन।
BRICS Summit 2026: 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया. भारत ने चौथी बार शिखर सम्मेलन की मेजबानी की. वार्षिक बैठक अलग-अलग सदस्य देशों में बारी-बारी से होती है. जैसे ही नई दिल्ली शिखर सम्मेलन समाप्त हुआ अब ध्यान अगले संस्करण पर जा रहा है. इसकी मेजबानी भारत का पड़ोसी देश चीन करेगा.
चीनी राष्ट्रपति ने की घोषणा
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि चीन 2027 में 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. भारत ने चीन को रोटेशन ब्रिक्स से राष्ट्रपति पद भी सौंप दिया है.
चीन 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा
2027 की सभा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के 19वें संस्करण को चिन्हित करेगी. चीन आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2027 को समूह की रोटेशन अध्यक्षता ग्रहण करेगा. हालांकि शिखर सम्मेलन की सटीक तारीख और स्थान की अभी घोषणा नहीं की गई है. चीनी स्टेट मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक चीन की मेजबानी की भूमिका की पुष्टि की गई है जबकि खास शहर और तारीख की घोषणा अलग से किए जाने की उम्मीद है.

ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है
ब्रिक्स की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच घूमती रहती है. इससे अलग-अलग सदस्यों को सालाना शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने और अपने-अपने कार्यालय के लिए प्राथमिकता तय करने की अनुमति मिलती है. 1 जनवरी 2027 को चीन के सत्ता संभालने से पहले भारत की 2026 के अध्यक्षता नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के साथ खत्म होगी. इस वजह से चीन का नेतृत्व समूह के अगले चरण के लिए व्यापक प्राथमिकता और एजेंडा का निर्धारण करेगा.
चीन का 2027 का राष्ट्रपति पद क्यों जरूरी है?
चीन की अध्यक्षता ब्रिक्स के विकास में एक जरूरी चरण में आती है. समूह ने अपनी स्थापना के दो दशक पूरे कर लिए हैं और चीनी मीडिया ने अगले चरण को ब्रिक्स सहयोग के तीसरे स्वर्णिम दशक की शुरुआत के रूप में बताया है.
यह विचार अपने सदस्यों के बीच व्यावहारिक सहयोग का विस्तार करते हुए वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मामलों में संगठन की भूमिका को मजबूत करने की चीन की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है.
विस्तारित ब्रिक्स पर ध्यान दें
बीते कुछ सालों में ब्रिक्स का काफी विस्तार हुआ है. मिस्र, इथोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित देश इस समूह में शामिल हो गए हैं. इससे इसकी भौगोलिक और आर्थिक पहुंच में काफी ज्यादा वृद्धि हुई है.
इस वजह से चीन के राष्ट्रपति पद को देश के एक बड़े और ज्यादा विविध समूह का प्रबंधन करना होगा. राजनीतिक चर्चाओं से हटकर फोकस में विस्तारित सदस्यता के बीच विकास, व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में व्यापारिक परिणाम में सहयोग को परिवर्तित करना शामिल होने की उम्मीद है. विस्तारित समूह चीन को उन देशों के साथ संबंधों को गहरा करने का मौका भी देता है जो हाल ही में ब्रिक्स ढांचे में शामिल हुए हैं.

चीन और ग्लोबल साउथ की आवाज
चीन के राष्ट्रपति पद के दौरान एक और प्रमुख प्राथमिकता ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की उम्मीद है. यह मोटे तौर पर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का जिक्र करती है. ब्रिक्स ने खुद को एक ऐसे मंच के रूप में बताया है जिसके जरिए से विकासशील देश वैश्विक फैसले लेने में बड़ी भूमिका की तलाश कर सकते हैं. उम्मीद है कि चीन इस एजेंडा को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए अपने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल करेगा.
यह भी पढ़ेंः क्यूबा पर अमेरिका ने कब से बैन लगा रखा है और क्यों, जानें क्या है इतिहास?
2027 के समिट से क्या उम्मीद की जा सकती है?
चीन की तरफ से औपचारिक घोषणा होने के बाद ही इसका सही एजेंडा, जगह और तारीख साफ हो पाएंगी. हालांकि 19वां ब्रिक्स समिट जरूरी हो सकता है क्योंकि ग्रुप के हालिया विस्तार के बाद चीन की अध्यक्षता में यह पहला सालाना समिट होगा.
यह भी पढ़ेंः क्या चीन रोक सकता है ब्रह्मपुत्र का पानी, जानें क्या कहता है कानून?
























