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Black Umbrella Science : छाते ज्यादातर काले रंग के ही क्यों होते हैं, क्या है इसके पीछे का साइंस?

Black Umbrella Science : आपने भी देखा होगा कि बाजार में ज्यादातर छाते काले रंग के ही दिखाई देते हैं. हालांकि आजकल अलग-अलग रंगों और डिजाइन वाले छाते भी मिलने लगे हैं.

Black Umbrella Science : गर्मी का मौसम आते ही लोग तेज धूप और लू से बचने के तरीके ढूंढने लगते हैं. कोई सिर पर गमछा रखता है तो कोई टोपी पहनता है, लेकिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल छाते का होता है. आपने भी देखा होगा कि बारिश से बचना हो या तेज धूप से बाजार में ज्यादातर छाते काले रंग के ही दिखाई देते हैं. हालांकि आजकल अलग-अलग रंगों और डिजाइन वाले छाते भी मिलने लगे हैं, लेकिन फिर भी ब्लैक छाता सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर छाते ज्यादातर काले रंग के ही क्यों होते हैं और इसके पीछे का साइंस क्या है. 

छाते ज्यादातर काले रंग के ही क्यों होते हैं?

साइंस के मुताबिक काला रंग सूरज की रोशनी और अल्ट्रावॉयलेट यानी यूवी किरणों को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है. यही कारण है कि जब कोई व्यक्ति काले रंग के कपड़े पहनता है तो उसे ज्यादा गर्मी महसूस होती है. ब्लैक टीशर्ट शरीर से चिपकी होती है. ऐसे में कपड़ा सूरज की गर्मी को सोखकर सीधे शरीर तक पहुंचा देता है. इसी वजह से गर्मियों में काले कपड़े पहनने पर ज्यादा पसीना और गर्मी महसूस होती है. छाते के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग होती है. छाता शरीर से कुछ दूरी पर रहता है. जब काला छाता सूरज की किरणों को सोखता है तो वह गर्मी छाते की ऊपरी सतह पर ही रुक जाती है और सीधे शरीर तक नहीं पहुंच पाती है. इस तरह छाता धूप और यूवी किरणों को शरीर तक आने से रोक देता है. यही वजह है कि काला छाता तेज धूप में ज्यादा असरदार माना जाता है.

इसके पीछे का साइंस क्या है?

सूरज की किरणों में मौजूद यूवी-ए और यूवी-बी किरणें स्किन के लिए नुकसानदायक मानी जाती हैं. लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से सनबर्न, स्किन एलर्जी और त्वचा संबंधी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं. काला छाता इन हानिकारक किरणों को काफी हद तक अवशोषित कर लेता है. इससे शरीर पर उनका असर कम पड़ता है. यही कारण है कि एक्सपर्ट भी तेज धूप में छाते का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

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बारिश में कैसे फायदेमंद होता है काला छाता?

काला छाता सिर्फ धूप में ही नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में भी उपयोगी माना जाता है. काले रंग पर गंदगी और दाग कम दिखाई देते हैं. साथ ही यह जल्दी सूख भी जाता है. इसी कारण पुराने समय से काले छाते ज्यादा बनाए और इस्तेमाल किए जाते रहे हैं. 

क्या रंग-बिरंगे छाते कम सुरक्षित होते हैं?

आजकल फैशन के कारण लोग रंग-बिरंगे छाते भी इस्तेमाल करते हैं. हालांकि हल्के रंग के छाते धूप को कुछ हद तक रिफ्लेक्ट जरूर करते हैं, लेकिन यूवी किरणों को उतना प्रभावी तरीके से नहीं रोक पाते जितना काला छाता रोकता है.इसी वजह से तेज धूप और गर्मी में ब्लैक छाता ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है.

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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