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जापान का महा-प्लान..80 साल बाद बनाने जा रहा खुफिया एजेंसी, जानें क्यों उठाया यह कदम?

Japan Intelligence Agency: जापान 80 साल बाद अपनी खुफिया एजेंसी तैयार करने जा रहा है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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  • जापान युद्धोपरांत पहली बार केंद्रीय खुफिया एजेंसी का गठन करेगा।
  • यह चीन, रूस, उत्तर कोरिया और साइबर हमलों से निपटने हेतु।
  • बिखरे खुफिया सिस्टम की जगह एकीकृत प्रणाली स्थापित की जाएगी।
  • राष्ट्रीय खुफिया परिषद व ब्यूरो के तहत नया ढांचा होगा।

Japan Intelligence Agency: जापान अपने राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव कर रहा है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान पहली बार एक केंद्रीय खुफिया एजेंसी बनाने की तैयारी कर रहा है. सरकार चीन, रूस और उत्तर कोरिया से बढ़ते भू राजनीतिक खतरों और साइबर हमले का मुकाबला करने के लिए एक नेशनल इंटेलिजेंस ब्यूरो बनाने की योजना बना रही है. आइए जानते हैं कि जापान ने लगभग 8 दशकों के बाद यह कदम क्यों उठाया है और यह नया खुफिया सिस्टम कैसे काम करेगा.

जापान नई खुफिया एजेंसी क्यों बना रहा है? 

जापान ने इंडो पेसिफिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधि, जासूसी की चिंता और साइबर खतरों में तेजी से बढ़ोतरी देखी है. सरकार के आकलन के मुताबिक चीन, रूस और उत्तर कोरिया से बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों की वजह से एक ऐसे केंद्रीय खुफिया ढांचे की जरूरत है जो राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान में बेहतर ढंग से तालमेल बिठा सके. 

सरकार का ऐसा कहना है कि मौजूदा सिस्टम आधुनिक सुरक्षा चुनौती, खासकर साइबर युद्ध और विदेशी खुफिया अभियान से निपटने के लिए अब काफी नहीं रहा है.

बिखरे हुए खुफिया सिस्टम की वजह से सुधार की जरूरत 

अब तक जापान में खुफिया जानकारी इकट्ठा करने का काम पांच अलग-अलग संगठन स्वतंत्र रूप से करते थे. इनमें नेशनल पुलिस एजेंसी, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय शामिल हैं. क्योंकि ये एजेंसी अलग-अलग काम करती हैं इस वजह से खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया अक्सर धीमी हो जाती है. इसी के साथ विभागों के बीच तालमेल भी सीमित हो जाता है. नए सिस्टम का मकसद खुफिया जानकारी इकट्ठा करना, उसका विश्लेषण करना और उसे आगे पहुंचाने के लिए एक ही कमांड स्ट्रक्चर बनाकर इन कमियों को दूर करना है.

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साइबर हमले और गलत जानकारी फैलाना बड़ी चिंता 

जापान तेजी से ऐसे डिजिटल साइबर हमलों का निशाना बन रहा है जिनका मकसद अहम टेक्नोलॉजी और सरकार की संवेदनशील जानकारी को चुराना है. अधिकारियों ने विदेशी दुष्प्रचार अभियान पर भी चिंता जताई है. इसमें जापानी भाषा के फर्जी समाचार नेटवर्क के जरिए प्रोपेगेंडा फैलाना शामिल है. 

कैसे काम करेगा यह नया इंटेलिजेंस स्ट्रक्चर?

मौजूदा कैबिनेट इंटेलिजेंस एंड रिसर्च ऑफिस की जगह दो नई केंद्रीय संस्थाएं काम करेंगी. नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल, इसके प्रमुख प्रधानमंत्री होंगे, इंटेलिजेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर देश की सबसे बड़ी रणनीतिक फैसला लेने वाली संस्था के तौर पर काम करेगी. 

इसी के साथ नेशनल इंटेलिजेंस ब्यूरो ऑपरेशनल विंग के तौर पर काम करेगा. यह इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, जासूसी रोकने के ऑपरेशन, साइबर सुरक्षा और इंटेलीजेंस के विश्लेषण के लिए जिम्मेदार होगा.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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