बाबा नीब करौरी के पास कितनी थी प्रॉपर्टी, जानें अब किसके पास मालिकाना हक?
Baba Neeb Karori Property: बाबा नीब करौरी की संपत्ति को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि नीब करौरी के पास कितनी संपत्ति थी और उस पर किसका मालिकाना हक है.

- फ़िरोज़ाबाद में बाबा नीम करौरी की पुश्तैनी संपत्ति पर विवाद।
- ट्रस्ट द्वारा प्रबंधित, पोतियों ने अवैध कब्जे का आरोप लगाया।
- पोते ने पोतियों के आरोपों को नकारा, प्रशासन ने जांच बैठाई।
Baba Neeb Karori Property: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला इलाके में अकबरपुर गांव इन दोनों बाबा नीम करौरी के पुश्तैनी घर को लेकर चल रहे विवाद की वजह से चर्चा में है. बाबा नीब करौरी के भारत और विदेशों में लाखों भक्त हैं. जहां जिला प्रशासन ने संपत्ति से जुड़ी शिकायतों की जांच शुरू कर दी है वहीं उत्तर प्रदेश सरकार इस ऐतिहासिक गांव को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने के मकसद से एक भव्य कॉरिडोर का प्लान भी बना रही है. इस विवाद के बीच सवाल उठ रहा है कि बाबा नीब करौरी के पास असल में कितनी संपत्ति थी और आज उस पर किसका मलिक आना हक है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
बाबा नीब करौरी के पास कितनी संपत्ति थी?
उनकी पुश्तैनी संपत्ति के बारे में मौजूद जानकारी के मुताबिक अकबरपुर में बाबा नीम करौरी की निजी या फिर पारिवारिक संपत्ति में लगभग 450 वर्ग फुट में फैला एक पुश्तैनी घर शामिल था. यह घर ऐतिहासिक रूप से बाबा से जुड़ा हुआ है और इसमें कई जरूरी जगहें शामिल हैं. जैसे उनका ध्यान कक्ष, भजन क्षेत्र, अतिथि कक्ष और सोने का कैमरा. बाबा के जीवन से जुड़ाव की वजह से उनके अनुयायियों के लिए इन कमरों का धार्मिक और भावनात्मक महत्व है.
हालांकि कुछ रिपोर्टर्स में यह भी बताया गया है कि यह बड़ा डुप्लेक्स कॉम्प्लेक्स लगभग 4000 वर्ग फुट के प्लॉट पर बना है. इस ढांचे के अलावा आसपास के इलाके में मौजूद पुश्तैनी जमीन में फलों के बाग और बगीचे भी शामिल बताए जाते हैं.
इस वजह से बाबा से जुड़ी संपत्ति को सिर्फ करोड़ों की शहरी संपत्ति नहीं माना जाना चाहिए. जमीन का सटीक दायरा और अलग-अलग हिस्सों का कानूनी मालिकाना हक वे मामले हैं जिनकी जांच प्रशासन अब राजस्व और मालिकाना हक के रिकॉर्ड के जरिए कर रहा है.

फिलहाल संपत्ति का प्रबंधन कौन करता है?
अभी इस पुश्तैनी संपत्ति का रखरखाव और प्रबंधन श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है. इस ट्रस्ट की प्रमुख बाबा नीब करौरी की बेटी गिरिजा देवी भेटले हैं. इसी के साथ संजय गुप्ता इसके सचिव हैं. ट्रस्ट ही फिलहाल इस पुश्तैनी परिसर के रखरखाव और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है. हालांकि किसी संपत्ति का प्रबंधन या फिर उस पर कब्जा होने का मतलब यह नहीं होता कि कानूनी मालिकाना हक का सवाल भी सुलझ गया है. यही अंतर मौजूदा विवाद की मुख्य वजह बन चुका है.
बाबा की पोतियां मालिकाना हक का दवा क्यों कर रही हैं?
बाबा के छोटे बेटे स्वर्गीय धर्म नारायण शर्मा की छह पोतियों ने फिरोजाबाद जिला प्रशासन से शिकायत की है. इन 6 महिलाओं, सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, रितु और ऋचा ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के सेक्रेटरी संजय गुप्ता ने गैर कानूनी तरीके से पुश्तैनी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है और उन्हें वहां रहने से रोका है.
उन्होंने बाबा के वंशज होने के नाते अपने अधिकारों का दावा किया है और प्रशासन से मांग की है कि वह संबंधित रेवेन्यू रिकॉर्ड और मालिकाना हक के दस्तावेजों की जांच करें.

बाबा के पोते का दावा
परिवार का एक और पक्ष भी है. बाबा नीब करौरी के सबसे बड़े बेटे के बेटे धनंजय शर्मा ने अपनी बहनों द्वारा लगाए गए आरोपों से खुद को अलग कर लिया है. उनके मुताबिक संपत्ति बाबा की इच्छा के मुताबिक ट्रस्ट को सौंप दी गई थी. उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया कि विवाद के केंद्र में करोड़ों की संपत्ति है. धनंजय ने आरोप लगाया कि उनकी बहनों के पति इस विवाद को बढ़ावा दे रहे हैं.
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प्रशासन ने जांच शुरू की
शिकायत के बाद फिरोजाबाद के जिला मजिस्ट्रेट ने तीन सदस्यों की जांच समिति का गठन किया है. समिति संपत्ति की कानूनी स्थिति का पता लगाने के लिए मालिकाना हक के दस्तावेज, रेवेन्यू रिकॉर्ड और दूसरी संबंधित सामग्री की जांच कर रही है.
इसी तरह जहां बाबा नीब करौरी कब पुश्तैनी घर एक जरूरी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थल बना हुआ है वहीं इसके कानूनी मालिकाना हक का सवाल अभी तक निर्णायक रूप से सुलझा या नहीं जा सका है.
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