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Bihar Elections: क्या आम आदमी भी लड़ सकता है बिहार की किसी भी सीट से चुनाव? जानें नामांकन का प्रोसेस

Bihar Assembly Elections: क्या सच में कोई भी आम इंसान बिहार की किसी भी सीट से चुनाव लड़ सकता है? चलिए जानें कि नामांकन की असली प्रक्रिया और उससे जुड़े जरूरी नियम क्या हैं.

Bihar Assembly Elections: बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं. 6 अक्टूबर के बाद कभी भी चुनाव की तारीखों का एलान हो सकता है. राजनीतिक जगत में चुनाव को लेकर माहौल गरमाया हुआ है. आज (शुक्रवार) बिहार में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी भी बना ली है. अब वे अपने पिता और भाई से अलग होकर नई पार्टी से चुनाव लड़ेंगे. खैर इसी क्रम में चलिए आपको यह बताते हैं कि आखिर क्या कोई आम आदमी भी बिहार की किसी सीट से चुनाव लड़ सकता है, या नहीं? ऐसे में उसके लिए नामांकन का प्रॉसेस क्या है. 

कोई भी लड़ सकता है चुनाव

भारत का लोकतंत्र हर नागरिक को चुनाव लड़ने का अधिकार देता है. यही वजह है कि कोई भी साधारण व्यक्ति, अगर तय शर्तें पूरी करता है, तो बिहार विधानसभा या लोकसभा की किसी भी सीट से चुनाव लड़ सकता है. इसके लिए चुनाव आयोग ने एक स्पष्ट प्रक्रिया और नियम तय किए हैं. 

चुनाव लड़ने की बुनियादी शर्तें

सबसे पहले उम्मीदवार की आयु तय होनी चाहिए. विधानसभा चुनाव के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष और लोकसभा चुनाव के लिए भी यही उम्र तय की गई है. उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए और उसका नाम मतदाता सूची में होना जरूरी है. इसके अलावा, वह किसी आपराधिक मामले में अयोग्य घोषित न किया गया हो और दिवालिया घोषित न हुआ हो.

नामांकन पत्र भरना

जब चुनाव की अधिसूचना जारी होती है, तो नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाती है. उम्मीदवार को चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए नामांकन पत्र भरना होता है. इसमें व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा, संपत्ति, देनदारियों और आपराधिक मामलों (यदि कोई हो) का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य है. 

अगर उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल से चुनाव लड़ रहा है तो उसे सिर्फ एक प्रस्तावक की जरूरत होती है. लेकिन यदि कोई स्वतंत्र उम्मीदवार मैदान में उतरता है, तो विधानसभा चुनाव के लिए कम से कम 10 प्रस्तावक और लोकसभा चुनाव के लिए 10 प्रस्तावक जरूरी होते हैं. ये सभी प्रस्तावक उसी क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होने चाहिए.

नामांकन फीस

नामांकन के साथ सुरक्षा फीस जमा करनी होती है. विधानसभा चुनाव के लिए सामान्य उम्मीदवार को 10,000 रुपये और अनुसूचित जाति/जनजाति उम्मीदवार को 5000 रुपये जमा करने पड़ते हैं. लोकसभा चुनाव में यह राशि सामान्य उम्मीदवार के लिए 25,000 रुपये और एससी/एसटी उम्मीदवारों के लिए 12,500 रुपये तय की गई है.

नामांकन की जांच और वापसी

नामांकन दाखिल होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर उसकी जांच करता है. अगर सभी कागजात सही पाए जाते हैं, तो उम्मीदवार का नाम मंजूर कर लिया जाता है. अगर कोई कमी पाई जाती है, तो नामांकन खारिज भी किया जा सकता है. नामांकन वापस लेने की भी अंतिम तारीख होती है, जिसके बाद ही उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होती है.

यह भी पढ़ें: Tej Pratap Yadav New Political Party: कितने रुपये में बन जाती है नई पॉलिटिकल पार्टी, कम से कम कितने कार्यकर्ता जरूरी

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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