Balochistan History: कभी बलूचिस्तान पर राज करते थे हिंदू, जानें यहां कैसे कायम हुआ मुस्लिम शासन?
Balochistan History: बलूचिस्तान ने खुद को एक आजाद देश घोषित कर दिया है. आइए जानते हैं कि यहां मुस्लिम समुदाय का राज कैसे हुआ था.

Balochistan History: सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि बलूचिस्तान ने खुद को आजाद देश घोषित कर दिया है. इसी बीच लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब बलूचिस्तान पर कभी हिंदू राज करते थे तो वहां मुस्लिम शासन कैसे कायम हुआ. अरबों की जीत और बाद में इस्लामी राजवंशों के आने से पहले यहां हिंदू और बौद्ध राज्य हुआ करते थे. आइए जानते हैं क्या था इसका इतिहास.
बलूचिस्तान की प्राचीन हिंदू विरासत
बलूचिस्तान का पुरातत्व इतिहास दक्षिण एशिया के सबसे पुराने इतिहास में से एक है. आज के बलूचिस्तान में मौजूद मेहरगढ़ की प्राचीन बस्ती दुनिया के सबसे शुरुआती खेती करने वाले समुदायों में से एक है. यह उन शुरुआती धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के सबूत देता है जो इस्लाम के आने से हजारों साल पहले मौजूद थी.
पहली और तीसरी सदी ईसवी के बीच इस इलाके के कुछ हिस्सों पर पारत राजाओं का राज था. इस दौर के सिक्कों पर स्वास्तिक जैसे निशान और ब्राह्मी लिपि में लिखे कुछ शब्द मिलते हैं. यह हिंदू संस्कृति के प्रभाव को दिखाता है.
इस्लाम के आने से काफी पहले बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों पर राय और सेवा राजवंशों का भी शासन था. रिकॉर्ड्स के मुताबिक आज का सिब्बी इलाका सेवा शासकों से जुड़ा हुआ है. सातवीं सदी में सिंध के ब्राह्मण शासक अरोर के राजा चच ने बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों पर राज किया था.
मुस्लिम शासन की शुरुआत
बलूचिस्तान में मुस्लिम प्रभाव की शुरुआत शुरुआती अरब विस्तार के दौरान हुई थी. लगभग 654 ईस्वी में खलीफा राशिदुन के शासनकाल में सिस्ताश के गवर्नर अब्दुल रहमान इब्न समराह के नेतृत्व में एक सेना बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ी और क्वेटा और बोलान के आसपास के इलाकों सहित कई बड़ी बस्तियों पर कब्जा कर लिया. बाद में उमय्यद खलीफा मुआविया प्रथम के तहत मुस्लिम सेनाओं ने लंबे सैन्य अभियान के बाद रणनीतिक रूप से मकरान इलाके पर अपना कंट्रोल मजबूत किया.
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मोहम्मद बिन कासिम का अभियान
711 ईस्वी में एक बड़ा मोड़ आया जब मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध के राजा दाहिर को हराया. इसके बाद अरब शासन का विस्तार सिंध और आसपास के इलाकों में हुआ. इसमें आज के बलूचिस्तान के कुछ हिस्से भी शामिल थे. बाद में यह इलाका बड़े इस्लामी खिलाफत का हिस्सा बन गया.
धीरे-धीरे हुआ बदलाव
बलूचिस्तान में इस्लाम का प्रसार एकदम से नहीं हुआ. यह कई सदियों में राजनीतिक शासन, व्यापार, प्रवास, धर्म प्रचार और सामाजिक मेल-जोल के जरिए धीरे-धीरे हुआ. बाद के इस्लामी राजवंश जैसे गजनवी, गोरी और बाद में कलात के खान जैसे क्षेत्रीय बलूच शासकों ने इस इलाके में मुस्लिम राजनीतिक सत्ता को मजबूत किया.
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